सारांश
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि माजु फल, जैतुन का छिलका और फिटकिरी से किसी भी तरह की गांठ हमेशा के लिए ठीक हो सकती है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा बिल्कुल गलत है।

दावा
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि माजु फल, जैतुन का छिलका और फिटकिरी से किसी भी तरह की गांठ हमेशा के लिए ठीक हो सकती है।

तथ्य जाँच
क्या माजूफल, फिटकरी और जैतून के छिलके से किसी भी तरह की गांठ हमेशा के लिए ठीक हो जाती है?
ऐसा नहीं है। गांठ, जिसे लिपोमा भी कहा जाता है, ये त्वचा के नीचे बनने वाली चर्बी की गांठें होती हैं, जो नुकसानदायक नहीं होतीं हैं। आमतौर पर इनसे सेहत को कोई बड़ा खतरा नहीं होता है लेकिन अगर इनमें दर्द हो या ये बड़ी हो जाएं, तो इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है। ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जिससे पता चले कि माजूफल, फिटकरी और जैतून के छिलके का कोई मिश्रण किसी भी तरह के गांठों को घुला या खत्म कर सकता है।
गांठ के इलाज में आमतौर पर सर्जरी से इन्हें निकालना, लिपोसक्शन या स्टेरॉयड इंजेक्शन शामिल होते हैं। हालांकि कुछ प्राकृतिक चीज़ों में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वे गांठ पर असर करके उसे छोटा कर सकते हैं।

डॉ. एकांश शेखर डर्मेटोलॉजिस्ट, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, ट्राइकोलॉजिस्ट और एस्थेटिक मेडिसिन कंसल्टेंट लखनऊ बताते हैं, “माजूफल (gall nut), फिटकरी और जैतून के छिलके का घरेलू नुस्खा लिपोमा, सिस्ट या किसी भी तरह की गांठ को नहीं खत्म कर सकता है बल्कि लंबे समय तक इलाज ना कराने से समस्या बढ़ सकती है।
हालांकि माजूफल में सूजनरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और एस्ट्रिंजेंट गुण पाए जाते हैं। फिटकरी में एंटीसेप्टिक और खून का थक्का जमाने वाले गुण होते हैं, वहीं जैतून के छिलके के पाउडर में एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं लेकिन इन चीजों के मिश्रण से गांठ या सिस्ट को ठीक करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
सिस्ट या गांठे अलग-अलग तरह की हो सकती हैं, जिनके लिए कई बार डॉक्टर से जांच और सही इलाज की जरूरत पड़ती है। बिना प्रमाण वाले घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करने से सही बीमारी का पता चलने में देरी हो सकती है, त्वचा में जलन हो सकती है या चीजों के आपस में रिएक्शन हो सकते हैं इसलिए ऐसे नुस्खों को मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

डॉक्टर मनन अरोड़ा, BAMS, दिल्ली बताते हैं, “आयुर्वेद में माजूफल, फिटकरी और जैतून के छिलके के पाउडर के कुछ फायदे बताए गए हैं लेकिन ये गांठ या सिस्ट का इलाज नहीं हैं।
माजूफल त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं में मदद कर सकता है लेकिन यह गांठों को खत्म या घुला नहीं सकता। फिटकरी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, लेकिन यह लिपोमा का इलाज नहीं करती। वहीं, जैतून के छिलके के पाउडर में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं लेकिन इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि यह गांठों को छोटा कर सकता है।
आयुर्वेदिक इलाज का उद्देश्य शरीर में संतुलन बनाए रखना और कुछ लक्षणों में राहत देना हो सकता है लेकिन सिर्फ इन चीजों के इस्तेमाल से लिपोम या सिस्ट ठीक नहीं हो सकता। बेहतर होगा कि सही सलाह के लिए किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच करवाएं।”
क्या यह मिश्रण गांठ को पूरी तरह ठीक कर सकता है?
नहीं, यह मिश्रण गांठ को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकता। गांठ शरीर के किसी भी हिस्से में बनने वाली तरल पदार्थ से भरी थैलियां होती हैं। ये अलग-अलग प्रकार की हो सकती हैं और इनके इलाज का तरीका भी अलग हो सकता है। जैसे- जरूरत पड़ने पर ड्रेनेज या एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना।
माजूफल, फिटकरी और जैतून के छिलके से गांठ ठीक होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ये संभव है कि इन चीजों का इस्तेमाल पुराने समय से या लोगों के अनुभव के आधार पर किया जाता रहा हो लेकिन गांठ को छोटा करने या खत्म करने में इनके असरदार होने का कोई सबूत उपलब्ध नहीं है।
बिना प्रमाण वाले तरीकों से खुद इलाज करने पर समस्या बढ़ सकती है, खासकर अगर गांठ में संक्रमण हो या वह लगातार बढ़ रहा हो।
माजूफल, फिटकरी और जैतून के छिलके किस लिए जाने जाते हैं?
इन चीजों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से कई जगहों पर किया जाता रहा है लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार ये गांठ या सिस्ट का इलाज करने में असरदार साबित नहीं हुई हैं।
- माजूफल: इसमें एंटीऑक्सीडेंट और जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं और इसे पुराने समय से कसैले गुणों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है लेकिन यह गांठ या सिस्ट को खत्म कर सकता है, इसका कोई प्रमाण नहीं है।
- फिटकरी: इसमें कसैले और रोगाणुरोधी गुण होते हैं इसलिए इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल में किया जाता है, लेकिन यह शरीर के अंदर बनने वाली गांठों या सिस्ट का इलाज नहीं करती।
- जैतून के छिलका: इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण और सूजनरोधी गुण होते हैं और यह त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन यह गांठ या सिस्ट जैसी अंदरूनी गांठों को ठीक नहीं कर सकता।
इन सभी चीजों के कुछ पारंपरिक उपयोग जरूर हैं लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि ये गांठ या सिस्ट को खत्म कर सकते हैं।
क्या इस उपाय को आज़माने में कोई जोखिम है?
हाँ, इसमें जोखिम हो सकते हैं। बिना जांचे-परखे घरेलू नुस्खे इस्तेमाल करने से त्वचा में जलन, एलर्जी या पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। लाइपोमा और सिस्ट कई कारणों से हो सकते हैं और कभी-कभी इनका आकार बढ़ भी सकता है। ऐसे में सही जांच और इलाज में देरी करने से समस्या बढ़ सकती है।
उदाहरण के लिए, फिटकरी का ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। इससे जलन या अन्य समस्याएं हो सकती हैं, खासकर अगर यह आंखों के संपर्क में आए। वहीं, माजूफल (gall nuts) का गलत तरीके से या अधिक मात्रा में सेवन जहरीला साबित हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के इन चीजों को इलाज के रूप में इस्तेमाल करने से फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है।
गांठ के इलाज का सही तरीका क्या है?
गांठ के इलाज के लिए डॉक्टर छोटी और बिना दर्द वाली गांठों पर नज़र रखने की सलाह दे सकते हैं। बड़ी और परेशान करने वाली गांठों को सर्जरी से हटाने की ज़रूरत पड़ सकती है, जबकि छोटी गांठों के लिए स्टेरॉयड इंजेक्शन या लिपोसक्शन की मदद ली जा सकती है।
अतः यह दावा गलत है कि माजूफल, फिटकरी और जैतून के छिलके के मिश्रण से किसी भी तरह के गांठ ठीक हो सकते हैं। इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। गांठ ऐसी स्थिति है, जिसके लिए मेडिकल जांच और सही इलाज की ज़रूरत हो सकती है। बिना जांचे-परखे नुस्खों का इस्तेमाल बेअसर और खतरनाक भी हो सकता है।
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