डॉ. सुदीप हलधर एक कैंसर सर्जन (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 8 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने कैंसर सर्जरी में डिग्रियाँ प्राप्त की हैं, साथ ही ऑस्ट्रेलिया के डीकिन यूनिवर्सिटी से डेटा साइंस में मास्टर डिग्री भी ली है। वर्तमान में वे वडोदरा, गुजरात स्थित धीरज अस्पताल, सुमनदीप विद्यापीठ में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
वे कई प्रकार के कैंसर का इलाज करते हैं, जैसे: स्तन कैंसर, पेट और आंतों के कैंसर (जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर), सिर और गले के कैंसर, महिलाओं संबंधी कैंसर, मूत्र प्रणाली संबंधी कैंसर, त्वचा के कैंसर, सारकोमा।
THIP मीडिया के साथ बातचीत में डॉ. सुदीप हलधर ने चिकित्सा गलत सूचना के प्रभावों और स्वास्थ्य साक्षरता के महत्व का उल्लेख किया है।
मरीजों के द्वारा की जाने वाली आम गलतियां क्या हैं?
जब किसी व्यक्ति को कैंसर का पता चलता है, तब वे विभिन्न प्रकार की गलतियां करते हैं। शुरुआत में कुछ मरीज सदमे की स्थिति में होते हैं, जिससे वे अपनी बीमारी को समझना और उसके बारे में बात करने से कतराते हैं। वे यह भी ठीक से याद नहीं कर पाते हैं कि लक्षण कब और कैसे शुरू हुए थे, जिससे बीमारी की सही समय-रेखा बनाना कठिन हो जाता है। कई बार मरीज तंबाकू, शराब या सुपारी के सेवन की जानकारी छुपा लेते हैं, या परिवार में कैंसर के इतिहास के बारे में नहीं बताते, जबकि ये जानकारियाँ इलाज की योजना के लिए जरूरी होती हैं। कुछ लोग पुराने टेस्ट की रिपोर्ट नहीं लाते या पहले हुए कैंसर इलाज की जानकारी नहीं देते, और कई बार वे जो दवाएं, सप्लीमेंट्स या हर्बल दवाएं ले रहे होते हैं, उनका भी ज़िक्र नहीं करते — जिससे इलाज पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, बहुत से मरीज अपने सवाल पूछने या शंकाएं स्पष्ट करने से झिझकते हैं, जिससे वे अपनी बीमारी और इलाज को पूरी तरह से समझ नहीं पाते हैं।
स्वास्थ्य साक्षरता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है?
स्वास्थ्य साक्षरता का अर्थ है अपनी सेहत और देखभाल के महत्व को समझना ताकि आप अपनी उपचार प्रणाली में सक्रिय रूप से भाग ले सकें। जब मरीज जानते हैं कि क्या हो रहा है, तब वे अपने डॉक्टर से खुलकर बात कर सकते हैं और अपनी चिंताएं साझा कर सकते हैं। इससे डर कम होता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। अपनी बीमारी के बारे में जानना उसे स्वीकार करने में मदद करता है और इलाज शुरू करने में देरी नहीं होती। जब आप समझते हैं कि क्या होने वाला है, तब डॉक्टर की सलाह मानना और दवाइयाँ सही तरीके से लेना आसान हो जाता है। यह आपको जल्दी समस्या पहचानने और तुरंत मदद लेने में भी मदद करता है। कुल मिलाकर, स्वास्थ्य साक्षरता से आप जल्दी ठीक होते हैं और अपनी स्थिति पर नियंत्रण महसूस करते हैं।
मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली के लिए कितना सहायक है?
मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली के लिए काफी सहायक होता है। ऐसे में कई उदाहरण देखने को मिलते हैं।
एक बार एक युवती को शुरुआती स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर हुआ। उसे पहले से पता था कि कीमोथेरेपी से बाल झड़ सकते हैं, लेकिन यह भी समझती थी कि यह असर केवल कुछ समय के लिए होता है। इसलिए घबराने की बजाय उसने शांति से पूछा कि उसके बाल कब तक वापस आ सकते हैं। उसकी जानकारी ने उसे इलाज का सामना आत्मविश्वास के साथ करने में मदद की।
एक और मरीज ब्रेस्ट में गांठ की शिकायत लेकर आई थी। उसे पता था कि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन जांच करवाना जरूरी है। उसने जल्दी जांच करवाई और उपचार प्रणाली संबधी प्रश्न समझदारी से पूछे—जैसे ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी, सर्जिकल मार्जिन और दुष्प्रभाव। वह डरी नहीं थी, बल्कि तैयार थी।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पेट और आंतों संबंधी) कैंसर में भी मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना लाभकारी होता है। जब मरीजों को पहले से पता होता है कि सर्जरी के बाद कभी-कभी स्टोमा की जरूरत पड़ सकती है—और यह ज़रूरी नहीं कि हमेशा के लिए हो—तब वे मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर तैयार रहते हैं। कुछ मरीज तो स्थायी स्टोमा के साथ भी अच्छे से एडजस्ट कर लेते हैं। मेरा एक मरीज तो दूसरों को खुले दिल से कहता है, “इसने मेरी जान बचाई, इसमें शर्माने की क्या बात है?” उसकी सोच दूसरों का हौसला बढ़ाती है।
जब मरीजों को यह भी पता होता है कि कीमोथेरेपी से मुंह में छाले हो सकते हैं, तब वे घबराते नहीं। वे तुरंत हमसे संपर्क करते हैं, जिससे हम जल्दी इलाज कर पाते हैं और उनका इलाज बिना रुकावट चलता रहता है।
यह जानना भी बहुत जरूरी है कि स्टेज 4 कैंसर में भी ठीक होने की उम्मीद बाकी रहती है और हर सर्जरी से शरीर का कोई अंग खराब नहीं होता है। ऐसी बातें मरीजों की सोच को डर से उम्मीद की ओर ले जाती हैं।
चिकित्सा गलत सूचनाएं उपचार प्रक्रिया को कितना प्रभावित कर सकती हैं?
चिकित्सा गलत सूचनाएं उपचार प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इससे निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं:
गलत धारणाएं जो इलाज में देरी करती हैं
जैसे “starving cancer,” गाय का गोबर लगाना या गाय का पेशाब पीना — इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। फिर भी ये गलत बातें मरीजों को सही और जरूरी इलाज से दूर कर देती हैं।
देरी का बड़ा नुकसान
कुछ लोग प्राकृतिक या घरेलू इलाज की तरफ चले जाते हैं, लेकिन कैंसर बढ़ता रहता है। जब वे फिर सही इलाज के लिए आते हैं, तब सर्जरी या पूरी तरह ठीक करने वाला इलाज संभव नहीं रहता है।
भरोसे का टूटना
सोशल मीडिया पर फैलती गलत जानकारी की वजह से मरीजों को कीमोथेरेपी, रेडिएशन और सर्जरी जैसे सही उपचार प्रणाली पर शक होता है। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच भरोसा कम हो जाता है।
खतरनाक इलाज जो काम नहीं करते
कई वैकल्पिक इलाज न सिर्फ बेकार हैं, बल्कि नुकसानदायक भी हो सकते हैं। ये एनेस्थीसिया (सर्जरी के दौरान बेहोशी), इम्यूनिटी, रिकवरी में परेशानी कर सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।
भावनात्मक नुकसान
गलत जानकारी से मरीज डर और उलझन में रहते हैं, जिससे वे मानसिक सहारा लेने से भी कतराते हैं।
डॉक्टरों पर अतिरिक्त बोझ
हमें अक्सर ज्यादा समय गलतफहमियों को दूर करने में लगाना पड़ता है और मरीजों को सही बातें समझानी पड़ती हैं।
कैंसर की उपचार प्रणाली में प्रत्येक क्षण कीमती होता है। झूठी बातों की जगह सही और वैज्ञानिक जानकारी अपनाना ज़िंदगी बचा सकती है। हमें अंधविश्वास की बजाय विज्ञान, डर की बजाय सच और निराशा की बजाय उम्मीद चुननी चाहिए।
ऑनलाइन स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं से कैसे बचा जा सकता है?
मैं अपने मरीजों को ऑनलाइन स्वास्थ्य की गलत जानकारी के बारे में सबसे ज़रूरी सलाह देता हूँ: “सच जानना हो तो केवल किसी की बात सुनकर मत मानो, बल्कि उसकी असली स्रोत को समझो।” आज के समय में, 30 सेकंड के छोटे वीडियो और चौंकाने वाली हेडलाइन्स में जटिल मेडिकल जानकारी अक्सर बहुत आसान या गलत तरीके से पेश की जाती है। यह समझना जरूरी है कि अगर हम केवल A को B से और B को C से जोड़ देते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि A की वजह से C होता है। ऐसा सोचना गलतफहमी है, विज्ञान नहीं।
साथ ही, कोई वायरल कहानी या एक व्यक्ति की कहानी, चाहे वह कितनी भी जोरदार हो, साबित नहीं करती कि वह सच है। हमारा शरीर बहुत जटिल है और जो प्रयोगशाला या जानवरों पर काम करता है, वह इंसानों पर काम करेगा ऐसा जरूरी नहीं।
इसलिए, जब भी आप ऑनलाइन कोई चीज़ देखें जो आपको डराए या जल्दबाजी में कुछ करने को कहे, तो रुकें और सोचें। अपने डॉक्टर से पूछें—अपने पड़ोसी से नहीं और न ही सिर्फ इंटरनेट से। याद रखें कि मेडिकल मामले में सही और साफ जानकारी सबसे ज़रूरी होती है, न कि सिर्फ ज्यादा लाइक्स या क्लिक।
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