डॉ. हेमंत मदान, जो गुरुग्राम के नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल और दिल्ली के धरमशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट एवं डायरेक्टर (कार्डियोलॉजी) हैं, पिछले 20 से अधिक वर्षों से हृदय रोगों के इलाज के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
THIP Media के साथ इस खास बातचीत में डॉ. हेमन्त मदान ने अपने डॉक्टर बनने के सफर, उन अनुभवों के बारे में बात की जिन्होंने उनकी सोच और इलाज के तरीके को आकार दिया, और बताया कि बदलते समय में भी मरीजों की भलाई को सबसे पहले रखना ही उनके काम का सबसे बड़ा उद्देश्य है।
डॉक्टर बनने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
जब मैं 17 साल का था, तब न इंटरनेट था, न स्मार्टफोन और न ही सोशल मीडिया। उस समय माता-पिता की उम्मीदें और परिवार के लोग ही सबसे बड़ी प्रेरणा होते थे। मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूँ, और मेरे दोनों भाई-बहन भी डॉक्टर हैं। इसलिए मुझे लगता है कि डॉक्टर बनना शायद मेरी किस्मत में पहले से ही लिखा था।
मेडिकल कॉलेज से लेकर आज तक के अपने सफर को आप कैसे देखते हैं?
यह सफर शानदार रहा, लेकिन यह बात मुझे पीछे मुड़कर देखने पर समझ आती है। हर सफर की तरह, जब आप उस दौर से गुजर रहे होते हैं, तब उसकी अहमियत पूरी तरह महसूस नहीं होती। जैसा कि स्टीव जॉब्स ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अपने प्रसिद्ध भाषण में कहा था, “ज़िंदगी के बिंदु (dots) पीछे मुड़कर देखने पर ही जुड़ते हुए दिखाई देते हैं।” बिल्कुल ऐसा ही मेरे सफर के साथ भी रहा।
आपके जीवन में सबसे बड़े प्रेरणास्रोत या मार्गदर्शक कौन रहे हैं?
मेरे जीवन में कई लोगों का गहरा प्रभाव रहा है। एमडी के दौरान डॉ. रजत कुमार ने मेरी वैज्ञानिक सोच और निष्पक्ष निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में मेरे विभागाध्यक्ष डॉ. जे. एम. थाराकन ने मुझे ईमानदारी और नैतिकता के साथ चिकित्सा करने की सीख दी। डॉ. बी. सुभाष चंद्रा ने मेरी तकनीकी विशेषज्ञता को बेहतर बनाने में अहम योगदान दिया।
अपने मेडिकल करियर का सबसे यादगार और संतोषजनक पल कौन-सा रहा?
आपातकालीन स्थिति में किसी मरीज की जान बचाना हमेशा सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। विशेषकर बच्चों से जुड़ी हृदय संबंधी प्रक्रियाओं में सफलता मिलना बेहद संतोष देता है।
एक डॉक्टर के रूप में आपके काम को कौन-से मूल सिद्धांत दिशा देते हैं?
ईमानदारी, मरीज से स्पष्ट संवाद और हर मरीज के लिए सबसे बेहतर इलाज चुनना—यही मेरे काम के मूल सिद्धांत हैं।
समय के साथ आपकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में क्या बदलाव आए हैं और आपने खुद को कैसे ढाला है?
समय के साथ तकनीक काफी आगे बढ़ी है, इलाज की प्रक्रियाएं बेहतर हुई हैं और मरीज पहले से अधिक जागरूक व अपनी सेहत को लेकर सजग हो गए हैं। इसके अलावा, नई पीढ़ी के डॉक्टर भी बेहद कुशल हैं और हर दिन आपको बेहतर बनने की प्रेरणा देते हैं।
अपने पेशे से जुड़ी भावनात्मक चुनौतियों का सामना आप कैसे करते हैं?
समय के साथ डॉक्टर यह सीख जाता है कि मरीज के प्रति संवेदनशील रहना और अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को अलग रखना दोनों जरूरी हैं। लेकिन मरीज की भलाई की चिंता कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा हो जाए, तो डॉक्टर होने का असली अर्थ ही खत्म हो जाता है।
क्विक शॉट्स
अगर आप डॉक्टर नहीं होते, तो क्या होते?
शायद एक किसान, क्योंकि मुझे खुले वातावरण में रहना बहुत पसंद है।
मेडिसिन के अलावा आपको क्या करना पसंद है?
किताबें पढ़ना, संगीत सुनना और बागवानी करना।
आपकी पसंदीदा एक्सरसाइज कौन-सी है?
चलना और साइकिल चलाना।
सुबह या शाम, वर्कआउट के लिए कौन-सा समय पसंद है?
बिल्कुल शाम का समय।
आपका पसंदीदा हेल्दी ड्रिंक क्या है?
ग्रीन टी।
ऐसी कौन-सी किताब या फिल्म है जिसने आपको सबसे अधिक प्रेरित किया?
द फाउंटेनहेड (लेखिका: आयन रैंड)।
एक ऐसा गैजेट जिसके बिना आपका काम नहीं चल सकता?
किंडल।
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