इस गर्म मौसम में, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ रहा है, अगर इसमें आवश्यक सावधानियाँ न बरती जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। इस मौसम में जब गर्मी बढ़ती है तो उसके साथ में तापमान का बढ़ना भी एक आम समस्या है। इसके अतिरिक्त, जब गर्मी के साथ-साथ गर्म हवा भी चले तो उसे गर्मी की लहर (heat wave) कहा जाता है, जो कुछ समय बाद मानव शरीर में लू लगने (heatstroke) का रूप ले लेती है। गर्मी की लहरें (heat wave) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान तेज़ी से बढ़ जाता है और उसे ठंडा होने में समय लगता है। इसका मुख्य कारण अधिक समय तक धूप में रहने या घर के बाहर कोई शारीरिक कार्य करना है। इस प्रकार, समग्र स्वास्थ्य के लिए लू से बचना आवश्यक है।
गर्मी से थकावट (heat exposure) की वजह से मस्तिष्क को भी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा यह हृदय और गुर्दे की विफलता का कारण भी बन सकती है। अगर इस स्थिति को समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह मौत का कारण भी बन सकती है। इसी कारण यह आवश्यक है कि हमें लू लगने और गर्मी से थकावट से बचने की जानकारी हो ताकि इससे हम अपनी और अपने प्रियजनों की रक्षा कर सकें।
अंतर समझें
गर्मी के मौसम में गर्मी से संबंधित बीमारियाँ होने का खतरा रहता है। इनमें लू लगना (heatwave) और गर्मी से थकावट (heat exposure) प्रमुख हैं।
लू लगना (heatwave) और गर्मी से थकावट (heat exhaustion)
लू लगना और गर्मी से थकावट दोनों ही उच्च तापमान के परिणाम हैं। इसके अतिरिक्त, जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो उसके तापमान को कम होने में परेशानी हो सकती है। इसके बावजूद इनके फैलने और लक्षण भिन्न हैं।
लू लगना
लू लगने को हीटस्ट्रोक के नाम से भी जाना जाता है। यह गर्मी के मौसम से संबंधित एक गंभीर समस्या है। यह समस्या मुख्य रूप से तब होती है जब शरीर का थर्मोरेगुलेटरी तंत्र लंबे समय तक अधिक तापमान के संपर्क में रहने के कारण खराब हो जाता है। लू लगने के परिणामस्वरूप शरीर का तापमान 104°F (40°C) या उससे अधिक बढ़ जाता है। इसके कारणवश मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और मांसपेशी प्रणाली को तत्काल और गहरा आघात पहुंचता है। लू लगने के लक्षणों में शरीर का तापमान बढ़ना, सूखी और गर्म त्वचा (पसीना न आना), दिल की धड़कनों का बढ़ना, सिरदर्द, चक्कर आना और बहोश होना शामिल हैं।
गर्मी से थकावट (heat exhaustion)
गर्मी से थकावट एक पुरानी स्थिति है, जो अधिक समय तक धूप में रहने और तरल पदार्थों का सेवन न करने की वजह से होती है। गर्मी से थकावट के लक्षणों में पसीना आना, कमजोरी, जुकाम, नम त्वचा, दिल की धड़कनों का तेज़ या कम होना, उल्टी और बेहोश होना शामिल हैं। यह स्थिति लू लगने की तुलना में कम गंभीर होती है, जिसे ठंडे मौसम में रहने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करके ठीक किया जा सकता है।
लू लगने के जोखिम कारक
ऐसे कुछ कारक हीटस्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं, जिससे कुछ लोगोंं के इससे पीड़ित होने की संभावना अधिक रहती है:
- आयुः लू लगने की संभावना मुख्य रूप से शिशु, छोटे बच्चे और ऐसे वयस्क जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होती है और वे बदलते मौसम को सहन नहीं कर पाते हैं।
- स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँः हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, गुर्दे की बीमारी और मोटापा से पीड़ित लोगों में लू लगने की संभावना अधिक होती है।
- अत्यधिक मेहनत वाली शारीरिक गतिविधि करना: लू लगने की संभावना मुख्य रूप से उस स्थिति में बढ़ जाती है जब कोई अत्यधिक मेहनत वाली शारीरिक गतिविधि को धूप में की जाती है। इस प्रकार एथलीटों, सैन्य कर्मियों और बाहरी श्रमिकों आदि इसके शिकार बन सकते हैं।
- शरीर में पानी की कमी होना (Dehydration): शरीर में पानी की कमी होने की वजह से उससे पसीना नहीं निकलता है, जो कि शरीर को ठंडा रखने का प्राकृतिक तरीका है। इस प्रकार लू लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे में घर से बाहर जाते समय अपने साथ पानी की एक बोतल रखना लाभकारी साबित हो सकता है।
- प्राकृतिक जीवन परिस्थितियाँः शहरीकरण की वजह से पेड़-पौधे काफी कम हो गए हैं। इसकी वजह से गर्मी के मौसम में लू लगने जैसी समस्याएँ होने की संभावना बढ़ जाती है।
लू लगने से बचाव के तरीके
हालांकि लू लगने की वजह से लोगों को काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसकी वजह से कुछ लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ती है। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि निम्नलिखित तरीकों को अपना लू लगने से बचाव किया जा सकता है:
- अत्यधिक पानी पीना (Stay hydrated): लू लगने से बचने का प्रमुख तरीका अत्यधिक पानी पीना है। लेकिन शराब और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन न करें।
- हल्के रंग के कपड़े पहनना: सूती कपड़े से बने हल्के रंग के, ढीले-ढाले कपड़े आपके शरीर को सांस लेने और लंबे समय तक तापमान बनाए रखने में मदद करके लू लगने से रक्षा कर सकते हैं।
- दिन में घर से बाहर न जाना: जितना हो सके घर में ही रहें और 10 a.m. से 4 p.m के दौरान घर से बाहर न जाएं क्योंकि इस समय धूप अधिक होती है, जो लू लगने समेत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।
- सनस्क्रीन लगानाः कम से कम 50 के SPF के साथ एक व्यापक-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग करें, और इसे हर दो घंटे में फिर से लगाएं, या अगर अत्यधिक पसीना आ रहा है तो सनस्क्रीन बार-बार लगाएं। ऐसा करने से त्वचा को जलन से बचाया जा सके।
- खड़ी कार में किसी भी व्यक्ति को न छोड़ना: कार जैसे वाहन के अधिक समय तक गर्मी में खड़े रहने से वे काफी गर्म हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनमें आग लगने या खिड़कियों के टूटने जैसा खतरा बढ़ जाता है। अत: इस दौरान कार में रहना जानलेवा हो सकता है।
- दैनिक ऊष्मा सूचकांक (heat index) के बारे में खुद को अपडेट करना: मौसम विभाग हर रोज़ दैनिक ऊष्मा सूचकांक (heat index) की जानकारी देता है, ऐसे में उस पर नज़र रखना काफी लाभकारी साबित हो सकता है।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि गर्मी के मौसम में लू लगना (heatwave) और गर्मी से थकावट (heat exhaustion) प्रमुख समस्याएँ हैं। ऐसे में इनसे बचाव में कारगर तरीकों में अत्यधिक मात्रा में पानी पीना, ढीले-ढीले कपड़े पहनना, दिन में घर से बाहर न जाना शामिल हैं। हालांकि, इन दोनों समस्याओं को उपयुक्त सावधानियों को बरतकर ठीक किया जा सकता है परंतु इनके बढ़ जाने की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना ही एकमात्र उपाय बचता है। अत: हमें उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ना आपके लिए लाभकारी साबित हुआ होगा और इसमें दी गई जानकारी आपकी लू लगने और गर्मी से थकावट से रक्षा करने में सहायता करेगी।
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