प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारत में बढ़ते मोटापे मामलों को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि मोटापा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं उदाहरण के लिए, मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर का कारण बन सकता है। वे यह भी बताते हैं कि मोटापा लोगों और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर आर्थिक बोझ डालता है। उनका मुख्य संदेश है कि एक स्वस्थ जनसंख्या या लोग किसी भी सफल और शक्तिशाली देश के लिए आवश्यक है।
हैरान कर देने वाला सच
2019 से 2021 के बीच किए गए NFHS-5 सर्वे में भारत में मोटापे के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि इस सर्वे में “मोटापा” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है, लेकिन यह वयस्कों में मोटापे के फैलाव का अनुमान जरूर लगाता है।
सर्वेक्षण से पता चलता है किः
- मोटापे के बढ़ते मामलें: पिछले सर्वे (NFHS-4) की तुलना में 15 से 49 साल से अधिक वजन वाली महिलाओं की संख्या 20.6% से बढ़कर 24.0% हो गई है। इसी प्रकार, 15 से 54 साल से अधिक वजन वाले पुरुषों की संख्या भी 18.9% से बढ़कर 22.9% हो गई है।
- शहर में रहने वाले लोग अधिक प्रभावित होते हैं: सर्वे के अनुसार शहरों में रहने वाले लोगों का वजन गाँवों में रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक होता है। इसका मुख्य कारण शहरी जीवनशैली है, जिसमें शारीरिक गतिविधि कम होती है और पैकेज्ड (प्रोसेस्ड) खाने की चीज़ें आसानी से मिल जाती हैं।
- क्षेत्रीय अंतर देखने को मिलता है: सर्वे से यह भी पता चलता है कि अलग-अलग राज्यों में ज़्यादा वजन वाले लोगों की संख्या में काफी अंतर है। उदाहरण के लिए, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है। इसका अर्थ है कि हर क्षेत्र की आवश्यकता के अनुसार विशिष्ट कदम उठाने की आवश्यकता है।
एक बहु-आयामी रणनीतिः आहार, जीवन शैली और नीति के साथ मोटापे से लड़ना
भारत में मोटापे के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए एक ऐसी योजना की आवश्यकता है, जिसमें व्यक्तिगत आदतें और सरकारी कदम शामिल हो। यहां कुछ महत्वपूर्ण रणनीतियां दी गई हैं:
सेहतमंद भोजन करने की आदतें
- पोषण शिक्षाः सार्वजनिक अभियानों में एक संतुलित आहार के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और हल्का प्रोटीन शामिल होते हैं।
- प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खपत को कम करना: ताजे, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन और सेवन को बढ़ावा देना चाहिए, जबकि अस्वास्थ्यकर, तेल से भरपूर प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और प्रचार को विशेष रूप से बच्चों के बीच कम करना चाहिए।
- चीनी की खपत को सीमित करना: चीनी से भरपूर ड्रिंक्स और अन्य मीठी चीज़ों पर सख्त नियमों से लोगों को कम चीनी खाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना
- सक्रिय जीवन को प्रोत्साहित करेंः स्कूलों, कार्यस्थलों और समुदायों को ऐसा स्थान बनाना चाहिए, जहां शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, उदाहरण के लिए, पैदल चलने, साइकिल चलाने और खेल कूद के लिए सुरक्षित क्षेत्र।
- दैनिक जीवन में शारीरिक गतिविधि को शामिल करेंः साधारण कदम जैसे लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करना, कम दूरी के लिए पैदल चलना या साइकिल चलाना और काम के दौरान व्यायाम का ब्रेक लेना लाभकारी हो सकता है।
- खेल और मनोरंजक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंः खेल सुविधाओं में निवेश करना और लोगों को खेलों और मनोरंजन गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना व्यायाम और स्वस्थ आदतों को बढ़ावा दे सकता है।
नीतिगत कदम उठाना
- खाद्य लेबलिंग विनियम (Food Labeling Regulations): खाद्य लेबल समझने में आसान होना चाहिए ताकि लोग जो कुछ खाते हैं उन्हें उसकी संपूर्ण जानकारी मिल सके।
- स्कूलों और कार्यस्थलों में स्वस्थ भोजन के विकल्पः स्कूलों और कार्यस्थलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपने कैफेटेरिया और वेंडिंग मशीनों के माध्यम से स्वस्थ भोजन के विकल्प प्रदान करें।
- स्तनपान को बढ़ावा देंः स्तनपान को बढ़ावा देने से बच्चों के अधिक वजन बढ़ने की संभानवना को कम किया जा सकता है क्योंकि अधिक वजन मोटापे का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फॉर्मूला फीडिंग से बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। अत: स्तनपान एक बेहतर विकल्प है।
निष्कर्ष
भारत में मोटापे के बढ़ते मामले एक गंभीर चिंता है, जिसे कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है। इसमें स्वस्थ आहार की आदतों को बढ़ावा देना, व्यायाम करना और प्रभावी नीतियों को लागू करना शामिल है।
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