सारांश
एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि टीकाकरण करवाने से लड़कियां कभी मां नहीं बन पाएंगी। हालांकि इस वीडियो में किसी खास टीके का जिक्र नहीं है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा बिल्कुल गलत है।

दावा
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि टीकाकरण करवाने से लड़कियां कभी मां नहीं बन पाएंगी।

तथ्य जाँच
क्या टीकाकरण करवाने से लड़कियां कभी मां नहीं बन पाएंगी?
ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जो किसी खास टीके के बारे में बताता हो कि उसे लगवाने से लड़कियां कभी मां नहीं बन पाएंगी। हमने इस विषय पर गुगल समेत गुगल स्कॉलर पर काफी खोजने की कोशिश की लेकिन इस तरह का कोई खास वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला।
हालांकि कुछ वैज्ञानिक सबूत इस बात के मिले हैं, जो बताते हैं कि टीकाकरण और प्रजनन क्षमता के ईद-र्गिद काफी गलत धारणाएं लोगों में व्यापत हैं।
14 साल की उम्र में लड़कियों को कौन सा टीका दिया जाता है?
शोध बताते हैं कि 14 साल की उम्र के आसपास लड़कियों को कुछ जरूरी टीके दिए जाते हैं, जो उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस उम्र में सबसे प्रमुख HPV (Human Papillomavirus) वैक्सीन होती है, जो सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए दी जाती है और आमतौर पर 9 से 14 साल की उम्र के बीच लगाई जाती है।
इसके अलावा Td (Tetanus और Diphtheria) का बूस्टर भी इस उम्र के आसपास दिया जाता है, जो भारत के टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। अगर बचपन में कुछ टीके छूट गए हों, तो डॉक्टर की सलाह से MMR (Measles, Mumps, Rubella), हेपेटाइटिस B या चिकनपॉक्स के टीके भी इस उम्र में लगाए जा सकते हैं।

डॉ. प्रियंका मेहता, MD, MRCOG (UK), स्त्री रोग विशेषज्ञ, हार्मोन विशेषज्ञ, वन लाइफ वेलनेस कंसल्टेंसी FZ, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात की सह-संस्थापक हैं। वे बताती हैं, “यह समझना जरूरी है कि वैक्सीन शरीर को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए दी जाती हैं और इनका प्रजनन क्षमता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होता।”
वे आगे बताती हैं, “कई बार HPV वैक्सीन को लेकर अफवाहें फैलाई जाती हैं लेकिन ये पूरी तरह से सुरक्षित है। इसका प्रजनन क्षमता या मासिक धर्म चक्र पर कोई असर नहीं पड़ता है। इसके सबसे आम दुष्प्रभाव इंजेक्शन लगाने की जगह पर हल्का दर्द और सूजन है।”
क्या कोई टीकाकरण वाकई प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है?
नहीं। जब हमने इस विषय पर खोजना शुरू किया, तो हमें निम्नलिखित जानकारी मिली। जैसे-
- सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि COVID-19 टीकाकरण के दौरान भी कारण बांझपन (infertility) को लेकर भ्रामक दावे फैलाने की कोशिश की गई थी। इस तरह की गलत जानकारी और अफवाहें पहले भी टीकाकरण अभियानों जैसे- पोलियो और खसरा-रूबेला (measles-rubella) के दौरान समुदाय में फैलती देखी गई हैं, जिसका कोई आधार नहीं है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस बात कि पुष्टि की है कि HPV के टीकाकरण से लड़कियों में इनफर्टिलिटी नहीं होती है।

मैक्स हेल्थकेयर, साकेत, नई दिल्ली के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राकेश कुमार शर्मा बताते हैं, “सर्वाइकल कैंसर का संक्रमण आमतौर पर जीवन की शुरुआत में ही हो जाता है इसलिए मैं HPV वैक्सीन लगवाने की सलाह देता हूं। इसे 9 से 26 साल की उम्र के बीच या यौन रूप से सक्रिय होने से पहले लगवा लेना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “HPV का टीका वायरस के सबसे खतरनाक स्ट्रेन्स से होने वाले संक्रमण को रोकने में मदद करती है। यह सर्वाइकल कैंसर और इससे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के होने की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है।”
क्या पहले भी टीकाकरण को लेकर अफवाहें फैलाई गई हैं?
हां। विशेषकर COVID-19 के दौरान कई तरह के भ्रामक दावे फैलाने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा भी टीकाकरण को लेकर कई अफवाहें फैलाई जाती रही हैं। जैसे-
- COVID-19 के दौरान यह मिथक बहुत वायरल हुआ कि वैक्सीन में माइक्रोचिप डाली जाती है, जिससे लोगों को ट्रैक किया जा सकता है। यह दावा भी गलत निकला था।
- कई लोग मानते थे कि टीका लेने से कमजोर हो जाती है या व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है।
- कुछ अफवाहों में कहा गया कि टीका लगवाने से अचानक मौत हो सकती है, जबकि वैज्ञानिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला।
अतः उपरोक्त तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि यह दावा बिल्कुल गलत है। अगर आपको कोई भी दावा संदिग्ध लगता है, तो गलत सूचना को फैलने से रोकने के लिए इसकी रिपोर्ट करें। आप हमें [email protected] पर मेल कर सकते हैं अथवा हमारी WhatsApp हेल्पलाइन नंबर +91 85078 85079 पर भी संदेश/message भेज सकते हैं।
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