ग्रामीण महिलाओं में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा

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माना जाता है कि अक्सर शहरों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि की दर बहुत कम होती है और जीवन भी तनावग्रस्त होता है लेकिन यह सोच एक सच्चाई की अनदेखा करती है कि गांवों में भी स्वास्थ्य समस्याओं की अधिकता है। अगर बात केवल महिलाओं के हृदय के स्वास्थ्य की जाए तो उन्हें भी विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा होता है। गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार के कम अवसर होते हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं को ज्यादा मुश्किलें होती हैं। भले ही वे मेहनत का काम करती हैं, फिर भी अक्सर उनकी बीमारियां लाइलाज रह जाती हैं, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

इस लेख में हमने ग्रामीण महिलाओं में बढ़ रही हृदय की समस्याओं के कारणों को समझने की कोशिश की है। इसके अलावा उनकी जीवनशैली, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, आर्थिक समस्याएं और हृदय रोगों को बढ़ाने वाले मनोवैज्ञानिक कारणों पर चर्चा की गई है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

ग्रामीण महिलाओं में हृदय रोगों की संभावना अधिक क्यों होती है?

हालांकि हृदय की बीमारियां दुनिया भर में महिलाओं की मौत का मुख्य कारण है, लेकिन यह समस्या ग्रामीण महिलाओं में भी देखने को मिलती है। एक अध्ययन से यह पता चला कि ग्रामीण महिलाओं को हृदय रोगों संबंधी लक्षणों को पहचानने में मुश्किल होती है। इसका मुख्य कारण इनकी संपूर्ण जानकारी न होना है। अधिकांश महिलाओं को ह्रदय संबंधी समस्याओं के विभिन्न लक्षणों अर्थात् नींद की समस्या (उदाहरण के लिए अनिद्रा), स्ट्रोक, गठिया, गर्दन में अकड़न, फ्लू, ऑस्टियोपोरोसिस या मांसपेशियों में खिंचाव इत्यादि का सामना करना पड़ता है, जिन्हें वे समझ नहीं पाती हैं। इस कारण वे सही समय पर इसका उपचार नहीं करा पाती हैं। इसके अलावा, इस अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिलाएं अपनी गोपनीयता बनाए रखने, एम्बुलेंस के देर से आने की चिंता और अपने परिवार के लोगों को परेशान न करने के कारण भी चिकित्सीय सहायता लेने से कतराती हैं।

Cardiologist

डॉ. अशोक कुमार, हृदय रोग विशेषज्ञ, HDNA AROGYAM अस्पताल बताते हैं, “प्रॉस्पेक्टिव अर्बन रूरल एपिडेमियोलॉजी (PURE) अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि कई उच्च, मध्यम और निम्न आय वाले देशों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में हृदय संबंधित बीमारियां (Cardio Vascular Diseases-CVD) से संबंधित जोखिमों की रोकथाम पर कम ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा महिलाओं में हृदय रोग विभिन्न कारण से हो सकते हैं। इनमें उम्र, पारिवारिक इतिहास, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर, धूम्रपान और कम शारीरिक सक्रियता शामिल हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को संसाधन के अभाव के कारण गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि वे हृदय के लक्षणों को पहचान नहीं पाती हैं जिसकी वजह से यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। अत: यह आवश्यक है कि लगातार छाती में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बेहोशी, कमजोरी महसूस होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए।”  

एक ओर, पुरुषों को आमतौर पर बाएं हाथ या छाती के एक तरफ दर्द और सुन्नता महसूस होती है, तो वहीं दूसरी ओर, महिलाओं में ये लक्षण दाहिनी ओर भी दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं को थकावट, कमजोरी, चक्कर आना या मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त महिलाओं को पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है, जो जबड़े तक फैल सकता है।

यही कारण है कि भारत जैसे विकासशील देशों में, ग्रामीण महिलाओं में देर से बीमारी का पता चलने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण उनकी मौत का खतरा अधिक हो सकता है। इसके बावजूद, ग्रामीण महिलाओं में हृदय की बीमारियों का पता लगाना आसान नहीं होता है। इसके विभिन्न कारण हैं, जैसे- जागरूकता की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं में लिंग संबधी भेदभाव और सांस्कृतिक मान्यताएं, जो महिलाओं को तब तक इलाज नहीं लेने देतीं जब तक आवश्यक न हो।

सही जीवनशैली का न होना 

एक आम धारणा है कि ग्रामीण महिलाओं को उनकी मेहनती जीवनशैली के कारण, हृदय की बीमारियों का कम खतरा होता है। इसके अलावा कई ग्रामीण महिलाएं खेती, पानी के लिए दूर जाने और लकड़ी लाने जैसे भारी काम करती हैं। हालंकि ये शारीरिक मेहनत हृदय के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं (विशेषकर ह्रदय रोग) भी हो सकती हैं। 

Dietician Priyamwada Dixit

डॉ. प्रियंवदा दीक्षित, चीफ डायटिशियन एवं डायबिटीज प्रशिक्षक (Food for Heal, Agra) बताती हैं कि “आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि ग्रामीण महिलाएं अपने खान-पान की देखभाल नहीं कर पाती हैं। यही कारण है कि खराब कोलेस्ट्रोल के कारण उन्हें हृदय संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।” इसके निम्नलिखित कारण हैं-

पोषण की कमी: कई ग्रामीण महिलाओं को सही पोषण वाला भोजन नहीं मिल पाता है। हालांकि उनके भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो सकती है लेकिन फल, सब्जियां और अच्छी वसा जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। यह खराब आहार मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है, जो हृदय रोगों की संभावना को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, ग्रामीण महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) और दूसरी पोषण संबंधी समस्याएं भी हृदय रोगों की संभावना को बढ़ा सकती हैं।

ज्यादा नमक खाना: कुछ गांवों में फ्रिज ना होने की वजह से मांस को नमक लगाकर या सब्जियों को अचार बनाकर रखने का चलन है। ज्यादा नमक खाने से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, जो हृदय रोग का एक मुख्य कारण है।

धूम्रपान और तम्बाकू का प्रयोग: गांवों में धूम्रपान और तंबाकू चबाने का चलन ज्यादा होता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण महिलाएं शहरी महिलाओं की तुलना में तंबाकू का सेवन अधिक करती हैं, जिससे उनमें हृदय रोगों के होने की संभावना अधिक होती है।

पर्यावरणीय प्रभाव: खराब मौसम, सही घर का ना होना और बिना आराम के लंबे समय तक शारीरिक गतिवधि करने से महिलाएं थका हुए महसूस कर सकती हैं। इसके अलावा खराब खान-पान और धूम्रपान जैसी आदतों के साथ-साथ तनाव से ग्रामीण महिलाओं में ये रोग हो सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: ग्रामीण महिलाओं में हृदय की बीमारियों के जोखिम का मुख्य कारण स्वास्थ्य सेवाओं का न होना है। इसके अलावा गांवों में अस्पताल और क्लीनिक अक्सर पैसों, साधनों और स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनकी वजह से ग्रामीण महिलाओं को समय पर उपचार, जांच और सही देखभाल नहीं मिल पाता है।

अत्याधिक दूरी तय करना: कई गांवों में महिलाओं को अस्पताल या क्लिनिक तक पहुंचने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। यह यात्रा समय लेने वाली, महंगी और शारीरिक रूप से थकाने वाली हो सकती है। स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने में इतनी मेहनत करना उन महिलाओं के लिए कठिन हो सकता है जो अपने परिवार की देखभाल करती हैं।

विशेष उपचार की कमी: अगर ग्रामीण महिलाएं अस्पताल तक पहुंच भी जाती हैं, तो वहां अक्सर विशिष्ट उपचार नहीं मिलता है। उसमें ह्रदय रोगों संबंधी उपचार शामिल हैं। हृदय के डॉक्टर और जांच के लिए आवश्यक मशीनें, जैसे ECG और इकोकार्डियोग्राम, गांव के अस्पतालों में आमतौर पर नहीं होते हैं। इससे कई बार हृदय की बीमारियों का पता नहीं चल पाता या फिर गलत उपचार हो जाता है।

आर्थिक समस्या: ग्रामीण महिलाओं को विशेषकर कम आमदनी वाले क्षेत्रों में उपचार कराने में पैसे की समस्या हो सकती है। अत: स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उनके लिए दवाइयों, डॉक्टर की फीस और पूरा उपचार कराना मुश्किल हो जाता है।

आर्थिक समस्याएं और हृदय की बीमारियों पर प्रभाव

आर्थिक समस्याएं ग्रामीण महिलाओं में हृदय की बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकती हैं। कई गांवों में महिलाएं घर के काम और खेती दोनों का काम करती हैं और अक्सर उन्हें पैसों की कमी हो सकती है। आर्थिक अस्थिरता, जैसे- खाना, पैसे और घर की जिम्मेदारी भी हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकती हैं।

वित्तीय स्वतंत्रता की कमी: कई गांवों में महिलाओं के पास पैसे का नियंत्रण नहीं होता है, जिससे उनके लिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना मुश्किल हो जाता है। आर्थिक आत्मनिर्भरता की कमी उन्हें समय पर उपचार करवाने और दवाइयां खरीदने में परेशानी हो सकती है।

काम का दबाव: खेती करने वाली ग्रामीण महिलाएं अक्सर कठिन हालात में लंबे समय तक काम करती हैं। उनके काम, खराब खान-पान और आर्थिक अमसर्थता की वजह से होने वाला तनाव ह्रदय पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

मनोसामाजिक तनाव (Psychosocial stress) का दबाव

मनोसामाजिक तनाव आमतौर पर ग्रामीण महिलाओं के हृदय के स्वास्थ्य में गहरा प्रभाव डाल सकता है लेकिन उसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इसके अलावा अवसाद, चिंता और लंबे समय तक तनाव हृदय की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जिन पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं-

सामाजिक अलगाव (social isolation): कई बार देखा गया है कि अकेलापन अवसाद और चिंता की संभावना को बढ़ा सकता है, जो ह्रदय रोगों के कारक हो सकते हैं।

तनाव: कई ग्रामीण महिलाओं को अपने परिवार की जिम्मेदारी और मानसिक तनाव के बोझ को उठाना पड़ता है। इनकी वजह से होने वाला भावनात्मक तनाव और शारीरिक रूप से मेहनत करना ह्रदय के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

इस समस्या के समाधान क्या हो सकते हैं?

ग्रामीण महिलाओं में हृदय की बीमारियों की बढ़ती समस्या पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना आवश्यक है। इसमें जानकारी, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और आर्थिक सशक्तिकरण शामिल हैं। इस स्थिति में निम्नलिखित कदम उठाना भी लाभकारी हो सकता है:

स्वास्थ्य सेवा की पहल: मोबाइल स्वास्थ्य क्लीनिक, टेलीमेडिसिन सेवाएं और जागरूकता कार्यक्रम गांवों में स्वास्थ्य सेवा की कमी को दूर करने में सहायक हो सकते हैं। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों को हृदय की बीमारियों के लक्षण पहचानने के लिए प्रशिक्षित करना और उनकी स्वास्थ्य जांच करना, ह्रदय रोगों के लक्षणों की पहचान करने में मदद कर सकता है।

जन जागरूकता अभियान: हृदय की बीमारियों के जोखिम, लक्षण और रोकथाम के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक करना आवश्यक है। ऐसे सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान जिनमें व्यक्ति की स्वयं देखभाल, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली इत्यादि पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। ये ग्रामीण महिलाओं के लिए लाभकारी हो सकते हैं।

आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रम: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने से हृदय की बीमारियों का कारण बनने वाले आर्थिक तनाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं अपने पैसे पर ज्यादा नियंत्रण रखती हैं, वे अपने स्वास्थ्य पर बेहतर तरीके से खर्चा कर सकती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता: गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की मदद देने से हृदय की बीमारियों का कारण बनने वाले मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा समुदायिक सलाह और देखभाल उन महिलाओं को भावनात्मक सहायता दे सकते हैं जो अकेलापन, अवसाद या चिंता से पीड़ित हैं।

Dr Binda Singh

डॉ. बिंदा सिंह, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट (एडवांस साइकोथेरेपी एंड काउंसलिंग सेण्टर, पटना, बिहार) बताती हैं, “महिलाओं के लिए तनाव कम करने के लिए उपयुक्त कदम उठाना आवश्यक है ताकि वे मानसिक तौर पर स्वस्थ रह सकें। कई बार अत्यधिक चिंता या सोचने से ना केवल मानसिक बल्कि शारीरिक समस्याओं की संभावना भी बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, अकेलापन, अवसाद हृदय समस्याओं को ट्रिगर कर सकते हैं। ऐसे में उपरोक्त सुझावों पर काम किया जा सकता है ताकि ग्रामीण महिलाएं भी स्वयं को स्वस्थ रख सकें।”

हृदय की बीमारियां सिर्फ शहरों की समस्या नहीं है बल्कि ये ग्रामीण महिलाओं के लिए भी एक गंभीर समस्या है। सीमित स्वास्थ्य सेवाओं, खराब खान-पान, आर्थिक समस्याएं और मानसिक तनाव इत्यादि का प्रभाव ग्रामीण महिलाओं में हृदय की समस्याओं का पता लगाने और उनका उपचार करने में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए एक व्यापक योजना की आवश्यकता है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, जागरूकता फैलाना, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और मानसिक स्वास्थ्य सहायता देना शामिल है। इस प्रकार ग्रामीण महिलाओं में हृदय रोगों की संभावना को कम करने और उन्हें सेहतमंद रखने में सहायता मिल सकती है।

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Saumya Jyotsna
An award-winning journalist, Saumya brings out stories about grassroot level developments in the public health sector.
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