डॉ. संजीव कुमार, BDS, MBA (हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन), MPH (एपिडेमियोलॉजी), एक दंत चिकित्सक और शोधकर्ता हैं। इनकी विशेषज्ञता क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी, पब्लिक हेल्थ और हेल्थकेयर मैनेजमेंट में है। वर्तमान में डॉ. संजीव कुमार सलाम बालक ट्रस्ट में पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट के रूप में काम कर रहे हैं। THIP मीडिया के साथ बातचीत में डॉ. संजीव कुमार बताते हैं कि गलत जानकारी किस प्रकार सही निर्णय लेने में बाधा डालती है।
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?
कभी-कभी मरीज जरूरी जानकारी जैसे पहले की सर्जरी, पुरानी बीमारियाँ या दवाइयाँ की जानकारी नहीं देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसका उनके वर्तमान समस्या से कोई संबंध नहीं है। कुछ मरीज अपने लक्षणों को डर या शर्म की वजह से अधूरी जानकारी देते हैं, जिससे डॉक्टर उनकी गंभीरता सही से समझ नहीं पाते हैं। इसके अलावा कुछ मरीज जीवनशैली संबंधी कुछ आदतों जैसे धूम्रपान, शराब पीना या दवाइयों के सेवन की जानकारी भी छिपा सकते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उन्हें जज किया जाएगा।
स्वास्थ्य साक्षरता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है?
स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ है कि मरीज स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को कितनी अच्छी तरह से समझते हैं। जब मरीज अपनी सेहत को ठीक से समझते हैं, तब वे इलाज सही तरीके से अपनाते हैं, पुरानी बीमारियों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करते हैं और बीमारियों से बचाव के उपाय भी करते हैं। इससे उनकी सेहत बेहतर रहती है।
इसके अलावा, यह डॉक्टर और मरीज के बीच बातचीत को भी बेहतर बनाता है। मरीज अपने लक्षण साफ-साफ बता पाते हैं, ज़रूरी सवाल पूछते हैं और इलाज संबंधी निर्णय डॉक्टर के साथ मिलकर लेते हैं। इससे बीमारी की सही पहचान और हर मरीज के लिए उपयुक्त इलाज संभव हो पाता है।
मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली के लिए कितना सहायक है?
मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली के लिए बहुत सहायक है क्योंकि वे डॉक्टर की सलाह को बेहतर तरीके से मानते हैं, दवाइयाँ ठीक से लेते हैं, जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करते हैं और फॉलो-अप चेकअप के लिए समय पर जाते हैं। चूंकि, उन्हें अपने स्वास्थ्य की समझ होती है, वे अपने लक्षण, चिंताएं और इलाज के असर को साफ़-साफ़ बता पाते हैं। इससे डॉक्टर को बेहतर और सही फैसला लेने में मदद मिलती है।
चिकित्सा गलत जानकारी उपचार प्रक्रियाओं को कितना प्रभावित कर सकती है?
चिकित्सा गलत जानकारी उपचार प्रक्रियाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसकी वजह से लोग सही इलाज लेने में देर कर देते हैं, जिससे उनकी सेहत और बिगड़ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को कैंसर जैसी बीमारी के बारे में गलत जानकारी मिल जाए, तो वे समय पर जांच या इलाज नहीं कराते, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
आपके मरीजों के सबसे आम मिथक क्या हैं?
मरीजों के मन में विभिन्न प्रकार के मिथक होते हैं। उदाहरण के लिए, वे ऐसा सोचते हैं कि टीकों से ऑटिज़्म या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, शोध से बार-बार पता चलता है कि यह सच नहीं है, फिर भी कुछ लोग इस पर विश्वास करते हैं। इसकी वजह से लोग टीका लगवाने से डरते हैं, जिससे ऐसी बीमारियाँ फैल सकती हैं जिन्हें रोका जा सकता है। अन्य मिथक यह है कि एंटीबायोटिक दवाएं हर बीमारी का इलाज कर सकती हैं। कई लोग सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे वायरल संक्रमण में भी एंटीबायोटिक की मांग करते हैं। लेकिन एंटीबायोटिक सिर्फ बैक्टीरियल संक्रमण में ही काम करती हैं, वायरस पर नहीं। इनका अधिक प्रयोग करने से ये दवाएं धीरे-धीरे असर करना बंद कर देती हैं, जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।
ऑनलाइन स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं से कैसे बचा जा सकता है?
मैं अपने मरीजों को निम्नलिखित सलाह देता हूँ: स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए हमेशा भरोसेमंद वेबसाइटों का ही प्रयोग करें, जैसे सरकारी संस्थाओं या जाने-माने अस्पतालों की वेबसाइटें। सोशल मीडिया या अनजान ब्लॉग्स पर दी गई चिकित्सा जानकारी पर भरोसा न करें क्योंकि वह गलत या भ्रामक हो सकती है।
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