डॉ. मुज़म्मिल सुल्तान कोका, MBBS, FCCM, MRCEM (UK), मारेंगो एशिया अस्पताल, गुरुग्राम में क्रिटिकल केयर और आपातकालीन चिकित्सा विभाग में एक वरिष्ठ रजिस्ट्रार हैं। इनके पास पांच सालों का अनुभव है और इनकी विशेषज्ञता गंभीर देखभाल (critical care) और आपातकालीन चिकित्सा (emergency medicine) में है। THIP Media के साथ बातचीत में डॉ. मुज़म्मिल सुल्तान कोका ने बताया कि चिकित्सीय गलत सूचना के घातक परिणाम हो सकते हैं।
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?
अधिकांश मरीज संपूर्ण जानकारी न देने की गलती करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनका उपचार करना मुश्किल हो जाता है।
स्वास्थ्य साक्षरता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है?
दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य देखभाल न होना एक गंभीर समस्या है। मेरा तात्पर्य है कि केवल सरकारी नीतियां ही खराब स्वास्थ्य देखभाल का कारण नहीं हैं बल्कि इसमें स्वास्थ्य बीमा संबंधी जानकारी न होना भी शामिल है। अत: हमें उन सभी लोगों के लिए एक स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता है जो देश के किसी भी अस्पताल में अपना इलाज कराना चाहते हैं-कॉर्पोरेट या सरकारी। मैंने ऐसे कई रोगी देखे हैं जो गंभीर स्थिति में हैं लेकिन स्वास्थ्य देखभाल का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं। अत: लोगों को स्वास्थ्य बीमा की जानकारी देना महत्वपूर्ण है, जिसमें स्वास्थ्य साक्षरता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली के लिए कितना सहायक है?
मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली को बेहतर कर सकता है। ऐसे मरीज से हम स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी को समझने की उम्मीद कर सकते हैं।
चिकित्सीय गलत सूचना उपचार प्रक्रियाओं को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है?
चिकित्सीय गलत सूचना मरीज की सेहत को बिगाड़ सकती है क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरत सकता है। इससे अनावश्यक गलतियां या वित्तीय बोझ पैदा हो सकता है।
आपके मरीजों के सबसे आम मिथक क्या हैं?
क्रिटिकल केयर में एक विशेषज्ञ के रूप में, मैंने मरीजों में विभिन्न प्रकार के मिथक देखे हैं। उदाहरण के लिए, वे चिकित्सक के बजाय अन्य लोगों पर अधिक विश्वास करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उन्हें सही समय पर उपचार नहीं मिल पाता है।
ऑनलाइन स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं से कैसे बचा जा सकता है?
किसी भी व्यक्ति के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सही जानकारी और चिकित्सीय गलत सूचना के बीच अंतर करना मुश्किल है। इस स्थिति में एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता और सूचना केंद्र की स्थापना करना लाभकारी हो सकता है, जिसका मुख्य कार्य शैक्षिक सामग्री का विकास करना हो।
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