डॉ. गुरमन सिंह भसीन एक त्वचा विशेषज्ञ हैं, जिनके पास त्वचा रोग और सौंदर्य उपचार के क्षेत्र में सात साल का अनुभव है। उन्होंने MBBS और त्वचा रोग (डर्मेटोलॉजी) में MD किया है और यूरोप से एडवांस्ड एस्थेटिक्स की ट्रेनिंग भी ली है। वर्तमान वे नागपुर के केयर हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं।
THIP मीडिया के साथ बातचीत में डॉ. भसीन बताते हैं कि चिकित्सा गलत जानकारी एक गंभीर समस्या बन गई है। इससे डॉक्टरों के लिए मरीज़ों का सही इलाज करना मुश्किल हो जाता है।
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियों में से एक है — वे अपनी बीमारी की पूरी जानकारी नहीं देते है। जैसे, सिर्फ यह कहना कि “रैश हो गया है”, लेकिन यह नहीं बताना कि वह दिखता कैसा है, कब से है और उसके साथ और क्या लक्षण हैं। कई बार लोग यह भी नहीं बताते हैं कि समस्या कब शुरू हुई या उसे शुरू करने वाली कोई वजह हो सकती है। कुछ लोग गलत जानकारी के आधार पर खुद ही मान लेते हैं कि उनकी परेशानी “टॉक्सिन्स” की वजह से है, जबकि इसका कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं होता — इससे डॉक्टर को सही इलाज करने में परेशानी होती है।अक्सर मरीज़ यह भी नहीं बताते कि वे कोई बिना पर्ची वाली दवा (ओवर-द-काउंटर दवाई) या घरेलू नुस्खे का प्रयोग कर रहे हैं, जो डॉक्टर की दवा के साथ असर डाल सकता है। अंत में, अधिकांश मरीज यह नहीं बता पाते हैं कि उनकी बीमारी उन्हें मानसिक या भावनात्मक रूप से कैसे प्रभावित कर रही है, जबकि यह भी इलाज का एक अहम हिस्सा होता है।
स्वास्थ्य साक्षरता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है?
स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ है स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को समझना और उसे सही तरीके से प्रयोग करना। जब मरीजों को यह समझ होती है, तब वे डॉक्टर की सलाह को बेहतर तरीके से मानते हैं, गलत धारणाओं से बचते हैं और उपचार संबंधी सही फैसले ले पाते हैं। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसा बढ़ता है और इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं — विशेषकर एस्थेटिक डर्मेटोलॉजी (सौंदर्य त्वचा चिकित्सा) में, जहाँ साफ़ और ईमानदार बातचीत बहुत जरूरी होती है।
यदि किसी मरीज को अपनी स्वास्थ्य स्थिति की बुनियादी जानकारी हो, तो यह समग्र उपचार प्रक्रिया के लिए कितना सहायक है?
यदि किसी मरीज को अपनी स्वास्थ्य स्थिति की बुनियादी जानकारी हो, तो यह समग्र उपचार प्रक्रिया के लिए बहुत सहायक है। जब मरीज अपनी सेहत को अच्छी तरह समझते हैं, तब वे अपने लक्षणों को साफ़ और सही तरीके से बता पाते हैं। इससे डॉक्टर को सही बीमारी पहचानने और बेहतर इलाज करने में मदद मिलती है। ऐसे मरीज डॉक्टर की सलाह को ठीक से मानते हैं, जिससे इलाज ज़्यादा असरदार होता है। उन्हें अपने उपचार संबंधी उम्मीदें भी हकीकत के करीब होती हैं, जिससे चिंता या निराशा कम होती है। सबसे ज़रूरी बात — समझदार मरीज अपने उपचार संबंधी फैसलों में हिस्सा लेते हैं, जिससे डॉक्टर और मरीज के बीच अच्छी साझेदारी बनती है और इलाज का अनुभव और नतीजे दोनों बेहतर होते हैं।
चिकित्सा गलत जानकारी उपचार प्रक्रियाओं को कितना प्रभावित कर सकती है?
चिकित्सा गलत जानकारी की वजह से उपचार प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है, मरीजों का भरोसा कम हो सकता है, स्टेरॉइड जैसी दवाओं का गलत प्रयोग हो सकता है और मरीज उपचार प्रक्रियाओं से असंतुष्ट रह सकते हैं। अगर मरीजों को पहले से सही जानकारी दी जाए, तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है।
आपके मरीजों के सबसे आम मिथक क्या हैं?
त्वचा की देखभाल को लेकर कई मिथक होते हैं, जिनकी वजह से लोग ऐसे इलाज करते हैं जो काम नहीं करते या उनकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अधिकांश लोग सोचते हैं कि प्राकृतिक उत्पाद हमेशा सुरक्षित होते हैं, लेकिन इससे एलर्जी या नुकसानदायक प्रतिक्रियाएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों को लगता है कि फेयरनेस क्रीम से त्वचा हमेशा के लिए गोरी हो जाती है, लेकिन असल में इसका असर अक्सर अस्थायी होता है और इनमें नुकसान पहुंचाने वाले तत्व भी हो सकते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि ज्यादा रगड़ने से मुहांसे ठीक हो जाते हैं, लेकिन ऐसा करने से त्वचा खराब हो सकती है और मुहांसे और बढ़ सकते हैं। अन्य गलत धारणा है कि लेजर ट्रीटमेंट कैंसर का कारण बनता है, लेकिन वैज्ञानिक सबूतों से पता चलता है कि सही तरीके से किया जाए तो यह सुरक्षित होता है। इन गलतफहमियों को दूर करने के लिए सही जानकारी देना बहुत जरूरी है, ताकि लोग सही फैसले ले सकें।
ऑनलाइन स्वास्थ्य गलत जानकारी से दूर रहने के लिए मरीजों को आपकी सबसे आम सलाह क्या है?
मैं अपने मरीजों को यही सलाह देता हूँ कि वे सही जानकारी के लिए भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों पर ही भरोसा करें और कोई नया इलाज आजमाने से पहले किसी विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। मैं यह भी सलाह देता हूँ कि सोशल मीडिया पर मिली अधूरी या अनजान सलाह पर भरोसा न करें और केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही फैसले लें, न कि केवल ट्रेंड्स के आधार पर।
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