बदलते समय के साथ बदलें अपने जीने का तरीका

निरन्तर बदलते समय में काम करने की पद्धति भी बदलती जा रही है, जिस कारण लोगों का अधिकांश समय लैपटॉप और स्क्रीन के सामने बीतता है लेकिन लगातार ऐसे वर्क कल्चर को अपनाने के कारण कई परेशानियां भी आ रही हैं। जानिए इससे बचने के तरीके...

आयुष्मान खुराना ने एक बार ट्विटर पर लिखा था,
“रात भर चलती रहती है उँगलियाँ मोबाइल पर,
किताब सीने पर रख कर सोये हुये एक ज़माना हो गया।” 

आज स्मार्टफोन हमारी जिंदगी में इस कदर हावी हो गया है कि हम अपने फोन के बिना एक दिन की कल्पना भी नहीं कर पाते लेकिन एक पल को रुक कर सोचने का समय आ गया है कि क्या किसी चीज़ पर इतनी निर्भरता ठीक है, जो हमें पंगु बना दे? तकनीक का विकास लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया गया है लेकिन अब लोग इसके आदी होते जा रहे हैं, जिस कारण तरह-तरह की बीमारियां सामने आ रही हैं। साथ ही कोरोना काल के दौरान काम करने के तरोकों में आये बदलाव ने भी दिनचर्या को काफी बदल दिया है। अब अधिकांश काम ऑनलाइन ही होते हैं, जिसमें घंटो तक लैपटॉप या स्क्रीन पर समय बिताना एक आम बात हो गई है।  

टाइपिंग के दौरान रहे सचेत 

डॉक्टर रवि रंजन, एम.एस (ऑर्थो), इंसाल ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल, रांची, बताते हैं कि आजकल लोगों का अधिकांश काम लैपटॉप या मोबाइल फोन के जरिए होता है, जिस कारण अत्याधिक टाइपिंग के कारण Carpal tunnel syndrome नामक बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसमें अंगुठा, तर्जनी और मध्यमा ऊंगली को जोड़ने वाली माध्यिका तंत्रिका (Median Nerve) पर दबाव पड़ता है। इसके लक्षणों में ऊंगलियों का सुन्न पड़ जाना, झनझनाहट होना, कलाई में दर्द होना मुख्य रुप से शामिल होते हैं। इससे बचने के लिए की-बोर्ड पर लगातार टाइपिंग करने से बचें, माउस को स्क्रॉल करने के दौरान हाथों को आराम की मुद्रा में रखे, की-बोर्ड पर ज्यादा दबाव देकर टाइपिंग ना करें। इसके बजाय हाथों को ढ़ीला रखें लेकिन जब कलाई में दर्द या हाथों में सूनापन या खिंचाव लंबे समय तक महसूस होने लगे, तब तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें। 

रेडियो पर सुने गाने 

मनोचिकित्सक डॉ. बिंदा सिंह बताती हैं कि अत्याधिक मोबाइल फोन या स्क्रीन इस्तेमाल करने से बचना चाहिए लेकिन अगर काम की मजबूरी हो, तब इसके साथ कुछ उपाय किए जा सकते हैं। जैसे – हर एक घंटे पर ब्रेक लें। इस बीच कोशिश करें की कम से कम 15 मिनट जरुर टहलें व स्क्रीन से दूर रहें। इससे ना केवल स्फूर्ति मिलेगी बल्कि काम करने में भी मजा आएगा। काम के बाद जहां तक हो सके अपने फोन के नोटिफिकेशन को बंद कर दें। अपना ऑफिस का समय तय करें और बस इसी बीच ऑफिस का काम करें। रात को अगर नींद ना आए, तो फोन में गाना लगाने के बजाय रेडियो पर गाना सुने।

जानिए शोध क्या कहते हैं

Sciencedirect द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठे रहने से मोटापे की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि शरीर में कोई हलचल नहीं होती। लगातार बैठकर टीवी देखना या मोबाइल इस्तेमाल करते रहने से भी मोटापा समेत अन्य बीमारियां लोगों को अपने गिरफ्त में ले रही है। 

इससे बचने के लिए बेहतर है कि ऑफिस में अपने साथियों के साथ मीटिंग करने के लिए बैठने के बजाय टहलकर बातें करें। 30 मिनट का अंतराल भी कई परेशानियों से बचाने का काम करेगा, साथ ही अपनी अवस्था मेंं बदलाव लाते रहे। 

Economics and Human Biology द्वारा जारी रिपोर्ट में सामने आया है कि मछली पालन, मधुमक्खी पालन या किसानी करने वाले लोगों (Blue Collar Jobs) के मुकाबले इंजीनियर्स, डॉक्टर या अन्य किसी प्रोफेशन (Yellow Collar Jobs, White Collar Jobs आदि) करने वाले लोगों का बीएमआई अधिक पाया गया है। The Lancet द्वारा जारी रिपोर्ट में सामने आया है कि ओबिसिटी से जूझ रहे लोगों में भारत का तीसरा स्थान है।  

अगर बैठना हो लंबे समय तक

डाइटिशियन सुमिता कुमारी बताती हैं कि, “बीएमआई बढ़ने का एक कारण ज्यादा मात्रा में फैट और कोलेस्ट्रोल बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन करना और शारिरीक गतिविधि का कम होना है, जिस कारण बैठकर काम करने पर लोगों का वजन बढ़ता चला जाता है। इससे बचने के लिए बेहतर है कि लोग हल्का परन्तु पौष्टिक भोजन लेकर काम करने बैठें और बीच-बीच में फल खाते रहें। कभी-कभी तनाव कम करने के लिए डार्क चॉकलेट लिया जा सकता है।” ओबिसिटी को कम करने का सबसे सरल उपाय शारिरीक गतिविधि को बढ़ाना और डाइटिंग करना है, जिसके लिए किसी अच्छे डाइटिशियिन से परामर्श लेना जरुरी होता है क्योंकि हर इंसान के शरीर का प्रकार अलग होता है। 

आप काम करना तो बंद नहीं कर सकते लेकिन अपने सेहत को प्राथमिकता देना आपका ही काम है क्योंकि एक अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही जीवन का आनंद लिया जा सकता है। 

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