22 साल की उम्र में आरव मेहता को उम्मीद थी कि उन्हें प्लेसमेंट, डेडलाइन और शायद अपने पहले गंभीर रिश्ते की चिंता होगी। गंजापन उनकी चिंताओं में शामिल नहीं था। बेंगलुरु के इस इंजीनियरिंग छात्र ने कॉलेज के आखिरी साल में पहली बार देखा कि शॉवर की नाली में सामान्य से थोड़े ज्यादा बाल जमा हो रहे हैं। दोस्तों ने मजाक में कहा कि उन्हें अपने पिता से “उम्र के साथ पीछे हटने वाली हेयरलाइन” मिली है। उन्होंने भी इसे हंसी में टाल दिया। लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीरें खिंचवाना उन्हें असहज लगने लगा। तेज रोशनी में सिर के ऊपर का हिस्सा कुछ ज्यादा ही पतला दिखाई देने लगा। हर सुबह वे बेचैनी से अलग-अलग एंगल से आईने में बालों को देखते और सोचते कि कहीं रातभर में हेयरलाइन थोड़ी और पीछे तो नहीं चली गई।
वे बताते हैं, “मैंने स्विमिंग जाना बंद कर दिया क्योंकि गीले बालों में बालों का पतलापन साफ दिखाई देता था। लोग सोचते हैं कि बाल झड़ना सिर्फ सुंदरता संबंधी समस्या है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर आत्मविश्वास, सामाजिक जीवन और यहां तक कि खुद को देखने के नजरिए पर भी पड़ता है।” अब उनकी कहानी असामान्य नहीं रही है।
पूरे भारत के त्वचा रोग क्लीनिकों में कम उम्र के पुरुषों के बाल पतले होने की समस्या के लिए मदद लेने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। कुछ युवा तो 18 या 19 साल की उम्र में ही डॉक्टर से सलाह लेने पहुंच रहे हैं। लेकिन क्या वाकई गंजापन अब कम उम्र में शुरू हो रहा है? या फिर युवा पुरुष अपने झड़ते हर बाल पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगे हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, सच्चाई इन दोनों के बीच कहीं है।
बालों को लेकर बढ़ती चिंता
बाल हमेशा से लोगों की पहचान का एक अहम हिस्सा रहे हैं। घने बालों को जवानी, अच्छी सेहत और आत्मविश्वास से जोड़ा जाता है। आज सेल्फी, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के दौर में लोग अपनी शक्ल-सूरत को लगातार देखते रहते हैं। इसलिए बालों में होने वाला थोड़ा-सा बदलाव भी आसानी से नजरअंदाज नहीं होता है।

डॉ. पवन सिंह, डर्मेटोलॉजी कंसल्टेंट, Regency Health, कानपुर बताते हैं, “हमारे पास बाल पतले होने की समस्या लेकर आने वाले कम उम्र के पुरुषों की संख्या बढ़ी है। इनमें कई लोग 20 की उम्र की शुरुआत में हैं, जबकि कुछ किशोर उम्र के भी हैं। पुरुषों में गंजेपन का मुख्य कारण अभी भी आनुवंशिकता है, लेकिन इसके बारे में बढ़ी जागरूकता के कारण लोग पहले ही डॉक्टर से सलाह लेने लगे हैं। सोशल मीडिया, हाई-डेफिनिशन तस्वीरों और वीडियो कॉल ने लोगों को बालों की थोड़ी-सी कमी के प्रति भी ज्यादा सजग बना दिया है।”

देश के अन्य क्लीनिकों में भी ऐसा ही रुझान देखने को मिल रहा है। डॉ. गुरमन सिंह भसीन, डायरेक्टर और चीफ डर्मेटोलॉजिस्ट, Skinclarity Clinic, नागपुर के अनुसार, कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या लेकर आने वाले पुरुषों की संख्या वास्तव में बढ़ी है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यह समस्या अचानक ज्यादा तेजी से बढ़ने लगी है।
वह बताते हैं, “मेरे क्लीनिक में बाल झड़ने की समस्या के लिए मदद लेने वाले कम उम्र के पुरुष निश्चित रूप से बढ़े हैं। लेकिन इसकी वजह अचानक शरीर में आया कोई बदलाव नहीं, बल्कि लोगों का पहले ही डॉक्टर से सलाह लेना और इस समस्या के बारे में बढ़ी जागरूकता है। पुरुषों में होने वाला गंजापन कोई नई बीमारी नहीं है। अब हम इसे पहले ही पहचान पा रहे हैं, जो अच्छी चीज़ है, क्योंकि शुरुआती चरण में इलाज ज्यादा प्रभावी होता है।”
यह अंतर समझना जरूरी है।
आज के युवा स्मार्टफोन कैमरे, इंस्टाग्राम स्टोरीज और वीडियो मीटिंग के जरिए खुद को उस तरह देखते हैं, जैसा पिछली पीढ़ियां नहीं देखती थीं। पहले बालों का पतला होना शायद तब तक नजर नहीं आता था, जब तक कोई नाई इसकी ओर ध्यान न दिलाए। लेकिन अब हाई-डेफिनिशन स्क्रीन पर बालों में हुए छोटे बदलाव भी रोजाना साफ दिखाई देने लगे हैं।
मुख्य कारक आनुवंशिकता (जेनेटिक्स) है
हार्ड वॉटर से लेकर शैम्पू के ब्रांड तक, बाल झड़ने के लिए कई चीजों को जिम्मेदार बताया जाता है। लेकिन वैज्ञानिक शोध काफी हद तक एक ही बात कहता है—पुरुषों में गंजेपन का मुख्य कारण आनुवंशिकता (जेनेटिक्स) है।
इसे मेडिकल भाषा में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (Androgenetic Alopecia) कहा जाता है। यह दुनिया में बाल झड़ने का सबसे आम प्रकार है। 30 से 50 साल की उम्र के करीब 58% पुरुष इससे प्रभावित होते हैं। इसकी शुरुआत इससे काफी पहले, कभी-कभी यौवनावस्था के तुरंत बाद भी हो सकती है।

डॉ. नीलम जैन कोठारी, कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट, मसिना हॉस्पिटल, मुंबई बताती हैं, “कुछ लोगों में इसके लक्षण यौवनावस्था में ही दिखाई देने लगते हैं। पुरुषों में होने वाला गंजापन एलोपेसिया का एक प्रकार है। एलोपेसिया एक व्यापक मेडिकल शब्द है, जिसका अर्थ बाल झड़ना है। इसके कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।”
इस अंतर को समझना जरूरी है। तकिए पर बाल दिखने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति हमेशा के लिए गंजा हो रहा है।
एलोपेसिया में कई तरह की समस्याएं शामिल हो सकती हैं—जैसे एलोपेसिया एरीटा, जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है; सिर की त्वचा में फंगल इंफेक्शन; बार-बार बाल खींचने की आदत और तनाव के कारण होने वाला अस्थायी हेयर फॉल। लेकिन पैटर्न बाल्डनेस का कारण और प्रक्रिया अलग होती है।
आम धारणा के विपरीत, गंजापन शरीर में बहुत ज्यादा टेस्टोस्टेरोन होने के कारण नहीं होता है। असल में, बालों की जड़ों में मौजूद फॉलिकल्स की DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) नामक हार्मोन के प्रति आनुवंशिक संवेदनशीलता इसकी मुख्य वजह है। DHT शरीर में टेस्टोस्टेरोन से प्राकृतिक रूप से बनता है।

डॉ. अपराजिता लांबा, फाउंडर, डर्मेटोलॉजिस्ट और इक्साना वेलनेस बताती हैं, “एक बड़ी गलतफहमी यह है कि ज्यादा टेस्टोस्टेरोन गंजेपन का कारण बनता है। पुरुषों और महिलाओं में पैटर्न हेयर लॉस मुख्य रूप से जेनेटिक्स और बालों की जड़ों की DHT के प्रति संवेदनशीलता से जुड़ा है, न कि टेस्टोस्टेरोन के बहुत ज्यादा स्तर से। कई लोगों में हार्मोन का स्तर बिल्कुल सामान्य होता है, फिर भी उनकी बालों की जड़ें आनुवंशिक रूप से DHT के प्रति ज्यादा संवेदनशील होने के कारण एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया हो जाता है।”
समय के साथ DHT संवेदनशील बालों की जड़ों को धीरे-धीरे छोटा और कमजोर करता है। इस प्रक्रिया को मिनीट्यूराइजेशन कहा जाता है। हर बार उगने वाले बाल पहले से पतले, छोटे और कमजोर होते जाते हैं। आखिर में बालों की जड़ बहुत बारीक बाल बनाने लगती है या दिखाई देने वाले बाल बनाना बंद कर देती है।
अर्थात् जेनेटिक्स गंजेपन का खतरा तय कर सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि गंजापन ठीक किस उम्र में शुरू होगा।
क्या आधुनिक जीवनशैली गंजेपन को तेज कर सकती है?
यहां मामला थोड़ा अलग है। जेनेटिक्स यह तय करता है कि किसी व्यक्ति को बाल झड़ने की कितनी संभावना है, लेकिन जीवनशैली यह प्रभावित कर सकती है कि बाल कितनी तेजी से झड़ते हैं।
डॉ. पवन बताते हैं, “एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया का सबसे महत्वपूर्ण कारण जेनेटिक्स है। लेकिन जीवनशैली से बाल झड़ने की गंभीरता और उसकी गति प्रभावित हो सकती है।”
इनमें लंबे समय तक रहने वाला तनाव एक महत्वपूर्ण कारण है।
काम की डेडलाइन, प्रतियोगी परीक्षाएं, आर्थिक चिंता और बढ़ता काम का दबाव कई युवाओं को लंबे समय तक तनाव में रखता है।
डॉ. गुरमन बताते हैं कि तनाव खुद पुरुषों में पैटर्न गंजापन पैदा नहीं करता, लेकिन जिन लोगों में पहले से आनुवंशिक खतरा है, उनमें यह बाल झड़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।
वे बताते हैं, “जीवनशैली से जुड़े कारणों में लंबे समय का मानसिक तनाव, धूम्रपान और पोषक तत्वों की कमी के लिए सबसे मजबूत साक्ष्य मौजूद हैं। अच्छी जीवनशैली बालों को स्वस्थ रखने में मदद करती है, लेकिन आनुवंशिक रूप से होने वाले हेयर लॉस में यह मेडिकल इलाज की जगह नहीं ले सकती।”
तनाव शरीर में हार्मोन और सूजन से जुड़े बदलाव पैदा करता है। ज्यादा तनाव के कारण अधिक संख्या में बालों की जड़ें आराम के चरण में जा सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप कुछ हफ्तों या महीनों बाद ज्यादा बाल झड़ने लगते हैं।
अगर किसी व्यक्ति के बाल पहले से ही आनुवंशिक रूप से कमजोर हैं, तो तनाव के कारण बाल झड़ना जल्दी दिखाई दे सकता है।
जीवनशैली का जाल
आज की जीवनशैली बालों की सेहत के लिए कई चुनौतियां पैदा करती है। खाना छोड़ देना, कम प्रोटीन लेना, नींद पूरी न करना, धूम्रपान और वेपिंग तथा तेजी से वजन घटाने वाली क्रैश डाइट इसका हिस्सा हैं।
डॉ. पवन बताते हैं, “आयरन, विटामिन D, जिंक, विटामिन B12 और प्रोटीन की कमी से बाल ज्यादा झड़ सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली जेनेटिक बाल झड़ने को पूरी तरह रोक नहीं सकती, लेकिन यह बालों की सामान्य सेहत बनाए रखने में जरूर मदद करती है।”
प्रदूषण और खराब नींद पर अभी भी शोध चल रहा है। लेकिन कुछ साक्ष्यों से पता चलता है कि ये शरीर में इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर अप्रत्यक्ष रूप से बालों को प्रभावित कर सकते हैं।
सीधी चीज़ यह है कि शरीर के लिए बाल जरूरी अंगों की तुलना में कम प्राथमिकता रखते हैं।
जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता या लंबे समय तक तनाव रहता है, तब शरीर अपनी ऊर्जा जरूरी अंगों की ओर भेजता है। बालों की जड़ें बहुत सक्रिय होती हैं, लेकिन शरीर के लिए जरूरी नहीं होती हैं। इसलिए वे सबसे पहले प्रभावित होने वाले हिस्सों में शामिल हो सकती हैं।
जब तनाव सिर पर दिखाई देने लगे
27 साल के राहुल त्रेहान खुद को हमेशा स्वस्थ मानते थे। वे जब भी समय मिलता, एक्सरसाइज करते थे और उन्हें शायद ही कभी कोई बीमारी होती थी। हाल ही में उन्हें गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी मिली थी। लेकिन नई नौकरी में रोज 14 घंटे काम, अनियमित खाना, लगातार कॉफी पीना और सिर्फ पांच घंटे की नींद शामिल थी। एक बहुत व्यस्त प्रोजेक्ट के करीब तीन महीने बाद राहुल ने तकिए, शॉवर और ऑफिस की डेस्क पर बहुत ज्यादा बाल देखे।
वे बताते हैं, “मुझे लगा कि मैं गंजा हो रहा हूं। मैंने रात-रात भर YouTube वीडियो देखे और ऑनलाइन तरह-तरह के हेयर ऑयल मंगाए। हर विज्ञापन 30 दिन में हेयर फॉल रोकने का दावा करता था।” लेकिन बाल झड़ना और बढ़ गया।
जब उन्होंने आखिरकार डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह ली, तब पता चला कि उन्हें पुरुषों वाला पैटर्न गंजापन नहीं, बल्कि टेलोजन एफ्लुवियम था। यह लंबे समय तक रहने वाले शारीरिक या मानसिक तनाव के कारण होने वाला अस्थायी हेयर लॉस है।
पोषण में सुधार, नींद बेहतर करने और तनाव के कारण को नियंत्रित करने के बाद उनके बाल धीरे-धीरे वापस आने लगे।
राहुल की कहानी एक जरूरी बात बताती है—हर बार बाल झड़ना स्थायी गंजेपन का संकेत नहीं होता।
बालों का झड़ना (Hair Fall) और बालों का गिरना (Hair Loss) में अंतर
डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार, युवा पुरुषों की एक आम गलती यह मान लेना है कि जितने भी बाल गिर रहे हैं, वे हमेशा के लिए खो रहे हैं।
डॉ. गुरमन बताते हैं, “हर बार बाल झड़ने का अर्थ स्थायी गंजापन नहीं होता है। टेलोजन एफ्लुवियम में आमतौर पर किसी बीमारी, सर्जरी, ज्यादा तनाव, तेजी से वजन कम होने या पोषण की कमी के कुछ महीनों बाद पूरे सिर से अचानक ज्यादा बाल झड़ने लगते हैं।”
पैटर्न गंजापन कई सालों में धीरे-धीरे बढ़ता है, जबकि टेलोजन एफ्लुवियम में पूरे सिर से एक साथ बाल ज्यादा झड़ सकते हैं।
एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया में आमतौर पर कनपटी के पास के बाल पीछे जाने लगते हैं, सिर के ऊपरी हिस्से यानी क्राउन पर बाल पतले होने लगते हैं और बालों की मोटाई धीरे-धीरे कम होती जाती है।
वहीं, अस्थायी बालों के झड़ने में सिर के अलग-अलग हिस्सों से बाल झड़ते हैं और कोई खास पैटर्न नहीं बनता।
डॉ. पवन के अनुसार, अगर तीन महीने से ज्यादा समय तक बाल लगातार झड़ते रहें, बाल साफ तौर पर पतले दिखने लगें, हेयरलाइन पीछे जाने लगे, गंजे पैच दिखाई दें या परिवार में कम उम्र में गंजेपन का इतिहास हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
वे बताते हैं, “जल्दी जांच से बाल झड़ने के ऐसे कारणों का पता लगाया जा सकता है जिन्हें ठीक किया जा सकता है। इससे बालों की जड़ों को ज्यादा कमजोर होने से पहले इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।”
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्थायी हेयर फॉल अक्सर कारण दूर होने के बाद ठीक हो सकता है। लेकिन एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया धीरे-धीरे बढ़ता है। बहुत देर करने पर बालों की कुछ जड़ें इतनी कमजोर हो सकती हैं कि उन्हें वापस लाना मुश्किल हो जाता है।
बाल झड़ने का मानसिक असर
बालों के गिरने की समस्या सिर्फ सिर तक सीमित नहीं रहती है। कई युवा पुरुषों में यह आत्मविश्वास, रिश्तों और यहां तक कि करियर के फैसलों को भी प्रभावित कर सकती है।
कम उम्र में गंजापन उस समय शुरू हो सकता है जब व्यक्ति अपनी पहचान और दिखावट को लेकर ज्यादा संवेदनशील होता है।
कुछ पुरुष डेटिंग से बचने लगते हैं। कुछ नौकरी के इंटरव्यू में जाने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपनी उम्र से ज्यादा बड़े दिख रहे हैं। कई पुरुष इस चिंता के बारे में किसी से बात नहीं करते हैं क्योंकि पुरुषों में दिखावट को लेकर चिंता पर बात करना आज भी असहज माना जाता है।
इसलिए डर्मेटोलॉजिस्ट अब केवल बालों का इलाज नहीं कर रहे हैं, बल्कि बाल झड़ने से होने वाले मानसिक तनाव को भी गंभीरता से ले रहे हैं।
यह सिर्फ दिखावे की चीज़ नहीं है
गुड़गांव के 30 वर्षीय आशीष वालिया को याद है कि डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाने से पहले ही उन्होंने करीब ₹80,000 खर्च कर दिए थे।
पहले प्याज का रस, फिर रोजमेरी ऑयल और राइस वॉटर। इसके बाद इम्पोर्टेड गमीज, कोलेजन पाउडर, इंस्टाग्राम पर वायरल सीरम और इन्फ्लुएंसर्स द्वारा सुझाए गए सप्लीमेंट।
वे आज हंसते हुए बताते हैं, “मैंने डॉक्टर को छोड़कर सब कुछ आजमा लिया।” जब उन्होंने आखिरकार डॉक्टर से सलाह ली, तब तक करीब दो साल बीत चुके थे। वे बताते हैं, “डर्मेटोलॉजिस्ट ने मुझसे कहा कि अगर मैं 18 महीने पहले आया होता, तो मेरे मौजूदा बालों को ज्यादा बचाया जा सकता था।”
इलाज से उनके बाल झड़ने की गति काफी कम हुई, लेकिन कुछ बाल वापस नहीं आ सके क्योंकि उनकी जड़ें बहुत ज्यादा कमजोर हो चुकी थीं। उनकी कहानी आज के डिजिटल दौर की एक बड़ी समस्या दिखाती है—बालों को लेकर गलत जानकारी।
इंटरनेट और बालों के गिरने (Hair Loss) वाली इंडस्ट्री
ऑनलाइन “हेयर फॉल ट्रीटमेंट” सर्च करते ही हजारों प्रोडक्ट सामने आ जाते हैं।
चमत्कारी तेल, हर्बल कैप्सूल, घरेलू नुस्खे, स्टेम सेल शैंपू और विटामिन स्प्रे—इनमें से कई कुछ ही हफ्तों में बाल वापस उगाने का दावा करते हैं।
लेकिन विज्ञान की तस्वीर अलग है।
डॉ. अपराजिता बताती हैं, “बाल झड़ने को लेकर बहुत सारी गलतफहमियां हैं। इनमें से एक बड़ी गलतफहमी यह है कि बार-बार शैम्पू करने से बाल झड़ते हैं। असल में शैम्पू उन बालों को साफ करता है जो पहले से ही बालों के झड़ने वाले चरण में पहुंच चुके होते हैं। शैम्पू बालों की जड़ों को कम बाल बनाने के लिए मजबूर नहीं करता।”
एक और आम मिथक है कि टोपी पहनने से बालों की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलती और बाल झड़ने लगते हैं।
डॉ. अपराजिता के अनुसार, सामान्य रूप से टोपी पहनने से गंजापन होता है, इसका कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है। बहुत लंबे समय तक बहुत टाइट हेडवियर पहनने से बालों पर खिंचाव पड़ सकता है, जिससे नुकसान संभव है, लेकिन सामान्य टोपी पहनने से गंजापन नहीं होता है।
डॉ. पवन बताते हैं, “बाल झड़ने को लेकर गलत जानकारी बहुत ज्यादा है। कई लोग तेल, घरेलू नुस्खों या ऑनलाइन मिलने वाले चमत्कारी सप्लीमेंट पर भरोसा करते हैं और प्रभावी इलाज में देरी करते हैं। कुछ चीजें बालों की कंडीशनिंग या सिर की त्वचा की सेहत बेहतर कर सकती हैं, लेकिन वे कमजोर हो चुकी बालों की जड़ों को फिर से सामान्य नहीं बना सकतीं और मेडिकल इलाज की जगह नहीं ले सकती हैं।”
हेयर ऑयल बालों का रूखापन कम कर सकता है, चमक बढ़ा सकता है और बाल टूटने से बचाने में मदद कर सकता है। मालिश से कुछ समय के लिए सिर में रक्त प्रवाह बढ़ सकता है। लेकिन इनमें से कोई भी चीज एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया को ठीक नहीं करती है।
टेस्टोस्टेरोन वाला मिथक अभी भी कायम है
शायद सबसे आम गलतफहमी यह है कि गंजे पुरुषों में “बहुत ज्यादा टेस्टोस्टेरोन” होता है। डर्मेटोलॉजिस्ट इस धारणा को खारिज करते हैं। पैटर्न गंजापन खून में मौजूद टेस्टोस्टेरोन की मात्रा से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है।
असल में, यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति के बालों की जड़ें DHT के प्रति कितनी संवेदनशील हैं। दो पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर एक जैसा हो सकता है, लेकिन उनके बालों की स्थिति बिल्कुल अलग हो सकती है क्योंकि उनकी बालों की जड़ें DHT पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करती हैं।
डॉ. अपराजिता बताती हैं, “कई लोगों में हार्मोन का स्तर बिल्कुल सामान्य होता है, फिर भी DHT के प्रति उनकी आनुवंशिक संवेदनशीलता के कारण एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया हो जाता है।”
क्या जेनेटिक गंजेपन को रोका जा सकता है?
यह सवाल लगभग हर युवा पुरुष के मन में आता है।
ईमानदार जवाब यह है कि आप अपने जीन्स नहीं बदल सकते हैं। लेकिन आप अपनी जीवनशैली और बालों की सेहत को बेहतर बनाकर बालों को अतिरिक्त नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।
इसके लिए पर्याप्त प्रोटीन लें, शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो तो उसे ठीक कराएं, तनाव को नियंत्रित करें, धूम्रपान से बचें, पर्याप्त नींद लें और सिर की त्वचा संबंधी समस्याओं का समय पर इलाज कराएं।
डॉ. गुरमन बताते हैं, “अच्छी जीवनशैली बालों को स्वस्थ रखने में मदद करती है, लेकिन आनुवंशिक रूप से होने वाले हेयर लॉस में यह मेडिकल इलाज की जगह नहीं ले सकती है।”
जितनी जल्दी इलाज शुरू करें, उतना बेहतर
कई सालों तक चंडीगढ़ के 25 वर्षीय करण मल्होत्रा खुद को यह समझाते रहे कि उनकी हेयरलाइन बस “उम्र के साथ बदल रही है।”
उनके पिता को 40 की उम्र में गंजापन हो गया था, इसलिए करण को लगा कि उनके पास अभी काफी समय है। डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय उन्होंने ऑनलाइन फोरम, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सलाह और महंगे “हेयर ग्रोथ किट्स” पर भरोसा किया, जो बाल तेजी से उगाने के चमत्कारी नतीजों का दावा करते थे।
जब आखिरकार उन्होंने त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह ली, तब तक लगभग तीन साल बीत चुके थे। वे बताते हैं, “डॉक्टर ने मुझसे ऐसी बात कही, जो काश मैंने बहुत पहले सुनी होती। वे बताते हैं जड़ें फैसला लेने का इंतजार नहीं करती हैं।’” आज उनके बाल झड़ने की समस्या नियंत्रण में है, लेकिन उन्हें इलाज में देरी करने का पछतावा है। वे आगे बताते हैं, “मेरे बाल एक रात में न हीं झड़ रहे थे। मैं अपना समय गंवा रहा था।”
उनका अनुभव उस अहम संदेश को दिखाता है, जिसे त्वचा रोग विशेषज्ञ युवा पुरुषों को समझाना चाहते हैं: जब बात एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया यानी आनुवंशिक कारणों से होने वाले गंजेपन की हो, तब समय महत्वपूर्ण होता है।
डॉ. अपराजिता बताती हैं, “सबसे पहला कदम खुद बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना है। 20 की उम्र में बाल पतले होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया, शरीर में पोषक तत्वों की कमी, थायरॉइड की समस्या, तनाव के कारण बाल झड़ना या सिर की त्वचा संबंधी बीमारियां। इन सभी समस्याओं का इलाज अलग-अलग तरीके से किया जाता है।”
वह बताती हैं कि सबसे जरूरी चीज़ बाल झड़ने के मूल कारण का पता लगाना है, ताकि बालों की जड़ों को स्थायी नुकसान होने से पहले इलाज शुरू किया जा सके।
डॉ. नीलम इस पर जोर देती हैं कि बाल झड़ने की समस्या का पता लगाना आमतौर पर आसान होता है, लेकिन इसका निदान केवल अनुमान के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। वह बताती हैं, “पैटर्न एलोपेसिया आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या है और इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसका पता मुख्य रूप से डॉक्टर की जांच से लगाया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में ट्राइकोस्कोप की मदद से सिर की त्वचा और बालों की जड़ों की जांच करनी पड़ सकती है। जटिल मामलों में त्वचा की बायोप्सी भी जरूरी हो सकती है। एलोपेसिया के कई अन्य प्रकार, जैसे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारी या सिर की त्वचा के संक्रमण के कारण जगह-जगह से बाल झड़ना, समय पर इलाज मिलने पर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।”
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