डॉ. दीपक किशोर वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) में कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजिस्ट हैं और उन्हें 6 साल से अधिक का क्लिनिकल अनुभव है। उन्होंने MBBS, पीडियाट्रिक्स में MD और नियोनेटोलॉजी में DM की पढ़ाई की है। उन्हें DM नियोनेटोलॉजी में गोल्ड मेडल भी मिला है। उनकी विशेषज्ञता नवजात शिशुओं की गहन देखभाल, समय से पहले जन्मे बच्चों की देखभाल और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नवजात चिकित्सा में हैं।
THIP Media से बातचीत में डॉ. दीपक किशोर बताते हैं कि चिकित्सा गलत जानकारी उपचार की प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित कर सकती है। आगे पढ़ें…
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?
कई मरीज पहले से ही यह मानकर डॉक्टर के पास आते हैं कि उनकी समस्या किस वजह से हुई है। वे अक्सर अपने लक्षणों को हाल ही में हुई किसी घटना से जोड़ते हैं, जैसे एक दिन पहले कोई खास खाना खाना। वे अपने सभी लक्षणों को ठीक से बताने के बजाय सिर्फ उस चीज पर ध्यान देते हैं, जिसे वे बीमारी का कारण मानते हैं। इससे डॉक्टर के लिए बीमारी की असली वजह पता करना मुश्किल हो सकता है।
स्वास्थ्य साक्षरता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है?
स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ है भरोसेमंद और विश्वसनीय स्रोतों से सही स्वास्थ्य जानकारी होना। आज के समय में यह बहुत जरूरी है, क्योंकि इंटरनेट पर गलत जानकारी और भ्रामक स्वास्थ्य सलाह से कई लोग प्रभावित होते हैं। अच्छी स्वास्थ्य साक्षरता लोगों को सही फैसले लेने और उचित इलाज का पालन करने में मदद करती है।
यदि किसी मरीज को अपने स्वास्थ्य स्थिति की बुनियादी जानकारी हो, तो यह समग्र उपचार प्रक्रिया के लिए कितना सहायक है?
यदि किसी मरीज को अपने स्वास्थ्य स्थिति की बुनियादी जानकारी हो, तो यह समग्र उपचार प्रक्रिया के लिए काफी सहायक है। वह उपचार प्रक्रिया, उसके लाभ और संभावित जोखिमों को बेहतर तरीके से समझ पाता है। इससे वह सही फैसले ले सकता है और डॉक्टर के साथ अधिक आत्मविश्वास से मिलकर इलाज कर सकता है।
चिकित्सा गलत जानकारी उपचार प्रक्रियाओं को कितना प्रभावित कर सकती है?
चिकित्सा गलत जानकारी को उनकी बीमारी और उपलब्ध इलाज के विकल्पों के बारे में गलत समझ दे सकती है, जिससे उनके इलाज पर असर पड़ सकता है। कई मरीज इलाज के संभावित लाभ और जोखिमों को समझने के बजाय, केवल वही नकारात्मक चीज़ें ध्यान में रखते हैं जो उन्होंने कहीं पढ़ी या सुनी होती हैं। इससे बेवजह डर, भ्रम और इलाज को लेकर झिझक पैदा हो सकती है, जिससे डॉक्टरों के लिए सही इलाज देना मुश्किल हो जाता है।
आपके मरीजों के सबसे आम मिथक क्या हैं?
सबसे आम गलतफहमियों में से एक यह है कि इंटरनेट पर जल्दी से की गई सर्च किसी बीमारी या इलाज के बारे में सभी सवालों के जवाब दे सकती है। असल में, इंटरनेट पर की गई सर्च अक्सर दुर्लभ जटिलताओं और दुष्प्रभाव को ज्यादा दिखाती है, लेकिन यह नहीं बताती कि ये कितने कम मामलों में होते हैं। इसके कारण मरीज बेवजह चिंतित हो सकते हैं या ऐसे इलाज से बच सकते हैं, जो उनके लिए सुरक्षित और लाभदायक हो सकता है।
ऑनलाइन स्वास्थ्य गलत जानकारी से दूर रहने के लिए मरीजों को आपकी सबसे आम सलाह क्या है?
मैं लगभग हर मरीज को एक सलाह देता हूं कि अधूरी जानकारी के भरोसे इलाज न करें। आज के समय में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी हर जगह उपलब्ध है, लेकिन उसमें से हर जानकारी सही या किसी व्यक्ति की बीमारी के लिए उपयोगी नहीं होती है। अधूरी जानकारी कई बार बिल्कुल जानकारी न होने से भी ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि इससे लोग खुद ही अपनी बीमारी का पता लगाने, इलाज में देरी करने या गलत उपाय अपनाने लगते हैं। अगर आपको अपनी सेहत को लेकर कोई चिंता है, तो अधूरी या भ्रामक जानकारी के आधार पर खुद फैसला लेने के बजाय किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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