सारांश
एक सोशल मीडिया पोस्ट द्वारा दावा किया जा रहा है कि जैसे ही वैक्सीन से हार्ट अटैक आने की खबर देशभर में फेल गई, तुरंत ही प्रधानमंत्री मोदी का फोटो वैक्सीन प्रमाण पत्र से हटा दिया गया। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा बिल्कुल गलत है।

दावा
X पर जारी एक पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि जैसे ही वैक्सीन से हार्ट अटैक आने की खबर देशभर में फैल गई, तुरंत ही मोदी का फोटो हटा दिया गया।
तथ्य जाँच
वैक्सीन प्रमाण पत्र क्या है?
कोविड-19 के दौरान टीकाकरण की प्रमाणिकता और वैधता का प्रमाण देने के लिए ही वैक्सीन संबंधित प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। Co-win टीकाकरण प्रमाण पत्र में डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित सुरक्षित QR Code होता है। कोविड-19 के दौरान कई कार्यालयी या गैर-कार्यालयी कामों के लिए इस प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ी थी। साथ ही इस प्रमाण पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर भी थी।
Press Trust of India के अनुसार टीकाकरण यात्रा में कोविड टीकाकरण प्रमाण पत्र डाउनलोड करना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह व्यक्तियों को टीकाकरण का ठोस सबूत प्रदान करता है, जिसकी भविष्य में विभिन्न उद्देश्यों के लिए आवश्यकता हो सकती है। Co-win पोर्टल, उमंग ऐप या आरोग्य सेतु ऐप के माध्यम से आसानी से अपना टीकाकरण प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं, जिससे टीकाकरण प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित होता है और आवश्यक सेवाओं तक निर्बाध पहुंच की सुविधा मिलती है।
क्या वैक्सीन की ख़बरों के कारण वैक्सीन प्रमाण पत्र में बदलाव किये गए?
नहीं। हाल ही में एस्ट्राजेनेका के खुलासे के बाद कोविडशील्ड को लेकर कई खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद कई प्रकार के अनर्गल दावों का सिलसिला शुरु हो गया है क्योंकि लोगों में भय की स्थिति है। हालांकि इससे डरने की आवश्यकता नहीं है।
वैक्सीन प्रमाण पत्र से प्रधानमंत्री की तस्वीर का हटना भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी आदर्श आचार संहिता के कारण हुआ है, जो बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है। चुनाव आयोग जैसे ही विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करता है, वैसे ही मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाती है, जो चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहती है।
भारतीय चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस से शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से चुनावी राज्यों में कोरोनो वायरस वैक्सीन प्रमाण पत्रों से प्रधानमंत्री की तस्वीर हटाने को कहा है।
Press Trust Of India के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखे एक पत्र में चुनाव आयोग ने मॉडल कोड के कुछ प्रावधानों का जिक्र किया है, जो सरकारी खजाने (cost of the public exchequer) की कीमत पर विज्ञापन के इस्तेमाल पर रोक लगाते हैं। चुनाव आयोग ने किसी व्यक्ति या व्यक्तित्व का उल्लेख नहीं किया है, बल्कि स्वास्थ्य मंत्रालय से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का पालन करने के लिए कहा है।
रिपोर्ट् में सुझाव दिया गया है कि चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद, स्वास्थ्य मंत्रालय को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के चुनावी राज्यों में टीकाकरण प्रमाणपत्रों से पीएम मोदी की तस्वीरें हटानी पड़ सकती हैं। अतः वैक्सीन प्रमाण पत्र से प्रधानमंत्री की तस्वीर हटना चुनाव से प्रेरित नहीं है बल्कि ये चुनाव आयोग के आर्दश आचार संहिता के कारण हुआ है इसलिए दावाकर्ता द्वारा किया गया दावा बिल्कुल गलत है।
लोकसभा चुनावों को देखते हुए इस तरह की गलत व भ्रामक सूचनाओं की जैसे बाढ़ आ गयी है। ऐसा कहीं न कहीं मतदाता के निर्णय को प्रभावित करने की दृष्टि से किया जा रहा है। अतः आवश्यक है कि ऐसी मनगढंत ख़बरों से बचा जाये।
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