जब कोई व्यक्ति सुनता है कि उसके बच्चे या किसी प्रियजन को वॉकिंग निमोनिया है, तो यह उसके लिए डरावना हो सकता है, लेकिन उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है — यह आमतौर पर हल्का होता है और आसानी से ठीक हो जाता है। इसे “वॉकिंग निमोनिया” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस बीमारी से ग्रसित लोग आमतौर पर इतने बीमार नहीं होते कि उन्हें बिस्तर पर रहना पड़े — वे अपने रोज़मर्रा के काम कर सकते हैं।
यह बीमारी तब होती है जब फेफड़ों में हल्का संक्रमण हो जाता है, जो आमतौर पर माइकोप्लाज्मा निमोनिया नाम के जीवाणु से होता है। सामान्य निमोनिया की तरह यह अचानक नहीं होता और न ही बहुत गंभीर होता है। यह धीरे-धीरे शुरू होता है और अक्सर एक ऐसी सर्दी या खांसी जैसा लगता है जो ठीक नहीं होती है।
क्या वॉकिंग निमोनिया एक संक्रामक बीमारी है?
हाँ, वॉकिंग निमोनिया एक संक्रामक बीमारी है। यह तब फैलती है जब संक्रमित व्यक्ति खाँसता या छींकता है और हवा में बहुत छोटे-छोटे कण छोड़ता है। अगर कोई व्यक्ति या उसका बच्चा इन्हें साँस के साथ अंदर ले लेते हैं, तो संक्रमण हो सकता है।
चूंकि, इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं इसलिए कई लोगों को पता ही नहीं चलता है कि उन्हें वॉकिंग निमोनिया है। वे काम पर जाते रहते हैं, स्कूल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं, जिससे यह बीमारी दूसरों तक आसानी से फैल सकती है।
सुरक्षित रहने के लिए, नियमित रूप से हाथ धोएँ, खाँसते या छींकते समय मुँह को ढकें और ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाए रखें जिसे लगातार खाँसी हो। ये छोटे-छोटे कदम संक्रमण को फैलने से रोकने में बहुत मदद करते हैं।
वॉकिंग निमोनिया के प्रकार क्या हैं?
वॉकिंग निमोनिया के कुछ प्रकार होते हैं:
- मायकोप्लाज़्मा निमोनिया संक्रमण: यह सबसे आम प्रकार है, विशेषकर बच्चों और युवाओं में। यह आसानी से फैलता है, लेकिन आमतौर पर बीमारी हल्की होती है।
- क्लेमाइडोफिला निमोनिया संक्रमण: यह धीरे-धीरे विकसित होता है और लंबे समय तक चलने वाली खाँसी और थकान का कारण बन सकता है। यह पहले वाले की तुलना में धीरे फैलता है।
- लीजियोनेला निमोनिया संक्रमण: यह कम आम है, लेकिन गंभीर हो सकता है, विशेषकर उन लोगों में जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
चाहे प्रकार कोई भी हो, वॉकिंग निमोनिया के लक्षण आमतौर पर एक जैसे होते हैं। इसलिए यह पता लगाने के लिए कि कौन-सा प्रकार है, डॉक्टर एक्स-रे या खून की जाँच जैसी जाँच करते हैं।
वॉकिंग निमोनिया के लक्षण क्या हैं?

डॉ. उन्मेश उपाध्याय, अध्यक्ष, अहमदाबाद के पीडियाट्रिक एसोसिएशन (2023-24), संस्थापक और वरिष्ठ सलाहकार बाल रोग विशेषज्ञ, विस्मय चाइल्डकेयर अस्पताल, अहमदाबाद, गुजरात बताते हैं कि “वॉकिंग निमोनिया, जिसे एटिपिकल निमोनिया भी कहा जाता है, निमोनिया का हल्का रूप होता है। इसके लक्षण सामान्य निमोनिया जितने गंभीर नहीं होते, इसलिए लोग बीमार होने के बावजूद अपने रोज़मर्रा के काम जारी रख सकते हैं — इसी वजह से इसे “वॉकिंग” निमोनिया कहा जाता है।”
इसके आम लक्षण हैं:
- सूखी खाँसी जो एक हफ्ते से ज़्यादा समय तक रहती है
- हल्का बुखार जो आता-जाता रहता है
- थकान या कमजोरी, भले ही लोग पर्याप्त आराम करें
- सिरदर्द या गले में दर्द
- छाती में हल्का दर्द या असुविधा, विशेषकर खाँसते समय
- साँस फूलना, विशेषकर किसी शारीरिक गतिविधि के दौरान
बच्चों में वॉकिंग निमोनिया के लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं। उनमें ये लक्षण दिख सकते हैं चिड़चिड़ापन या गुस्सा करना, भूख कम लगना और रात में खाँसी के कारण नींद में परेशानी होना।
अधिकांश मामलों में यह हल्का होता है और सही देखभाल से ठीक हो जाता है। लेकिन माता-पिता को डॉक्टर से मिलना चाहिए अगर खाँसी दो हफ्तों से ज़्यादा समय तक रहती है, बच्चे को साँस लेने में दिक्कत हो रही है, बुखार ठीक नहीं हो रहा है। जल्दी इलाज कराने से बच्चा जल्दी ठीक हो जाता है और संक्रमण दूसरों तक फैलने से भी रुकता है।
वॉकिंग निमोनिया और ब्रोंकाइटिस में क्या अंतर है?
अक्सर माता-पिता वॉकिंग निमोनिया और ब्रोंकाइटिस को एक जैसा समझ लेते हैं क्योंकि इन दोनों स्थितियों में खाँसी होती है। लेकिन इनके बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:
| लक्षण | वॉकिंग निमोनिया | ब्रोंकाइटिस |
|---|---|---|
| खाँसी का प्रकार | सूखी और लंबे समय तक रहने वाली | गीली खाँसी (बलगम के साथ) |
| बुखार | हल्का या थोड़ा बढ़ा हुआ | बहुत कम या हल्का |
| छाती में दर्द | हल्की असुविधा | ज़्यादा दर्द, लगातार खाँसी के कारण |
| साँस लेने में दिक्कत | हल्की साँस फूलना | कभी-कभी साँस लेते समय घरघराहट |
| अवधि | ज़्यादा समय तक रहता है (लगभग 2–4 हफ्ते) | कम समय तक रहता है (1–2 हफ्ते) |
अगर खाँसी या अन्य लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं या बढ़ रहे हैं, तो वॉकिंग निमोनिया की जाँच करवाना बेहतर है।
माता-पिता का चिंता करना स्वाभाविक है जब बच्चे या परिवार के किसी सदस्य की खाँसी ठीक नहीं हो रही हो। लेकिन इन लक्षणों की जानकारी होने से माता-पिता समय पर कदम उठा सकते हैं। आराम, तरल पदार्थ और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं से ज़्यादातर लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
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