जब कोई कहता है कि उसे “बहुत तेज़ सिरदर्द” हो रहा है, तो ऐसा लगता है जैसे दर्द सीधे मस्तिष्क से हो रहा हो। लेकिन यह सुनकर हैरानी हो सकती है — मस्तिष्क वास्तव में दर्द महसूस ही नहीं कर सकता है! ऐसा इसलिए क्योंकि मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स (pain receptors) नहीं होते, जैसे त्वचा या मांसपेशियों में होते हैं। तो अगर मस्तिष्क खुद दर्द महसूस नहीं करता, तो सिरदर्द कैसे होता है? आइए समझते हैं कि वास्तव में दर्द कहाँ से आता है और शरीर में यह कैसे काम करता है।
अगर मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स नहीं होते हैं, तो दर्द क्यों होता है?

डॉ. जॉय मौनिका, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, रेनोवा हॉस्पिटल्स, लंगर हाउस, हैदराबाद, बताती हैं, “लोग दर्द क्यों महसूस करते हैं, इसका कारण शरीर की “दर्द चेतावनी प्रणाली” (pain alarm system) में छिपा है। दर्द तब शुरू होता है जब शरीर में मौजूद विशिष्ट सेंसर, जिन्हें दर्द रिसेप्टर्स या नॉसीसेप्टर्स (nociceptors) कहा जाता है, किसी चोट या ज़्यादा दबाव को महसूस करते हैं। ये सेंसर रीढ़ की हड्डी (spinal cord) को संकेत भेजते हैं और वहाँ से यह संदेश मस्तिष्क तक पहुँचता है। मस्तिष्क इन संकेतों को समझकर बताता है — “कहीं चोट लगी है!”
डॉ. मौनिका आगे बताती है “ लेकिन यहाँ दिलचस्प बात यह है — मस्तिष्क के भीतर कोई दर्द रिसेप्टर्स नहीं होते हैं। मस्तिष्क का एक हिस्सा, जिसे ग्रे और व्हाइट मैटर कहा जाता है, जो व्यक्ति की सोचने, महसूस करने और हिलने-डुलने में मदद करता है, उनमें नॉसीसेप्टर्स (nociceptors) अर्थात् दर्द महसूस करने वाले सेंसर नहीं होते हैं। इसलिए, भले ही मस्तिष्क का काम दर्द को समझना और उसका अर्थ निकालना है, लेकिन वह खुद दर्द महसूस नहीं कर सकता है।”
इसी वजह से डॉक्टर कुछ प्रकार की मस्तिष्क की सर्जरी मरीज को जगाए हुए स्थिति में कर सकते हैं — और फिर भी मरीज को दर्द महसूस नहीं होता! जब डॉक्टर खोपड़ी (skull) या सिर की त्वचा (scalp) को छूते हैं, तब मरीज को बस थोड़ा दबाव या कंपन महसूस हो सकता है, लेकिन दर्द नहीं। अन्य शब्दों में, मस्तिष्क शरीर का कंट्रोल सेंटर है — यह शरीर के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले दर्द के संदेशों को प्राप्त करता है और समझता है। लेकिन यह कंट्रोल सेंटर खुद पूरी तरह दर्द-रहित होता है।
अगर मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स नहीं हैं, तो सिरदर्द क्यों होता है?
यह एक मुख्य प्रश्न है। अगर मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स नहीं है, तो माइग्रेन या तनाव वाले सिरदर्द (tension headache) में सिर इतना क्यों दर्द होता है?
जवाब यह है: सिरदर्द मस्तिष्क से नहीं होता है, बल्कि मस्तिष्क के आसपास की ऊतकों (tissues) से होता है। इसमें शामिल हैं: मेंनिंजेस (Meninges) – मस्तिष्क को ढकने वाली सुरक्षा परतें, रक्त वाहिकाएँ (Blood vessels), सिर की त्वचा (Scalp) और गर्दन की मांसपेशियाँ (Neck muscles)। इन सभी जगहों में दर्द रिसेप्टर्स मौजूद होते हैं। जब ये ऊतक सूज जाते हैं, तनाव में आते हैं या जलन महसूस करते हैं, तब ये दर्द के संकेत मस्तिष्क तक भेजते हैं और सिरदर्द महसूस होता है।
उदाहरण के लिए:
- माइग्रेन: मस्तिष्क के आसपास की रक्त वाहिकाओं में बदलाव दर्द के संकेत भेजते हैं। माइग्रेन में देखने में झिलमिलाहट या कैलिडोस्कोप दृष्टि जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- तनाव वाला सिरदर्द: सिर या गर्दन की मांसपेशियों का तनाव दर्द के संकेत भेजता है।
- साइनस सिरदर्द: माथे और आंखों के आसपास की सूजन आसपास के ऊतकों में दर्द रिसेप्टर्स को सक्रिय करती है।
इसलिए, भले ही मस्तिष्क खुद दर्द-रहित है, लेकिन उसके आस-पास की ऊतक हमें सिरदर्द महसूस कराते हैं। इससे पता चलता है कि सिरदर्द होने की जैविक प्रक्रिया (headache pathophysiology,) कैसे काम करती है।
मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स न होने के लाभ क्या हैं?
यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स न होना वास्तव में लाभदायक है। इसके विभिन्न कारण हैं:
- लगातार दर्द से सुरक्षा: मस्तिष्क हमेशा सक्रिय रहता है, लगातार संदेश भेजता और प्राप्त करता है। अगर इसमें दर्द रिसेप्टर्स होते, तो सिर्फ सोचने या सामान्य रक्त प्रवाह जैसी गतिविधियाँ भी लगातार दर्द पैदा कर सकती थीं।
- सुरक्षित मस्तिष्क सर्जरी: डॉक्टर मरीज को जागते हुए रखते हुए मस्तिष्क पर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे वे मोटर फंक्शन, बोलने की क्षमता और अन्य कार्य प्रणाली को सुरक्षित तरीके से जांच सकते हैं।
- महत्वपूर्ण दर्द संकेतों पर ध्यान: दर्द चोट या समस्या की चेतावनी देने के लिए होता है। चूंकि मस्तिष्क खोपड़ी, सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड और मेंनिंजेस द्वारा अच्छी तरह से सुरक्षित है, इसलिए इसे खुद दर्द महसूस करने की आवश्यकता नहीं है।
भले ही मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स न हो लेकिन इसके आसपास की ऊतक जरूर कर सकती हैं। जब ये हिस्से सूज जाते हैं, संक्रमित हो जाते हैं या चोटिल हो जाते हैं, तब मस्तिष्क की परतों में मौजूद दर्द रिसेप्टर्स चेतावनी संदेश भेजते हैं। इस प्रकार, मस्तिष्क शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाले दर्द का अनुभव करने और उस पर प्रतिक्रिया देने में मदद करता है।
यह समझना कि मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स नहीं हैं, सिरदर्द को कम नहीं करता है। इससे सिर्फ पता चलता है कि दर्द असल में कहां से हो रहा है। मस्तिष्क में दर्द रिसेप्टर्स नहीं होता है, लेकिन दर्द को समझने और उस पर प्रतिक्रिया करने की इसकी क्षमता शरीर की सबसे अद्भुत चीज़ों में से एक है।
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