यौवन (Puberty) का दौर बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए थोड़ा उलझन भरा हो सकता है। जब बच्चे के शरीर में विभिन्न प्रकार के बदलाव होते हैं, तब उन्हें सहयोग की आवश्यकता होती है। कई माता-पिता इस बारे में बात करने से कतराते हैं क्योंकि यह एक अजीब विषय है। इसी कारण, बच्चे अन्य माध्यमों उदाहरण के लिए, इंटरनेट और दोस्तों इत्यादि से अधूरी जानकारी प्राप्त करते हैं, जो उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है।
यौवन (Puberty) के बारे में खुलकर बात करना क्यों आवश्यक है?

डॉ. पल्लवी शर्मा, MBBS, MD (मनोचिकित्सा), सलाहकार मनोचिकित्सक, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, नई दिल्ली बताती हैं, “किशोर कई बदलावों से गुजरते हैं, जैसे शरीर का बढ़ना, मूड स्विंग्स, नए भावनाएँ आना और दोस्तों का दबाव। अगर माता-पिता उनसे खुलकर बात नहीं करते हैं, तब बच्चे सलाह के लिए अपने दोस्तों या इंटरनेट पर भरोसा करने लगते हैं — और वहां की जानकारी हमेशा सही नहीं होती है।”
यौवन के दौरान खुलकर बात करना भावनात्मक सहारा भी देता है। सिर्फ इतना कहना कि “मैं भी इस दौर से गुज़रता था” बच्चे की चिंता को कम कर सकता है और उन्हें याद दिलाता है कि वे अकेले नहीं हैं।
डॉ. शर्मा आगे बताती हैं, “खुलकर बातचीत करने से भरोसा बनता है। जब माता-पिता बच्चों की बात सुनते हैं, तब बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे गलत या असुरक्षित फैसलों से बच सकते हैं।”
घर पर यौवन के बारे में बात करने के आसान तरीके क्या हैं?
यौवन पर बात करना तनावपूर्ण नहीं होना चाहिए। इस स्थिति में निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जा सकता है:
- जल्दी और सहज शुरू करें: छोटे-छोटे रोज़मर्रा के अवसर करके बात शुरू करें।
- सरल भाषा का प्रयोग करें: बड़े मेडिकल शब्दों से बचें। ऐसे शब्द बोलें जो बच्चा आसानी से समझ सके।
- पहले सुनें: अपने बच्चे को सवाल पूछने दें और बातचीत वहीं से आगे बढ़ने दें। इससे उन्हें लगेगा कि वे अकेले नहीं हैं।
- शांत रहें: अगर कोई सवाल माता-पिता चौंकाए, तो भी आराम से जवाब दें।
- भावनाओं को सामान्य बनाएं: उन्हें बताएं कि अजीब या उलझन महसूस करना ठीक है। उनकी भावनाओं को सरल शब्दों में समझने में मदद करें।
- उनकी निजता का सम्मान करें: उन्हें जगह दें, लेकिन याद दिलाएं कि आप हमेशा बात करने के लिए मौजूद हैं।
ये छोटे-छोटे कदम बातचीत को आसान बनाते हैं और बच्चे आप पर भरोसा कर पाते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि माता-पिता के पास हर सवाल का सही जवाब होना चाहिए, बल्कि यह है कि आप उनसे खुलकर बात करें।
माता-पिता और शिक्षक मिलकर किशोरों का यौवन के दौरान कैसे मार्गदर्शन कर सकते हैं?
भारत में आज भी घर पर यौवन के बारे में बात करने को थोड़ा अजीब माना जाता है। ऐसे में शिक्षक की सहायता ली जा सकती है। स्कूलों में शरीर के बदलावों के बारे में सिखाया जाता है, लेकिन कई बच्चे सवाल पूछने में झिझकते हैं।
- माता-पिता भावनात्मक सहारा देते हैं – वे अपने बच्चे को समझते हैं और उसका साथ देते हैं।
- शिक्षक सही जानकारी देते हैं – वे शरीर में होने वाले बदलावों को वैज्ञानिक तरीके से समझाते हैं।
- मिलकर वे बेहतर मार्गदर्शन देते हैं – एक संतुलन बनता है, जिसमें भावनात्मक और जानकारी दोनों शामिल होते हैं।
जब माता-पिता और शिक्षक एक साथ काम करते हैं, तब बच्चे को सही जानकारी मिलती है और वे खुलकर बात करने में सहज महसूस करते हैं। इससे वे दोस्तों या इंटरनेट से मिलने वाली गलत जानकारी से भी बचते हैं।
यौवन के बारे में बात करते समय सबसे ज़रूरी है – प्यार, धैर्य और ईमानदारी। माता-पिता को सब जानने की आवश्यकता नहीं है। बस माता-पिता के साथ और समझ से ही उनका बच्चा सुरक्षित और समझदार महसूस करता है। इससे यौवन का समय उसके लिए सहज बन जाता है।
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