पिछले वर्ष में, केंद्र सरकार द्वारा जारी बजट 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य के लिए 88956 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पिछले बजट की घोषणा की तुलना में इस बार 2.71 प्रतिशत की वृद्धि अर्थात् 2350 करोड़ रुपये अधिक आवंटित हुए हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्ध है। इस बजट में अनेक विषय की जानकारी दी गई, जिसमें सिकल सेल एनीमिया भी शामिल है।
बजट के दौरान, वित्त मंत्री ने सिकल सेल एनीमिया को लेकर बताया कि केंद्र सरकार ने साल 2047 तक इस रोग को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस बीमारी से जूझ रहे आदिवासी क्षेत्रों में 40 आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। सरकार इसे पूरी तरह खत्म करने को लेकर अलर्ट मोड में है। चूंकि, पहले भी भारत पोलियो मुक्त बन चुका है, इसलिए सिकल सेल एनीमिया को खत्म करना संभव है। इसके लिए लोगों को इसके प्रति जागरूक करना और इस रोग की समाप्ति के लिए आवश्यक सावधानी बरतना आवश्यक है।
सिकल सेल एनीमिया को जानें
सिकल सेल एनीमिया रक्त से संबंधित एक आनुवांशिक विकार (disorder) है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) या तो टूट जाती हैं या उनके आकार में बदलाव होने लगता है। सिकल का एक अर्थ फसुली (bagging hook, reaping-hook या grasshook) भी होता है। चूंकि, इस रोग में लाल रक्त कोशिकाओं का आकार सिकल जैसा हो जाता है इसलिए इसे सिकल सेल एनीमिया कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, जब लाल रक्त कोशिकाओं के आकार में बदलाव होता है, तब वे नसों को ब्लॉक करने लगती हैं, जिसकी वजह से शरीर तक ऑक्सीजन भी नहीं पहुंच पाता है। इसके अतिरिक्त, शरीर में रक्त प्रवाह सुचारु ढंग से नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, शरीर के अंगों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने लगता है।
Beta hemoglobin chain में Adenine की जगह Thymine आ जाने के कारण यह ग्लूटामिक एसिड (Glutamic Acid) की बजाय वेलिन एमिनो एसिड (Valine Amino Acid) कोड करने लगता है। इसके कारण रक्त कोशिकाओं का आकार बदल जाता है, जिसे सिकल सेल एनीमिया कहा जाता है।
कई लक्षण हो सकते हैं शामिल
सिकल सेल एनीमिया के विभिन्न लक्षण हैं, जिनमें शरीर में छुनछुनी होना या किसी अंग का अचानक सुन्न पड़ जाना, दर्द होना, सूजन होना, हड्डियों और मांसपेशियों में लगातार दर्द होना आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बार-बार खून की कमी होने के कारण चक्कर या थकान भी महसूस हो सकती है। सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित लोगों को बार-बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। सिकल सेल एनीमिया की पुष्टि आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान या जन्म के तुरंत होती है।
चूंकि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवांशिक विकार है इसलिए इसका पूर्ण रूप से इलाज संभव नहीं है लेकिन रक्त जांच के माध्यम से इसका निदान हो सकता है। इसे ऐसे समझें कि अगर माता-पिता दोनों सिकल सेल एनीमिया के कार्यवाहक है अर्थात् उनमें से अगर दोनों में सिकल सेल एनीमिया के जीन हैं, तो उनके बच्चों में भी यह समस्या होने की संभावना होती है। विज्ञान की भाषा में इसे करियर जीन कहा जाता है। यह आमतौर पर तब होता है, जब माता-पिता दोनों सिकल सेल जीन के “वाहक” अर्थात् करियर होते हैं। सिकल सेल एनीमिया के वाहकों को स्वयं इस रोग के बारे में पता नहीं चलता है लेकिन यदि उनका साथी भी वाहक है, तो उनके बच्चे को सिकल सेल रोग हो सकता है।
वर्तमान में चलाए जा रहे कुछ कार्यक्रम
वर्तमान में, भारत सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत (AMB) कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जो 6*6*6 { (Six Target Beneficiaries), (Six Interventions), (Six Institutional Mechanisms) } रणनीति के माध्यम से कार्य करती है। इसके अलावा, एनीमिया को नियंत्रित करने के लिए वीकली आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (WIFS) चलाया जा रहा है, जिसमें आयरन फोलिक एसिड (IFA) टैबलेट और एल्बेंडाज़ोल (Albendazole) के साथ द्विवार्षिक कृमिनाशक दवा (deworming medicine) दी जाती है।
राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार साल 2015 से 2016 के बीच 58.4 प्रतिशत बच्चे और 53 प्रतिशत महिलाएं सिकल सेल एनीमिया विकार से ग्रसित हुए हैं। वहीं, सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की 3 प्रतिशत जनजातीय आबादी सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित है। इसके अतिरिक्त, अन्य 23 प्रतिशत लोग सिकल सेल एनीमिया के वाहक हैं, अर्थात् उनके जीन से यह बीमारी फैल सकती है। साल 2018 में इस बीमारी पर नीतिगत ध्यान देने के बावजूद 1970 के दशक के बाद से यह बीमारी भारत में तेजी से बढ़ रही है।
समाज देता है लोगों का साथ

पटना, बिहार में मां ब्लड बैंक संचालित कर रहे मुकेश हिसारिया बताते हैं, “सिकल सिल एनीमिया एक आनुवांशिक विकार (disorder) है। जब परिवार वालों को अपने बच्चे के इससे पीड़ित होने के बारे में पता चलता है, तब उनके लिए अपने बच्चे का इलाज कराना या खून चढ़ाना मुश्किल हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, अक्सर परिवार वाले से रोगी का साथ छोड़ देते हैं। इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि ऐसी स्थिति में समाज आगे आता है और उनकी मदद करता है।” मुकेश के अनुसार “अगर दो लोगों को सिकल सेल एनीमिया के वाहक होने का पता चलता है, तो उन्हें तुरंत अस्पताल में जाना चाहिए ताकि इसका इलाज समय रहते शुरू किया जा सके।”
देखा जाए, तो सिकल सेल एनीमिया को समाप्त करने का एक बेहतर उपाय प्री-मेरिटल हेल्थ चेकअप भी हो सकता है, जिसमें शादी से पहले कपल्स की स्क्रिनिंग कराना शामिल है। इससे अगली पीढ़ी में इसके होने की संभावना को कम किया जा सकता है। मगर ऐसा आदिवासी या पिछड़े इलाकों में करना एक चुनौती है क्योंकि प्री-मैरिटल हेल्थ चेकअप को लेकर उनकी मानसिकता संकीर्ण है। इसका मुख्य कारण इसे लड़की के कौमार्य (Virginity) की जांच से जोड़कर देखना है। वहीं दूसरी ओर, Bone Marrow या Stem Cell Transplants के जरिए भी सिकल सेल एनीमिया को ठीक किया जा सकता है लेकिन इस प्रक्रिया को बार-बार करना संभव नहीं है।
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