आज के अत्याधुनिक युग में विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिनमें पेट की चर्बी भी शामिल है। यह समस्या विभिन्न कारणों से हो सकती है, जिनमें गतिहीन जीवन शैली, अनुचित आहार और आनुवंशिकी शामिल हैं। हमारे पेट के आसपास विभिन्न प्रकार के वसा जमा होने के कारण पेट की चर्बी को कम करना जटिल हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप टाइप 2 मधुमेह, हृदय संबंधी समस्याएं, स्ट्रोक और फर्टिलिटी को प्रभावित करना आदि समस्याएं हो सकती हैं। इस लेख में हमने पेट की चर्बी संबंधी आवश्यक जानकारी दी है। अत: इसे पूरा पढ़ें।
पेट की चर्बी क्या है?

जब पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है, तब उसे पेट की चर्बी कहा जाता है। इसे मुख्य रूप से दो प्रकारों अर्थात् त्वचीय की चर्बी (subcutaneous fat) और आंत की चर्बी (visceral fat) में विभाजित किया जा सकता है।
त्वचीय की चर्बी (subcutaneous fat) से तात्पर्य त्वचा के ठीक नीचे स्थित वसा से है। यह वह चर्बी है जिसे आप त्वचा को छूकर भी महसूस कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह चर्बी त्वचा के ठीक नीचे स्थित होती है, जिससे देखा जा सकता है। इसके अलावा यह एक सामान्य चर्बी है, जो ठीक या कम हो सकती है।
इसके विपरीत, आंतों की चर्बी (visceral fat) पेट के आंतरिक हिस्से में स्थित होती है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसकी वजह से हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह और स्ट्रोक जैसी बीमारी हो सकती हैं।
पेट की चर्बी को कैसे मापा जाता है?
आमतौर पर, अतिरिक्त चर्बी को केवल CT या MRI स्कैन से मापा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आप एक साधारण टेप से भी पेट की चर्बी को माप सकते हैं। इसके अलावा, शरीर की चर्बी को कमर और कूल्हे के अनुपात के अनुसार मापा जा सकता है। यहां बताया गया है कि इसे कैसे किया जा सकता है।
कमर की परिधि (waist circumference) को मापना
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और अपने शरीर को आराम दें। इसके बाद, अपने पेट के चारों ओर अपने कूल्हे की हड्डियों के ऊपर एक टेप रखें। यह सुनिश्चित करें कि टेप बहुत तंग या ढीला न हो। सामान्य रूप से सांस छोड़ें और माप लें। महिलाओं के लिए कमर की परिधि 35 इंच और पुरुषों के लिए 40 इंच से अधिक होना चिंता का विषय हो सकता है।
कमर-से-कूल्हे का अनुपात (WHR)
अपने कमर और कूल्हे का माप करें और उनके माप को विभाजित करें। महिलाओं के लिए कमर से कूल्हे का अनुपात 0.85 से अधिक और पुरुषों के लिए 0.90 से अधिक होना, पेट की चर्बी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को इंगित कर सकता है।
पेट की चर्बी के संभावित कारण
पेट की चर्बी के विभिन्न कारण हो सकते हैं। इनमें शारीरिक व्यायाम न करना,अस्वास्थ्यकर आहार और अत्यधिक कैलोरी का सेवन करना शामिल हैं। उदाहरण के लिए, शर्करा युक्त पेय, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट से पेट में वसा जमा हो सकती है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल परिवर्तन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन में कमी से पेट की चर्बी हो सकती है। इसके अलावा, आनुवंशिक कारक से भी पेट की चर्बी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, पुराना तनाव (chronic stress) कोर्टिसोल नामक हार्मोन के उत्पादन का कारण बन सकता है, जिसकी वजह से यह समस्या हो सकती है। अपर्याप्त नींद हार्मोन को बाधित कर सकती है। अत्यधिक शराब के सेवन से पेट के आसपास वसा जमा हो सकती है इसके अलावा, कुछ दवाएं पेट की चर्बी सहित वजन बढ़ाने का कारण बन सकती हैं।
महिलाओं में पेट की चर्बीः क्या मोटापा से वे इसका शिकार बन सकती हैं?
मोटापा महिलाओं में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। पेट की चर्बी से गंभीर रोग हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। शरीर की अतिरिक्त वसा, विशेष रूप से पेट के आसपास, ओव्यूलेशन और गर्भधारण के लिए आवश्यक हार्मोनल को असंतुलित कर सकती है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार निम्नलिखित प्रमुख समस्याएं हैं, जो पेट की चर्बी और मोटापे से पीड़ित महिलाओं में देखने को मिल सकती है:
मोटापा अनियमित या पीरियड्स न होने का कारण बन सकता है, जिससे ओव्यूलेशन का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। पुरुष हार्मोन और इंसुलिन प्रतिरोध के बढ़े हुए स्तर अंडे के विकास और निकास को बाधित कर सकते हैं। मोटापा अक्सर PCOS से संबंधित होता है, इससे तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें अनियमित मासिक धर्म, अतिरिक्त एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) और अंडाशय पर छोटी गांठे बन जाती हैं। पेट की चर्बी से ओव्यूलेशन की संभावना कम हो सकती है, जिससे गर्भधारण करना कठिन हो सकता है। अधिक वजन वाली महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, जिससे उनके लिए गर्भ धारण करना मुश्किल हो जाता है। मोटापा को अक्सर विटामिन डी की कमी से जुड़कर देखा जाता है, जो फर्टिलिटी और गर्भावस्था को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, यह गर्भावस्था की विभिन्न जटिलताओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। इनमें गर्भकालीन मधुमेह, प्रीक्लेम्पसिया और गर्भावस्था की अन्य जटिलताएं शामिल हैं।
पेट की चर्बी को कम करने के बारे में डॉक्टर की राय क्या है?

हाकिम भारमल, मास्टर ट्रेनर और प्रतियोगिता तैयारी कोच, फ्रीलांसर, गुजरात बताते हैं, “कार्डियोवैस्कुलर व्यायाम करना चाहिए क्योंकि वे आपको पेट के आसपास अतिरिक्त कैलोरी और वसा को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अच्छी नींद को प्राथमिकता दें और ध्यान तथा व्यायाम जैसी तनाव कम करने के तरीकों का पालन करें। इसके अलावा, अधिक मात्रा में पानी पीएं। हाइड्रेशन हमारे मेटाबॉलिज्म को अनुकूलित करता है, जो पेट की चर्बी कम करने में सहायता करता है।”

डॉ. ज्योति कन्ननगाथ, त्वचा विशेषज्ञ, लेजर स्किन हेयर क्लिनिक, कोयंबटूर, तमिलनाडु बताती हैं, “वसा (विशेष रूप से पेट की चर्बी/वसा) को कम करना एक जटिल प्रक्रिया है। पेट की चर्बी को कम करने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है, इसके लिए समय और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, इसे कम करने के लिए जीवन शैली में परिवर्तन करना भी लाभकारी साबित हो सकता है। इसके अलावा, लिपोसक्शन या क्रायोलिपोलिसिस जैसे उपचार इसे कम करने में मदद कर सकते हैं।”

हरिता अध्वर्यु, Senior Dietician और Diabetes Educator, अहमदाबाद, गुजरात बताती हैं, “दालचीनी, जीरा और लौंग जैसे घरेलू उत्पाद वजन घटाने में सहायक साबित हो सकते हैं। इसके बावजूद, इन पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि वे उचित पोषण और व्यायाम के बिना वसा को कम नहीं कर सकते हैं। अत: अपनी जीवन शैली में बदलाव, नियमित रूप से व्यायाम और डॉक्टर से संपर्क करना लाभकारी साबित हो सकता है।”

डॉ. पी. राममनोहर, निदेशक अमृता सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन आयुर्वेद, कोल्लम, केरल के अनुसार, “आयुर्वेद के अनुसार, मोटापे एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। हालांकि, पेट की चर्बी को कम करने के लिए कोई त्वरित उपाय नहीं हैं अपितु तनाव प्रबंधन, स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और संतुलित आहार का सेवन आदि लाभकारी उपाय साबित हो सकते हैं।” अत: यदि कोई व्यक्ति पेट की चर्बी को कम करना चाहते हैं, तो उसे निरंतर प्रयास करना चाहिए।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि एक गतिहीन जीवन शैली (अर्थात् शारीरिक व्यायाम न करना) पेट की चर्बी के प्रमुख कारणों में से एक है। यह आमतौर पर महिलाओं को प्रभावित कर सकती है, जिससे प्रजनन स्वास्थ्य (reproductive health) संबंधी विभिन्न समस्याएं हो सकती हैं। अत: एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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