सारांश
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि पत्थरचट्टा का पौधा 12-15 दिनों में किडनी की पथरी को गला सकता है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा बिल्कुल गलत है।

दावा
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि पत्थरचट्टा का पौधा को खिलाने से 12-15 दिनों में किडनी की पथरी को गलाया जा सकता है।

तथ्य जाँच
क्या पत्थरचट्टा 12-15 दिनों में किडनी की पथरी को गला सकता है?
नहीं। इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई भरोसेमंद वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि पत्थरचट्टा जड़ी बूटी खाने से किडनी की पथरी को 12-15 दिनों में घुला सकता है। साथ ही, कोई भी वैज्ञानिक सबूत इसकी पुष्टि नहीं करते हैं। किडनी की पथरी ठोस क्रिस्टल होती है, जो आपकी किडनी के अंदर बनती है। वे आसानी से या तेज़ी से नहीं घुलतीं, खासकर किसी एक हर्बल नुस्खे से तो बिल्कुल नहीं।
किडनी की पथरी का अपने-आप निकलना या टूटना कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे पथरी का आकार, उसका प्रकार, शरीर में पानी की मात्रा, पेशाब का फ्लो और पहले पथरी होने का इतिहास। आमतौर पर 5 mm से छोटी पथरी बिना किसी बड़ी दिक्कत के कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्तों में बाहर निकल सकती है, जबकि बड़ी पथरी को निकालने के लिए कई बार डॉक्टर की सलाह और इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को पत्थरचट्टा जड़ी बूटी खाने के बाद आराम महसूस होता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह असर निश्चित रूप से उसी जड़ी-बूटी की वजह से हुआ। दर्द कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे पथरी का खुद आगे बढ़ना या शरीर में प्राकृतिक बदलाव इसलिए केवल अनुभव के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता कि पत्थरचट्टा ने पथरी को तोड़ दिया या निकाल दिया।

डॉ. उबैद-उर-रहमान जनरल फिजिशियन होली मिशन क्लिनिक नई दिल्ली बताते हैं, “इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पत्थरचट्टा का पौधा किडनी की पथरी को 12-15 दिनों में घुला देता है या उससे कोई फायदा पहुंचाता है। हालांकि, इस पौधे में मौजूद कुछ तत्व किडनी के काम-काज में मदद कर सकते हैं लेकिन पथरी को तोड़ने या शरीर से बाहर निकालने के लिए आमतौर पर सिर्फ हर्बल इलाज काफी नहीं होता है।”

डॉ. गणेश श्रीनिवासा प्रसाद पी कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट नारायणा हेल्थ सिटी बेंगलुरु बताते हैं, “कोई भी घरेलू उपाय सभी तरह की किडनी की पथरी को रोकने या ठीक करने का वादा नहीं कर सकता। जोखिम कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खूब पानी पिएं, नमक कम खाएं, वज़न सही रखें, कैल्शियम से भरपूर चीज़ें खाएं और ज़्यादा ऑक्सालेट वाली चीज़ों से बचें। जिन लोगों को यूरिक एसिड की पथरी होने का खतरा है, उन्हें रेड मीट, चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शराब का सेवन कम करना चाहिए और धूम्रपान छोड़ देना चाहिए।”

आयुषी अग्रवाल, सर्टिफाइड डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर बताती हैं, “आयुर्वेद में पत्थरचट्टा (Bryophyllum pinnatum) को किडनी की पथरी में राहत देने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है क्योंकि इसमें मूत्रवर्धक (diuretic) और सूजन कम करने वाले (anti-inflammatory) गुण पाए जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों के अनुभव इसके संभावित फायदों की ओर संकेत करते हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जो यह साबित करे कि पत्थरचट्टा 12-15 दिनों में पथरी को पूरी तरह घुला सकता है। इसका असर पथरी के आकार, प्रकार और व्यक्ति की स्थिति जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसका इस्तेमाल करने से सही इलाज में देरी हो सकती है, जिससे पेशाब में रुकावट, संक्रमण या किडनी को नुकसान जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।”
पथरी के लिए पत्थरचट्टा पौधे के बारे में विज्ञान असल में क्या कहता है?
कुछ लैब और जानवरों पर किए गए शोध में पत्थरचट्टा के कुछ संभावित फायदे सामने आए हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई पक्का वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जो यह साबित करे कि यह इंसानों में किडनी की पथरी को निश्चित रूप से तोड़ या घोल सकता है।
शोध में पत्थरचट्टा के मूत्रवर्धक (diuretic), सूजन कम करने वाले (anti-inflammatory) और एंटी-यूरोलिथियाटिक (पथरी बनने से रोकने वाले) प्रभावों का अध्ययन किया गया है। कुछ प्रयोगशाला और चूहों पर किए गए अध्ययनों में यह देखा गया कि यह कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जो किडनी की पथरी का सबसे आम प्रकार है। हालांकि, इन नतीजों को इंसानों में प्रभावी इलाज मानने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।
उदाहरण के लिए, जर्नल ऑफ एथनोफार्माकोलॉजी (Journal of Ethnopharmacology) में छपी एक लैब स्टडी में पाया गया कि इस पौधे का अर्क चूहों में किडनी की पथरी को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है। यह उम्मीद जगाने वाली बात है लेकिन ये शोध टेस्ट ट्यूब या जानवरों पर की गई थीं, असली इंसानों पर नहीं। और इनमें से किसी में भी यह नहीं कहा गया है कि यह सिर्फ़ दो दिनों में असर करता है।
डॉक्टर किसी इलाज की सलाह देने से पहले इंसानों पर किए गए ट्रायल्स और मजबूत वैज्ञानिक सबूतों को महत्व देते हैं इसलिए फिलहाल पत्थरचट्टा को एक पारंपरिक घरेलू उपाय के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे किडनी की पथरी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता। पथरी का आकार, जगह और लक्षणों के आधार पर सही इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।
कुछ लोग ऐसा क्यों मानते हैं कि पत्थरचट्टा किडनी की पथरी के लिए किसी जादू की तरह काम करता है?
इसका इस्तेमाल सालों से पारंपरिक इलाज में किया जा रहा है और इसके बारे में बातें तेज़ी से फैलती हैं।
भारत के कई घरों में पत्थरचट्टा को किडनी की पथरी के घरेलू इलाज के तौर पर देखा जाता है या इसे “स्टोन ब्रेकर” या “पाषाणभेद” कहा जाता है। संस्कृत में इस नाम का मतलब पत्थर तोड़ने वाला है। यह नाम ही लोगों में बहुत उम्मीदें जगा देता है। दादा-दादी और स्थानीय जड़ी-बूटी जानने वाले लोग पीढ़ियों से इसका इस्तेमाल करते आ रहे हैं, खासकर पेशाब से जुड़ी तकलीफ़ों या छोटी पथरी के इलाज के लिए।
आज इंटरनेट ने इस सोच को बहुत तेज़ी से फैला दिया है। छोटे वीडियो, व्हाट्सएप्प पर आने वाले मैसेज और ब्लॉग पोस्ट में अक्सर लोगों को पत्थरचट्टा की पत्तियां उबालते, उसका रस पीते और तुरंत आराम मिलने का दावा करते हुए दिखाया जाता है। लोगों के ये निजी अनुभव भले ही सच्चे लगे लेकिन वैज्ञानिक शोध से इनकी पुष्टि नहीं हुई है और ना ही उन्हें कोई समर्थन मिला है। ये सिर्फ सुनी-सुनाई बातें हैं, जिसमें कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है।
पत्थरचट्टा कितना सुरक्षित है? इसे आज़माने से पहले आपको क्या जानना चाहिए?
यह पूरी तरह से जोखिम-मुक्त नहीं है इसलिए लोगों को ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि बहुत से लोग बिना किसी परेशानी के पत्थरचट्टा का जूस पीते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह सभी के लिए सुरक्षित है। यहां कुछ बातें हैं, जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए:
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इससे बचना चाहिए। इन समूहों के लिए सुरक्षा से जुड़ा कोई शोध उपलब्ध नहीं है।
- मधुमेह से ग्रसित लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। पत्थरचट्टा रक्त शर्करा स्तर को कम कर सकता है, खासकर तब जब इसे मधुमेह की दवाओं के साथ लिया जाए।
- कुछ लोगों में इससे पेट खराब होना, जी मिचलाना या संक्रमण जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।
- लंबे समय तक या बहुत ज़्यादा इस्तेमाल के बारे में अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है और इससे अज्ञात जोखिम हो सकते हैं।
अगर आप पहले से ही किडनी से संबंधित, रक्तचाप या मधुमेह के लिए दवा ले रहे हैं, तो पत्थरचट्टा जैसी जड़ी-बूटियों के साथ इसे लेने से दुष्परिणाम हो सकते हैं। इसे इस्तेमाल करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें, खासकर अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर लक्षण बने रहते हैं या और बिगड़ जाते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। सिर्फ इसलिए यह ना मान लें कि किडनी की पथरी का यह घरेलू इलाज काम कर रहा है क्योंकि आपने इसे शुरू कर दिया है। इन चेतावनी वाले संकेतों पर ध्यान दें, जिनके लिए आपको प्रोफेशनल इलाज की ज़रूरत हो सकती है। जैसे-
- दर्द का बढ़ना या कम ना होना
- बुखार, कंपकंपी या उल्टी
- पेशाब में खून आना
- पेशाब करने में दिक्कत
- दर्द का जांघ के जोड़ (groin) या पीठ के निचले हिस्से तक फैलना
ये संकेत हो सकते हैं कि पथरी बहुत बड़ा है या फंसा हुआ है, या फिर कोई संक्रमण हो गया है। सिर्फ जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहकर ज़्यादा इंतज़ार करने से किडनी को नुकसान हो सकता है या आपको अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।
डॉक्टर दर्द कम करने वाली दवाएं (painkillers), हाइड्रेशन थेरेपी या ऐसी दवाएं दे सकते हैं, जिनसे पथरी आसानी से निकल जाए। ज़्यादा गंभीर मामलों में शॉक वेव थेरेपी या सर्जरी जैसे इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है और इनमें से किसी भी इलाज की जगह सिर्फ घरेलू या हर्बल नुस्खे नहीं ले सकते।
पथरी के लिए पत्थरचट्टा का पौधा फायदेमंद हो सकता है। यह कुछ राहत दे सकता है या किडनी के काम-काज में मदद कर सकता है लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह सिर्फ़ 12-15 दिनों में किडनी की पथरी को गला सकता है। किडनी की पथरी के लिए सिर्फ घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने से सही इलाज में देरी हो सकती है और यह जोखिम भरा हो सकता है। अगर आपको किडनी की पथरी की समस्या है, तो अच्छी आदतों के साथ-साथ डॉक्टर की सलाह भी लें।
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