IVF की शुरुआत एक भावनात्मक यात्रा हो सकती है और अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो इससे चिंता और भी बढ़ सकती है। अधिकांश लोग सोचते हैं, “क्या IVF मेरे लिए सुरक्षित है?” या “क्या मेरी बीमारी से इसकी सफलता दर प्रभावित हो सकती है?” अच्छी बात यह है कि अधिकांश लोगों के लिए IVF संभव होता है, चाहे कोई स्वास्थ्य समस्या हो। लेकिन इसके लिए देखभाल और योजना की आवश्यकता होती है। इस लेख में उल्लेख किया गया है कि स्वास्थ्य समस्या होने पर IVF में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, कौन से जोखिम हो सकते हैं और इसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कैसे तैयार हो सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है, तो क्या उसके लिए IVF कराना सुरक्षित है?
अधिकांश लोग सोचते हैं कि क्या वे IVF करा सकते हैं अगर उन्हें मधुमेह, थायराइड, उच्च रक्तचाप, PCOS या कोई ह्रदय रोग है। अच्छी खबर यह है कि — हां, ऐसे मामलों में भी IVF आमतौर पर सुरक्षित होता है, अगर उनकी बीमारी कंट्रोल में है।

डॉ. देवयानी मुखर्जी, रिप्रोडक्टिव एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड IVF , राजौरी गार्डन, दिल्ली बताती हैं कि, “उदाहरण के लिए, अगर मधुमेह कंट्रोल में नहीं है, तो इससे IVF की सफलता दर प्रभावित हो सकती है और गर्भावस्था में जोखिम बढ़ सकता है। उच्च रक्तचाप या किडनी संबंधी समस्याओं में भी इलाज शुरू करने से पहले सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। यहां तक कि IVF के दौरान बुखार जैसी सामान्य बीमारी भी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसीलिए डॉक्टर आमतौर पर पहले सेहत को स्थिर करने की सलाह देते हैं। इसमें दवाइयों को बदलना, कुछ अतिरिक्त जांचें कराना या दिनचर्या में सही बदलाव करना शामिल हो सकता है।”
भले ही यह देरी जैसा लगे, लेकिन शरीर को पहले से तैयार करना IVF की सफलता दर को बढ़ा सकता है और लंबे समय से चली आ रही बीमारियों के साथ इसे सुरक्षित भी बना सकता है। हमेशा अपने फर्टिलिटी डॉक्टर को पूरी मेडिकल हिस्ट्री बताएं — चाहे कोई बात छोटी ही क्यों न लगे। ईमानदारी से जानकारी देने से डॉक्टर सही प्लान बना सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है तो IVF के दौरान उसे कौन से खतरे हो सकते हैं?
IVF में कुछ सामान्य खतरे होते हैं, जैसे बहुत ज़्यादा अंडे बनना (जिसे ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन कहा जाता है) या एक से ज़्यादा बच्चे (जुड़वां या उससे ज़्यादा) होना। लेकिन किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है, तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ सकता है। जैसे:
- उच्च रक्तचाप वाली महिलाओं को गर्भावस्था में ज़्यादा जटिलताएं हो सकती हैं।
- थायराइड की समस्या वाले लोगों को दवाइयों की खुराक बार-बार बदलनी पड़ सकती है।
- ह्रदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को इलाज के दौरान खास निगरानी की आवश्यकता होती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि IVF सुरक्षित नहीं है। इसका अर्थ है कि डॉक्टर एक विशिष्ट योजना बनाते हैं। कभी-कभी फर्टिलिटी डॉक्टर, ह्रदय या हार्मोन संबंधी विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि इलाज के हर कदम पर मरीज की सुरक्षा बनी रहे। इन जोखिमों और स्वास्थ्य समस्याओं को समझने से IVF की प्रक्रिया सहज बनती है।
IVF के लिए अपने शरीर को कैसे तैयार किया जा सकता है?
तैयारी करना IVF प्रक्रिया की सफलता की संभावना बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है, तो डॉ. मुखर्जी के अनुसार उसे निम्नलिखित चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए:
- अपनी बीमारी को कंट्रोल में रखें: ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर या थायराइड लेवल स्थिर रखें।
- अपनी दवाइयों की जांच करें: कुछ दवाइयाँ IVF के दौरान सुरक्षित नहीं हो सकती हैं इसलिए डॉक्टर उन्हें बदल सकते हैं।
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: सही खाना खाएं, हल्का व्यायाम करें, तनाव कम करें, योनि की साफ़-सफाई का ध्यान रखें और शराब या धूम्रपान से बचें।
- अतिरिक्त जांच कराएं: IVF से पहले और दौरान खून की जांच, हार्ट स्कैन या अन्य जांच करवानी पड़ सकती हैं।
इन कदमों को IVF के लिए मजबूत आधार बनाने जैसा समझें। जितना स्वस्थ और स्थिर शरीर होगा, सफलता की संभावना उतनी ही बढ़ेगी और जोखिम कम होंगे। अच्छी तैयारी से, स्वास्थ्य की समस्या होने के बावजूद IVF सुरक्षित और सफल हो सकता है।
स्वास्थ्य समस्या होने का अर्थ यह नहीं है कि लोग माता-पिता बनने का सपना छोड़ दें। सही देखभाल, योजना और समर्थन के साथ, IVF से एक स्वस्थ गर्भावस्था हो सकती है। अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें, उनकी सलाह मानें और शरीर पर ध्यान दें।
चाहे शुगर कंट्रोल करना हो या दवाइयां बदलना, हर छोटा कदम सफलता के करीब ले जाता है। यह सफर थोड़ा ज्यादा ध्यान मांग सकता है, लेकिन हमेशा उम्मीद रहती है।
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