जब आप स्वास्थ्य बीमा (health insurance) खरीदते हैं, तब आपने अक्सर “पहले से मौजूद बीमारी” या PEDs शब्द सोने होंगे। ये वे बीमारियां होती हैं जो बीमा लेने से पहले से ही किसी व्यक्ति को होती हैं। ये बीमारियाँ बीमा पाने से नहीं रोकती हैं, लेकिन आपकी प्रीमियम राशि, कवर किए जाने वाले लाभ और क्लेम की स्वीकृति को प्रभावित कर सकती हैं। अत: यह समझना जरूरी है कि इन बीमारियों का बीमा पर क्या असर पड़ता है, विशेषकर भारत में, जहाँ जीवनशैली से संबंधित बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
IRDAI के अनुसार पहले से मौजूद बीमारी क्या हैं?
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के अनुसार, पहले से मौजूद बीमारी वह रोग, चोट या स्थिति होती है जिसका इलाज या निदान बीमा पॉलिसी लेने की तारीख से पहले के 48 महीनों (अर्थात् 4 साल) में किया गया हो।

कुलिन शाह, सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी, Onsurity बताते हैं “अगर आपको पिछले चार सालों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा या थायराइड जैसी कोई बीमारी हुई थी और आपने उसका इलाज कराया या उसकी पहचान हुई थी, तो उसे पहले से मौजूद बीमारी कहा जाता है। यहाँ तक कि अगर आपने कोई इलाज नहीं कराया लेकिन बीमारी के लक्षण थे या आपको उसकी जानकारी थी, तो भी यह PED (पहले से मौजूद बीमारी) मानी जा सकती है।”
पहले से मौजूद बीमारियाँ स्वास्थ्य बीमा को कैसे प्रभावित करती हैं?
कुलिन शाह बताते हैं कि पहले से मौजूद बीमारियाँ आपके स्वास्थ्य बीमा (health insurance) को निम्नलिखित तरह से प्रभावित कर सकती हैं:
1. Waiting period: आमतौर पर बीमा कंपनियाँ 2 से 4 साल का waiting period रखती हैं। इसका अर्थ है कि आप इस दौरान अपनी पुरानी बीमारी के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं। इलाज का खर्चा बीमा कंपनी तभी उठाएगी जब यह अवधि पूरी हो जाए।
2. ज़्यादा प्रीमियम: अगर आपको कोई गंभीर बीमारी है या एक से ज़्यादा बीमारियाँ हैं, तो बीमा कंपनी आपसे ज़्यादा प्रीमियम मांग सकती है क्योंकि आपको ज़्यादा जोखिम वाला ग्राहक माना जाता है।
3. सीमित कवरेज: कुछ पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करती हैं, लेकिन एक तय सीमा तक ही। कुछ पॉलिसियाँ तो कुछ बीमारियों को कवर नहीं करती हैं।
आवेदन पत्र भरते समय अपनी सभी बीमारियों की सही जानकारी देना बहुत ज़रूरी है। अगर आप कोई जानकारी छिपाते हैं, तो आपका क्लेम बाद में खारिज हो सकता है।
पहले से मौजूद बीमारियों के लिए Waiting period
भारत में ज़्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में पहले से मौजूद बीमारियों (PEDs) के लिए 2 से 4 सालों का Waiting period होता है। इसका अर्थ है कि इस दौरान आप इन बीमारियों के इलाज के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको किसी दूसरी बीमारी का इलाज कराने की ज़रूरत है जो इन बीमारियों से संबंधित नहीं है, तो उसे कवर किया जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति—चाहे वह 60 साल से अधिक हो या कम उम्र का—पहले से मौजूद बीमारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा ले सकता है। लेकिन बीमा लेने से पहले उसकी शर्तों और नियमों को समझना बहुत ज़रूरी है।
कुछ बीमा कंपनियाँ एक्स्ट्रा चार्ज या एक खास ऑप्शन (जिसे राइडर कहते हैं) के साथ कम Waiting period भी देती हैं, जैसे 1 या 2 साल। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले उसके सभी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें और Waiting period की शर्त भी ज़रूर देखें।
इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर आपको सेक्शन 80D के तहत टैक्स में छूट भी मिल सकती है, विशेषकर अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं।
पहले से मौजूद बीमारियों के लिए कवरेज कैसे प्राप्त करें?
अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस पाने के लिए ये समझदारी भरे कदम उठाएँ:
ईमानदारी से जानकारी दें: बीमा लेते समय अपनी सभी पुरानी बीमारियों की सही जानकारी दें। अगर आप कुछ छिपाते हैं, तो बाद में क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
खास बीमा प्लान देखें: कुछ बीमा कंपनियाँ ऐसी पॉलिसी देती हैं जो मधुमेह, ह्रदय रोग या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को पहले दिन से या बहुत कम Waiting period में कवर करती हैं।
टॉप-अप प्लान का फायदा लें: Waiting period खत्म होने के बाद, आप टॉप-अप या सुपर टॉप-अप पॉलिसी ले सकते हैं। ये पॉलिसियाँ मेडिकल खर्चों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा देती हैं।
पॉलिसी बदलें अगर ज़रूरत हो: अगर आपने एक बीमा कंपनी के साथ Waiting period पूरा कर लिया है, तो आप दूसरी कंपनी में पॉलिसी बदल कर सकते हैं जो आपकी बीमारी के लिए बेहतर कवरेज देती हो।
बेहतर कवरेज के लिए प्लान की तुलना करना
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले, विभिन्न बीमा कंपनियों की तुलना निम्नलिखित कारकों के आधार पर करें:
- पहले से मौजूद बीमारियों (PEDs) के लिए Waiting period
- प्रीमियम की लागत
- कवरेज लिमिट और सब-लिमिट्स
- डे-वन कवरेज विकल्प
- PEDs के लिए को-पेमेंट क्लॉज
IRDAI की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्थ इंश्योरेंस तुलना उपकरण का प्रयोग करें, ताकि आप सबसे सस्ता प्लान के बजाय सबसे उपयुक्त प्लान चुनें।
निष्कर्ष
पहले से मौजूद बीमारियां आपको स्वास्थ्य बीमा प्राप्त करने से रोकती नहीं हैं, लेकिन ये आपकी कवरेज को प्रभावित करती हैं। यह समझकर कि बीमा कंपनियाँ पहले से मौजूद बीमारियों को कैसे हैंडल करती हैं, Waiting period क्या होता है और अलग-अलग प्लान्स की तुलना कैसे करें, आप समझदारी से फैसले ले सकते हैं जो आपकी सेहत और आर्थिक स्थिति के अनुकूल हो। भारत जैसे देश में, जहाँ जीवनशैली से संबंधित बीमारियाँ बढ़ रही हैं, वहां यह जानना और भी ज़रूरी है कि आपकी पॉलिसी में पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में क्या लिखा है।
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