सारांश
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि हरी शिमला मिर्च को आर्टिफिशियल रंग के स्प्रे के जरिए लाल किया जा रहा है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि दावा बिल्कुल गलत है।

दावा
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि हरी शिमला मिर्च को स्प्रे के जरिए लाल किया जा रहा है।

तथ्य जाँच
क्या शिमला मिर्च पर आर्टिफिशियल रंग का स्प्रे किया जा रहा है?
नहीं। जब हमने दावे की जाँच करने के लिए इस वीडियो को गुगल लेंस के जरिए चेक किया, तब हमें इस तरह की कोई खबर नहीं मिली, जो इस दावे की पुष्टि करती हो। साथ ही हमने वीडियो के Key-फ्रेम्स को गुगल लेंस और AI की जाँच करने वाले टूल्स जैसे- wasitai पर सर्च किया तब हमें पता चला कि ये वीडियो AI निर्मित है।

साथ ही वीडियो को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि लैब वर्कर का हाथ जो फलों और कन्वेयर बेल्ट को छू रहा है, वो कुछ फ्रेम में थोड़ा डिस्टॉर्शन हो रहा है।
सब्जियों पर आर्टिफिशियल रंग चढ़ाने का मतलब क्या होता है?
सब्जियों पर आर्टिफिशियल रंग चढ़ाने का मतलब उनकी असली रंगत को ज़्यादा चमकदार, ताज़ा और आकर्षक दिखाने के लिए उन पर केमिकल रंगों का स्प्रे करना है या उन्हें रंग वाले घोल में डूबाना है। ऐसा अक्सर पुरानी, मुरझाई या कम ताज़ा दिखने वाली सब्जियों को नए जैसा दिखाने के लिए किया जाता है ताकि वे आसानी से बिक जाएं।
ये रंग आमतौर पर खाने के लिए सुरक्षित नहीं होते और सिर्फ दिखावे के लिए लगाए जाते हैं। जब ऐसी सब्जियां खाई जाती हैं, तो यह रंग शरीर में जाकर नुकसान पहुंचा सकती हैं, खासकर अगर सब्जी को ठीक से धोया या छीला ना जाए इसलिए बहुत ज़्यादा चमकदार या अस्वाभाविक रंग वाली सब्जियों से सावधान रहना ज़रूरी है।
क्या सब्जियों पर लगा रंग सेहत के लिए हानिकारक होता है?
सब्जियों या फलों की रंगत आकर्षक करने और उनकी सेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए उनमें कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। कई केमिकल हैं, जिनका इस्तेमाल मिलावट के तौर पर किया जाता है। जैसे- फॉर्मेलिन, कैल्शियम कार्बाइड, मेलेनिन, हिस्टामाइन इत्यादि, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

इस विषय पर गरिमा देव वर्मन, आहार विशेषज्ञ और प्रमाणित मधुमेह शिक्षक बताती हैं, “अगर सब्जियों पर कृत्रिम रंग लगाया गया है, तो वह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर जब ऐसे रंग खाने योग्य ना हों। ये रंग शरीर में जाकर संक्रमण, पेट में जलन, उल्टी या लंबे समय में लिवर और किडनी पर बुरा असर डाल सकते हैं इसलिए सब्जियों को अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है। साथ ही बहुत ज्यादा चमकदार दिखने वाली सब्जियों से सतर्क रहना ज़रूरी है क्योंकि कई बार बाहर से आकर्षक दिखने पर लोग इन्हें सुरक्षित मानकर खरीद लेते हैं।”
शिमला मिर्च की रंगत का क्या कारण है?
शोध बताते हैं कि हरी शिमला मिर्च कच्ची होती हैं और स्वाद में थोड़ी कड़वी होती हैं, जबकि रंगीन शिमला मिर्च पूरी तरह से पकी हुई और स्वाद में अच्छी होती हैं। जैसे-जैसे फल पकता है, कैरोटीनॉयड जमा होने की वजह से उसका रंग बदलता है और वह ज़्यादा मीठा और पौष्टिक हो जाता है।
रंगीन शिमला मिर्च बीटा-कैप्सैंथिन, कैप्सोरूबिन (ज़्यादातर लाल शिमला मिर्च में), क्रिप्टोज़ैंथिन, ज़ेक्सैंथिन (ज़्यादातर पीली शिमला मिर्च में), क्वेरसेटिन और ल्यूटिन (ज़्यादातर नारंगी शिमला मिर्च में) जैसे कैरोटीनॉयड का सबसे अच्छा स्त्रोत हैं।
बैंगनी रंग की शिमला मिर्च के पौधे बैंगनी होते हैं, जिनमें बैंगनी पत्तियां, फूल और फल होते हैं। बैंगनी फलों में एंथोसायनिन पिगमेंट होते हैं। रंगीन शिमला मिर्च हरी शिमला मिर्च से ज़्यादा महंगी होती हैं क्योंकि इन शिमला मिर्च की कटाई पूरी तरह पकने पर की जाती है। इन शिमला मिर्च के पौधे खेतों में ज़्यादा समय तक रहते हैं।
दावाकर्ता की प्रोफाइल से हमें क्या मिला?
दावाकर्ता की प्रोफाइल का नाम me_khushi_2026 है और इनके 73.9K फॉलोवर्स हैं, 1 फॉलोविंग है और 950 पोस्ट्स हैं। प्रोफाइल की जाँच में अनेक वीडियो और पोस्ट पाए गए, जो हमें AI निर्मित मिले।
कई बार दावाकर्ताओं द्वारा इस तरह के पोस्ट्स इसलिए किए जाते हैं ताकि उन्हे कम समय पर ज्यादा लाइक्स मिल सके। जैसा कि इस वीडियो में 25 लाइक्स हैं और इसे 25 अक्टूबर 2025 को साझा किया गया था।
उपभोक्ता रंग-मिलावटी सब्जी खाने के जोखिम को कैसे कम कर सकते हैं?
इस विषय पर आहार विशेषज्ञ गरिमा देववर्मन आगे बताती हैं कि उपभोक्ता कुछ आसान और व्यावहारिक कदम अपनाकर रंग लगी सब्जी या फल खाने से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
- बहुत ज़्यादा चमकदार या अस्वाभाविक रूप से तेज रंग वाली सब्जी से बचेंः अगर रंग जरूरत से ज़्यादा चमकीला, चिपचिपा या धब्बेदार लगे, तो उसमें कृत्रिम रंग हो सकता है।
- बहते पानी में अच्छी तरह धोएंः सब्जी को कम से कम 2–3 मिनट तक धोएं और हल्के हाथ से उसकी सतह को रगड़ें।
- नमक या सिरके वाले पानी में भिगोएंः 10–15 मिनट तक भिगोने से सतह पर लगे रंग ढीले पड़ सकते हैं।
- संदेह होने पर ऊपरी छिलका हटा देंः अगर धोते या काटते समय रंग निकलता दिखे, तो बाहरी परत छील दें।
- भरोसेमंद विक्रेताओं से ही खरीदेंः जाने-पहचाने दुकानदारों या ऑर्गेनिक स्टोर्स से खरीदारी करें।
- टिश्यू से रगड़कर जांच करेंः गीले टिश्यू से सब्जियों की सतह रगड़ें। अगर रंग टिश्यू पर आ जाए, तो उसमें मिलावट हो सकती है।
- मौसमी और स्थानीय सब्जियां चुनेंः इनमें लंबे समय तक स्टोरेज या दिखावे के लिए रसायन लगाने की संभावना कम होती है।
इन सरल तरीकों को अपनाकर उपभोक्ता रंग-मिलावटी सब्जी के सेवन से होने वाले जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अपने परिवार के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प चुन सकते हैं।
अतः कहा जा सकता है दावाकर्ता द्वारा किया गया दावा गलत है। साथ ही अगर आपको कोई भी दावा संदिग्ध लगता है, तो गलत सूचना को फैलने से रोकने के लिए इसकी रिपोर्ट करें। आप हमें [email protected] पर मेल कर सकते हैं अथवा हमारी WhatsApp हेल्पलाइन नंबर +91 85078 85079 पर भी संदेश/message भेज सकते हैं।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.
