डॉ. अग्निभो मंडल (MBBS, MD – ट्रॉपिकल मेडिसिन) एक चिकित्सक और शोधकर्ता हैं। वे उष्णकटिबंधीय और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं तथा उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग करते हैं। वे 2018 से कोलकाता के स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन में सीनियर रेज़िडेंट के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें सात से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने जटिल संक्रामक रोगों का उपचार किया है और ट्रॉपिकल मेडिसिन, संक्रामक रोग, मधुमेह और हेल्थकेयर में AI पर शोध प्रकाशित किए हैं।
THIP मीडिया के साथ बातचीत में डॉ. अग्निभो मंडल बताते हैं कि चिकित्सा गलत जानकारी देखभाल को गुमराह करती है।
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?
मरीजों की एक आम गलती यह होती है कि वे अपने लक्षणों को क्रमवार बताने की बजाय पहले ही खुद बीमारी का अनुमान लगा लेते हैं। इससे डॉक्टर को सही जानकारी नहीं मिल पाती और उपचार भटक सकता है। विशेषकर पुरानी बीमारियों में लक्षण कब शुरू हुए और कितने समय से हैं, यह बताना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन अक्सर मरीज यह भूल जाते हैं।
कई बार मरीज अपनी पुरानी बीमारियों, चल रही दवाइयों या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी भी नहीं देते, जबकि सही और सुरक्षित इलाज के लिए यह आवश्यक है। उदाहरण के लिए, अगर कोई मरीज HIV की जानकारी छुपाकर मधुमेह का उपचार कराए, तो दवाइयों के दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ मरीज निजी लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी, जैसे यौन व्यवहार, नशे का सेवन या दवा और आहार में लापरवाही, बताने से बचते हैं। इससे डॉक्टर को सही निदान करने में कठिनाई होती है। वहीं कुछ लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया से मिली जानकारी के आधार पर खुद जांच करवा लेते हैं या अपनी राय बना लेते हैं। अगर यह डॉक्टर की सलाह से मेल नहीं खाती, तो इलाज में रुकावट आ सकती है।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना, विशेषकर एंटीबायोटिक, भी एक गंभीर समस्या है। इससे लक्षण छिप सकते हैं, सही जांच में परेशानी हो सकती है और दवाओं के दुष्प्रभाव या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ता है।
इन आदतों के पीछे चिंता या झिझक हो सकती है, लेकिन इससे सही और समय पर इलाज में बाधा आती है। बेहतर इलाज के लिए मरीज को अपने लक्षण साफ, सच्चाई से और क्रमवार बताने चाहिए और बिना सलाह के दवा लेने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य साक्षरता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है?
स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ है ऐसी व्यावहारिक समझ और कौशल, जो व्यक्ति को इलाज के दौरान केवल मरीज नहीं, बल्कि जागरूक भागीदार बनाते हैं।
स्वास्थ्य साक्षर व्यक्ति यह समझता है कि कौन-से लक्षण घर पर संभाले जा सकते हैं और किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। वह यह भी जानता है कि किस समस्या के लिए किस विशेषज्ञ से संपर्क करना है। क्लिनिक में वह अपने लक्षणों को साफ और क्रमवार तरीके से बताता है, जिससे सही निदान में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ यह भी है कि सामान्य बीमारियां अक्सर अपने-आप ठीक हो जाती हैं, इसलिए बिना जरूरत के जांच या खुद से दवा लेना—विशेषकर एंटीबायोटिक—नुकसानदायक हो सकता है। मधुमेह या उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों में दवा के साथ नियमित जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उपचार की सफलता डॉक्टर और मरीज दोनों की साझी जिम्मेदारी होती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य साक्षर व्यक्ति सवाल पूछने, अपनी शंकाएं दूर करने और उपचार की योजना को अच्छी तरह समझने में संकोच नहीं करता है। सही समय पर निर्णय लेना, स्पष्ट बातचीत करना और सक्रिय रूप से शामिल होना बेहतर स्वास्थ्य परिणाम दिलाता है।
यदि किसी मरीज को अपने स्वास्थ्य स्थिति की बुनियादी जानकारी हो, तो यह समग्र उपचार प्रक्रिया के लिए कितना सहायक है?
जब मरीज स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते हैं, तब इलाज केवल डॉक्टर के निर्देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह एक साझेदारी बन जाता है। जागरूक मरीज इलाज के विकल्पों को समझ सकता है, अपनी पसंद बता सकता है और अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी साझा कर सकता है। इंसुलिन की योजना चुनने से लेकर कैंसर की कीमोथेरेपी तक कई इलाज ऐसे होते हैं, जिनमें सही निर्णय के लिए मरीज को लाभ, जोखिम और विकल्पों की बुनियादी समझ होना जरूरी है।
स्वास्थ्य साक्षरता इलाज का पालन करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जो व्यक्ति हर दवा, इंजेक्शन या जीवनशैली में बदलाव का कारण समझता है, वह इलाज को नियमित रूप से अपनाने की अधिक संभावना रखता है। उदाहरण के लिए, इंसुलिन लेने वाले मरीज अगर हाइपोग्लाइसीमिया के शुरुआती लक्षण न पहचानें, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
व्यक्तिगत लाभ के अलावा, जागरूक मरीज अपने परिवार और समुदाय में भी सही जानकारी फैलाते हैं। इससे समाज में स्वास्थ्य के प्रति समझ बढ़ती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
चिकित्सा गलत जानकारी उपचार प्रक्रियाओं को कितना प्रभावित कर सकती है?
चिकित्सा गलत जानकारी उपचार प्रक्रियाओं के हर चरण को प्रभावित कर सकती है। जब मरीज इस जानकारी पर भरोसा करते हैं, तब वे समय पर डॉक्टर से मिलने में देरी कर देते हैं। इससे छोटी समस्या गंभीर बीमारी में बदल सकती है और इलाज अधिक कठिन व महंगा हो जाता है।
जैसे यह गलत धारणा कि हर बुखार में एंटीबायोटिक आवश्यक है, लोगों को खुद से दवा लेने के लिए प्रेरित करती है। इससे दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ता है और सही इलाज के विकल्प कम हो जाते हैं।
गलत जीवनशैली संबंधी सलाह भी नुकसान पहुंचा सकती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति यह मान ले कि केवल किसी फैड आहार से उपचार पूरी तरह ठीक हो सकती है और वह इंसुलिन लेना बंद कर दे, तो कीटोएसिडोसिस जैसी गंभीर जटिलताएं और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है।
गलत जानकारी डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास को भी कमजोर करती है। जब मरीज प्रमाण आधारित चिकित्सा सलाह की बजाय सोशल मीडिया की बातों पर अधिक भरोसा करते हैं, तो इलाज को लेकर मतभेद बढ़ जाते हैं और उपचार का पालन कम हो सकता है।
इसके अलावा, अफवाहें और मिथक अनावश्यक जांच और अस्पताल विजिट बढ़ा देते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। कुल मिलाकर, यह जानकारी जोखिम, खर्च और जटिलताओं को बढ़ाती है और समय पर व प्रभावी इलाज को कठिन बना देती है।
आपके मरीजों के सबसे आम मिथक क्या हैं?
ये सिर्फ तीन आम मिथक हैं, जबकि ऐसे कई और भी गलत विश्वास प्रचलित हैं। इससे पता चलता है कि गलत जानकारी किस तरह इलाज को प्रभावित करती है।
पहला, कई लोग मानते हैं कि हर बार दस्त होने पर मेट्रोनिडाजोल लेना आवश्यक है, जबकि अधिकतर मामलों में दस्त वायरल होते हैं और अपने-आप ठीक हो जाते हैं। बिना जरूरत दवा लेने से दुष्प्रभाव और दवा के प्रति प्रतिरोध बढ़ता है।
दूसरा, अधिकांश लोग बुखार आते ही एंटीबायोटिक शुरू कर देते हैं और जब दवा असर नहीं करती तब डॉक्टर के पास जाते हैं। इससे सही बीमारी पहचानने में कठिनाई होती है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ता है।
तीसरा, कुछ लोगों का मानना है कि मधुमेह की दवा शुरू करने के बाद आहार और व्यायाम की आवश्यकता नहीं रहती है। यह गलत सोच ब्लड शुगर नियंत्रण को खराब करती है और जटिलताएं तेजी से बढ़ाती है।
इन मिथकों को शुरुआत में ही स्पष्ट कर देना अनावश्यक इलाज से बचाता है, सही निदान में मदद करता है और प्रमाण आधारित उपचार पर ध्यान बनाए रखता है।
ऑनलाइन स्वास्थ्य गलत जानकारी से दूर रहने के लिए मरीजों को आपकी सबसे आम सलाह क्या है?
मैं मरीजों को सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह देता हूँ कि किसी भी स्वास्थ्य जानकारी के स्रोत की पहले जांच करें। विश्वसनीय संस्थाओं जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन या अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय की जानकारी पर भरोसा करें। ऐसी बातों से सावधान रहें जिनका आधार किसी भरोसेमंद सार्वजनिक स्रोत से न जुड़ा हो। यह भी याद रखें कि डॉक्टर ने बीमारी से संबंधित वैज्ञानिक पढ़ाई और प्रशिक्षण में कई वर्ष लगाए हैं और वे पूरी स्थिति को समझते हैं। इसलिए अगर उनकी सलाह इंटरनेट या सोशल मीडिया पर मिली जानकारी से अलग हो, तो आमतौर पर अपने डॉक्टर की विशेषज्ञता पर भरोसा करना ही समझदारी होती है।
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