सारांश
सोशल मीडिआ पर जारी एक पोस्ट के अनुसार लोकसभा चुनाव २०२४ के दौरान मतदान अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा ज्यादातर गलत है।

दावा
X पर जारी एक पोस्ट के जरिए एक युजर द्वारा दावा किया गया है- “यह वास्तव में शर्मनाक है कि @ECISVEEP कई मतदान अधिकारियों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में विफल रहा है। उनमें से कई 50+ गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जिन्होंने 2024 के चुनाव को सफल बनाने के लिए धीमी पंखे के नीचे चिलचिलाती गर्मी में दिन-रात मेहनत की है।”
तथ्य जाँच
लोकसभा चुनाव 2024 कितने चरणों में हो रहे हैं?
17वीं लोकसभा का कार्यकाल 16 जून, 2024 को पूरा हो रहा है। केंद्रीय चुनाव आयोग के एलान के साथ ही 18वीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इस साल चुनाव सात चरणों में होंगे और सभी सीटों के लिए मतों की गिनती 4 जून को होगी।
- पहला चरणः 19 अप्रैल 2024. इसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, अंडमान निकोबार, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप, पुद्दुचेरी की कुल 102 सीटों पर वोट डाले गए।
- दूसरा चरणः 26 अप्रैल को असम, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर की कुल 89 सीटों पर मतदान हुआ।
- तीसरा चरणः 07 मई को असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दादर नागर हवेली और दमन दीव की कुल 94 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
- चौथा चरणः 13 मई को आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर की कुल 96 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
- पांचवा चरणः 20 मई को छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रेदश, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, लद्दाख की 49 सीटों पर मतदान होगा।
- छठा चरणः 25 मई को बिहार, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली की कुल 57 सीटों पर मतदान होगा।
- सांतवा चरणः 01 जून को बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़ की कुल 57 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
लोकसभा चुनाव कराने की जिम्मेदारी किसकी होती है?
भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है, जो भारत में संघ एवं राज्य निर्वाचन प्रक्रियाओं का संचालन करने के लिए उत्तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्य सभा, राज्य विधान सभाओं, देश में राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है।
इसकी स्थापना 25 जनवरी, 1950 को संविधान के अनुसार की गई थी (जिसे राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है)। आयोग का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित है। भारतीय संविधान का भाग XV (अनुच्छेद 324-329) चुनाव आयोग के बारे में जानकारी देता है।
भारतीय निर्वाचन आयोग ने गर्मी को लेकर क्या गाइडलाइन जारी किए हैं?
निजी मौसम वेबसाइट स्काईमेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से वर्ष 2023 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष घोषित किया गया है, जनवरी 2024 ‘सबसे गर्म’ रहा है और वर्तमान समय की बात की जाए, तो तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज हो रही है।
ऐसे में भारतीय निर्वाचन आयोग के लिए चुनाव कराना थोड़ा कठिन प्रतीत हो रहा है लेकिन निर्वाचन आयोग ने इसके लिए भी विभिन्न पोलिंग बूथ, चुनावी प्रक्रियाओं के लिए एक विशेष गाइडलाइन निकाली है। इसमें निम्नलिखित विशेष बिंदू शामिल है –
- दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक धूप में निकलने से बचना
- नियमित अंतराल पर पानी का सेवन करना
- यात्रा के दौरान पानी की बोतल साथ लेकर चलना
- अत्यधिक प्रोटीन और बासा भोजन करने से परहेज करना, इत्यादि।
- मेडिकल किट: यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर पर्याप्त संख्या में मेडिकल किट/प्राथमिक चिकित्सा किट का होना आवश्यक है।
- गर्मी के दौरान प्रत्येक पोलिंग बूथ पर ORS मुहैया कराना ताकि अगर किसी मतदाता को हीट-स्ट्रोक की समस्या हो, तो दिया जा सके।
- ‘क्या करें और क्या न करें’ पर एक हैंड-बिल हीट स्ट्रोक के मामले में प्रत्येक पोलिंग बूथ पर आपूर्ति की जा सकती है।
- फर्नीचर की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मतदान केंद्र के अंदर फर्नीचर जैसे- टेबल, कुर्सियां और बेंच आदि की सुविधा हो ताकि मतदान अधिकारियों, पोलिंग पार्टियों और पोलिंग एजेंट्स को समस्या ना हो।
क्या भारतीय निर्वाचन आयोग लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं नहीं प्रदान कर रही?
ज्यादातर ऐसा नहीं है। यद्यपि निर्वाचन आयोग द्वारा अपने कर्मचारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान कराई जा रही हैं पर फिर भी देखा गया है कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों व दुर्गम पर्वतीय इलाकों में सुविधाओं की कमी देखी गयी है।
निर्वाचन आयोग ने समग्र सुविधाएं मुहैया कराई हैं, जो पोलिंग बूथ कर्मियों और मतदाताओं आदि को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इन जानकारियों से यही सामने आता है कि भारतीय निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं समेत पोलिंग बूथ पर भी समुचित सेवाओं का प्रबंधन किया है। आप इसे कुछ उदाहरण से भी समझ सकते हैं। जैसे- तेलंगाना में मौजूदा गर्मी की लहर की स्थिति के बारे में चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, चुनाव आयोग ने राज्य में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मतदान के घंटे बढ़ाने की घोषणा की है।
ECI, IMD- India Meteorological Department, NDMA-National Disaster Management Authority और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों की एक टास्क फोर्स गठित की है। यदि आवश्यक हो तो किसी भी संबंधित विकास और शमन उपायों के लिए प्रत्येक मतदान चरण से पांच दिन पहले गर्मी की लहर और आर्द्रता के प्रभाव की समीक्षा करेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया है और पहली बार चुनाव के शेष चरणों के लिए अनुकूलित हीटवेव पूर्वानुमान जारी करने का जिम्मा लिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों व दुर्गम इलाकों में सुविधाओं का हाल कैसा है?
चुनाव आयोग ने ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं प्रदान करने के लिए भी कमान संभाला है ताकि कोई भी मतदाता पीछे ना छुटे। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति में ताशीगंग में दुनिया का सबसे ऊंचा मतदान केंद्र है, जो समुद्र तल से 15,256 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह क्षेत्र ग्रामीण इलाके में आता है और दुर्गम है।
मेघालय के पश्चिमी जैंतिया हिल्स जिले के कामसिंग गांव में नदी के किनारे बने मतदान केंद्र पर मतदान कर्मियों को लाइफ जैकेट पहननी पड़ी और गोताखोरों के साथ जाना पड़ा था। सुपारी की खेती और सौर ऊर्जा पर जीवित रहने वाले इस गांव में मेघालय का सबसे दूर और गैर-मोटर योग्य मतदान केंद्र है। जोवाई जिला मुख्यालय से 69 किमी दूर और उप-जिला मुख्यालय (तहसीलदार कार्यालय) अमलारेम से 44 किमी दूर स्थित है। चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए एक किस्से में कहा गया है, ”गांव तक केवल छोटी देशी नावों द्वारा ही पहुंचा जा सकता है।” इसका अर्थ यही है कि भले ही चुनाव आयोग स्वास्थ्य सेवा समेत अन्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन यह उतना आसान भी नहीं है क्योंकि जहां नाव से जाना पड़ रहा है, वहां तकनीकी या बुनियादी सुविधाएं पहुंचने में वक्त लगना लाज़िमी है।
साथ ही भारत विविधता से भरा देश है। यहां कई जातियां, जन जातियां रहती हैं, जो सुदूर इलाकों में निवास करती हैं। ऐसे में सारी सुविधाएं उन तक पहुंच सके, यह थोड़ी जटिल प्रक्रिया है क्योंकि कई सालों से सरकार कई हिस्सों तक पहुंचना चाह रही है लेकिन रफ्तार काफी धीमी है। ऐसे में चुनाव आयोग का तुरंत उन सब हिस्सों तक पहुंचना अतिशयोक्ति लगता है।
अतः उपरोक्त तथ्यात्मक जानकारियों के अनुसार कहा जा सकता है कि ट्विवटर पर किया गया दावा ज्यादातर गलत है क्योंकि कई सुदूर हिस्से हैं, जहां सुविधाएं पहुंचाने की जद्दोजहद सालों से चल रही है। चुनाव आयोग काफी गंभीरता से मतदान को सुविधापूर्वक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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