आज के सोशल मीडिया वाले दौर में हर कोई व्यक्ति आधा-अधूरा ज्ञान दे रह है, जिसकी वजह से कुछ मासूम लोग गुमराह हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे स्वास्थ्य संबंधी गलत कदम उठा लेते हैं। यह बात आँखों पर भी लागू होती है, जिनसे संंबंधित काफी सारे मिथक देखने को मिलते हैं। इस लेख में हम आँखों संबंधी 5 मिथकों की वास्तविकता पता लगाने की कोशिश करेंगे। इसलिए इसे पूरा पढ़ें।
मिथक1: पालक का सेवन करने से दृष्टि में सुधार होता है
जी नहीं, पालक का सेवन करने से दृष्टि में सुधार नहीं होता है। यह केवल आँखों को स्वस्थ रख सकती है। इसके अलावा, यह कुछ हद तक आँखों संबंधी जोखिमों को भी कम कर सकती है। पालक में भरपूर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, सोडियम, विटामिन सी और विटामिन ए होते हैं, जो आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, ये आंशिक रूप से आंखों को नुकसान से भी बचा सकते हैं।

अवलोकन पर आधारित अध्ययनों से स्पष्ट है कि आहार लोगों में मोतियाबिंद के विकास को स्थगित करने में मदद कर सकता है। डॉ. नवीन गुप्ता के अनुसार, DNB (नेत्र विज्ञान) ‘आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा’ और ‘दृष्टि में सुधार कर सकता है’ दो अलग-अलग चीज़े हैं। अधिकांश लोग इन्हें एक-समान समझते हैं। यदि आपको ऐसा लगता है कि पालन का सेवन करने से आँख के चश्मे का नंबर कम हो जाएगा, तो आपको इसके बारे में विस्तार से पढ़ने की आवश्यकता है। इसकी तथ्य-जाँच यहाँ पढ़ें।
मिथक 2: सरसों के तेल की मालिश से दृष्टि में सुधार होता है
नहीं, यह आँख से संबंधित अन्य मिथक है। सरसों के तेल की मालिश करने से दृष्टि में सुधार नहीं होता है। मालिश थेरेपी या किसी अन्य तरीके का प्रयोग करके दृष्टि में सुधार करने का कोई तरीका नहीं है। इसके अलावा, Reflexology और acupressure दो क्षेत्र हैं, जिनमें आंखों के स्वास्थ्य के लिए मालिश थेरेपी करना शामिल है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने मालिश से दृष्टि में सुधार होने के दावे किए हैं, लेकिन इसके कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं। डॉ. ब्राह्मी पांडे, MBBS, MS, DNB (Ophthalmology) बताती हैं, “इस दावे या कथन अर्थात् किसी भी प्रकार की पैर की मालिश दृष्टि को बढ़ाती है का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है। एक ओर, अधिकांश नेत्र रोग विशेषज्ञ इससे अनजान हैं और दूसरी ओर, लिखित में कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है। यहाँ इसकी तथ्य जाँच पढ़ें।
मिथक 3: आहार से दृष्टि में सुधार होता है

नहीं, हालांकि आहार आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं, लेकिन इसे बेहतर नहीं बना सकते हैं। अवलोकन संबंधी आंकड़ों का उपयोग करने वाले अध्ययनों ने मनुष्यों में मोतियाबिंद के विकास को बढ़ाने के लिए आहार को लाभकारी माना है। आगे के अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन ए और ई आयु-सम्बन्धित मैक्युलर डिजनरेशन (ARMD) को रोकने में मदद कर सकते हैं, हालांकि हमेशा ऐसा नहीं हो सकता है। रंजनी रमन, Dietitian और Nutrition Therapist बताती हैं, “जो खाद्य पदार्थ दृष्टि के लिए अच्छे होते हैं, वे आम तौर पर वहीं होते हैं जो वयस्कों में आंखों और दृष्टि की कार्यप्रणाली को बनाने में सहायक होते हैं।” यहाँ इसकी तथ्य जाँच पढ़ें।
मिथक 4: करेले का जूस से दृष्टि में सुधार होता है

जी नहीं, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि करेले का जूस पीने से दृष्टि में सुधार होता है। एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग विटामिन ए की कमी से पीड़ित हैं, उन्हें सूखी आंखें या नेत्र दोष (blindness) जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। करेला में बीटा-कैरोटीन विटामिन ए के संश्लेषण के लिए जिम्मेदार है, यह आंखों के लिए एकमात्र लाभ है। डॉ. प्रदीप दहले, नेत्र विशेषज्ञ, MS, DNB के अनुसार ” दृष्टि विशेष (optometrists) या नेत्र रोग विशेषज्ञ (ophthalmologists) दृश्य समस्याओं के इलाज के लिए चश्मा लिखते हैं। ये चश्मे रोगियों को नेत्रगोलक (size of the eyeball) के आकार में शारीरिक अंतर के कारण होने वाली दृश्य समस्याओं के इलाज में सहायक होते हैं। इसलिए, यह सोचना अजीब है कि आप अपनी आँख में सुधार स्वयं कर सकते हैं। यहाँ इसकी तथ्य जाँच पढ़ें।
मिथक 5: मानव पेशाब (human urine) पीने से दृष्टि में सुधार होता है

बिल्कुल नहीं। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मानव पेशाब (human urine) पीने से दृष्टि में सुधार होता है। इस विषय पर हमने डॉ. अन्नुसुइया गोहिल, आयुर्वेद विशेषज्ञ से भी बात की और उन्होंने बताया कि “मैंने ऐसा कुछ नहीं सुना है”। इस दावे या कथन की पुष्टि आर्युवेद या विज्ञान द्वारा नहीं की गई है। यहां इसकी तथ्य जाँच पढ़ें।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि अच्छी दृष्टि को बनाए रखना, दृष्टि में सुधार करने से अलग है। ऐसा आहार के माध्यम से किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त मिथकों से आँख की दृष्टि में सुधार नहीं किया जा सकता है। इसलिए, इंटरनेट या सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी पर आँख-बंदकर भरोसा न करें। इस स्थिति में उस जानकारी की पुष्टि किसी विशेषज्ञ से करें।
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