मधुमेह रोगियों में UTI पेशाब में उच्च शर्करा की मात्रा की वजह से हो सकता है, जो बैक्टीरिया के विकास का कारण बन सकता है। बार-बार होने वाले संक्रमणों से गुर्दे के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे जटिल संक्रमण या गुर्दे की पुरानी बीमारियां हो सकती हैं। मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए अधिक मात्रा में पानी पीना और चिकित्सक के दिशानिर्देशों का पालन करना लाभकारी हो सकता है।
मधुमेह रोगियों में बार-बार होने वाला UTI गुर्दे के कार्य को कैसे प्रभावित कर सकता है?
मधुमेह रोगियों को बार-बार UTI होने का खतरा अधिक होता है। ऐसा उनके पेशाब में शर्करा की मात्रा में वृद्धि के कारण होता है, जो बैक्टीरिया के पनपने का कारण बन सकता है। हालांकि, बार-बार होने वाले मूत्र संक्रमण से गुर्दे की एक गंभीर बीमारी, पायलोनेफ्राइटिस समेत गुर्दे के गंभीर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा, शर्करा की उच्च मात्रा गुर्दे में रक्त वाहिकाओं को नुकसान (डायबिटिक नेफ़्रोपैथी) पहुंचा सकती है। इसके परिणास्वरूप बार-बार होने वाले UTI और पुरानी गुर्दे की बीमारी (CDC) हो सकती है। मधुमेह संबंधी नेफ्रोपैथी तंत्रिका क्षति के कारण मूत्राशय की शिथिलता की समस्या हो सकती है और आमतौर पर मूत्र प्रतिधारण की भी समस्या हो सकती है।
इसके अलावा, गंभीर मूत्र संक्रमण कभी-कभी तीव्र गुर्दे क्षति (AKI) का कारण बन सकता है, जिसमें गुर्दे अचानक से काम करना बंद कर देते हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इससे पीड़ित रहता है तो इससे गंभीर क्षति हो सकती है और पुरानी गुर्दे की बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है।
मधुमेह रोगियों में गुर्दे की समस्याओं के शुरुआती संकेत क्या हैं?
लक्षणों की सूक्ष्म प्रकृति के कारण अक्सर गुर्दे की समस्याओं का समय रहते पता लगाना मुश्किल हो सकता है। इसके बावजूद संभावित गंभीर जटिलताओं की रोकथाम के लिए उनकी जल्दी पहचान करना महत्वपूर्ण है। गुर्दे के संक्रमण के कुछ शुरुआती संकेतों में पेशाब में प्रोटीन का न होना जैसे संकेत शामिल हैं। ध्यान दें कि इसे सामान्य रूप से देखना संभव नहीं है। अत: पेशाब में प्रोटीन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक चिकित्सक द्वारा पेशाब की जांच कराने की आवश्यकता होती है।
गुर्दे की समस्या से पीड़ित लोग अक्सर एडीमा का अनुभव कर सकते हैं। इससे तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमे गुर्दे अतिरिक्त तरल पदार्थ और सोडियम को फिल्टर नहीं कर पाते हैं। इसके परिणामस्वरूप हाथों, पैरों, टखनों और आंखों के आसपास सूजन हो सकती है।
इसके अलावा, गुर्दे की क्षति वाले लोगों को अक्सर थकान, उच्च रक्तचाप, पेशाब में परिवर्तन, मतली और उल्टी, खुजली, भूख न लगना और किसी भी कार्य पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मधुमेह रोगी UTI का प्रबंधन करते हुए अपने गुर्दे के स्वास्थ्य की रक्षा कैसे कर सकते हैं?

डॉ. कृतिका इंगले, सलाहकार मधुमेह विशेषज्ञ और चिकित्सक, Sugar.fit, सैफी हेल्थकेयर, मुंबई, महाराष्ट्र के अनुसार, यहां पालन करने के लिए कुछ बहुत ही बुनियादी कदम हैं, जो मधुमेह रोगियों की गुर्दे की रक्षा करने में सहायता कर सकते हैं:
- अपने रक्त शर्करा को नियंत्रण में रखना। आप ऐसा स्वस्थ भोजन खाने, कसरत करने और अपने चिकित्सक द्वारा निर्धारित अपनी दवा का सेवन करके कर सकते हैं।
- अपने रक्तचाप को नियंत्रण में रखना। उच्च रक्तचाप आपके गुर्दों पर दबाव डाल सकता है। सामान्य रक्तचाप मान प्राप्त करने का प्रयास करें, आमतौर पर 130/80 के आसपास। आपको दवाओं के लिए अपने डॉक्टर के पर्चे का पालन करना चाहिए।
- समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना चाहिए। कुछ जांच गुर्दे संबंधी समस्या का पता लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, प्रोटीन या खून की जांच/गुर्दे के कार्य की जांच के लिए पेशाब की जांच करना। इस प्रकार हम शुरुआती चरणों में संक्रमण का पता और कुछ मामलों में उनकी रोकथाम में सहायता कर सकते हैं।
- धूम्रपान न करना। यह उस दर को बढ़ा सकता है जिस पर गुर्दे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। अत: धूम्रपान छोड़ने की सलाह सभी को दी जाती है।
- नमक के सेवन पर ध्यान देना। शरीर में नमक का उच्च स्तर रक्तचाप को बढ़ा सकता है। अत: अपने आहार में नमक का सेवन कम करना, कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन करना और ताज़ी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
- हाइड्रेशन आपके गुर्दे को लाभ पहुंचा सकता है। हालांकि, यदि आपके गुर्दे पहले से ही क्षतिग्रस्त हैं, तो आपके चिकित्सक आपको पानी की मात्रा संबंधी विशिष्ट दिशानिर्देश दे सकते हैं।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। नियमित कसरत करना आपके रक्त शर्करा को नियंत्रण में रख सकता है और आपके रक्तचाप को सामान्य (BP < 130/ 80) रख सकता है। अत: कम से कम 30 मिनट तक शारीरिक गतिविधियां करने का प्रयास करना चाहिए। उदाहरण के लिए चलना।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि मधुमेह रोगियों में UTI काफी आम है जैसा कि ऊपर बताया गया है। इससे गुर्दे की गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे कि पुरानी गुर्दे की बीमारी या तीव्र गुर्दे क्षति। रक्त शर्करा और रक्तचाप का प्रबंधन और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने से UTI को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। इस प्रकार गुर्दे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। अत: इस समस्या का जल्दी पता लगाने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक है।
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