गर्मियां आते ही त्वचा संबंधित समस्याएं बढ़ जाती हैं। तपती धूप और पानी की कमी के कारण त्वचा रुखी होने लगती है। कई बार धूप में अधिक समय बिताने से भी त्वचा पर काले धब्बे भी निकल आते हैं। ऐसे में जरूरी है कि गर्मियों में त्वचा की देखभाल की जाए, ताकि संभावित जोखिमों को कम किया जा सके।
अधिकांश लोग त्वचा संबंधित मिथकों पर विश्वास कर लेते हैं जो उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में इन मिथकों की वास्तविकता को जानना महत्वपूर्ण है।
मिथक 1ः कच्ची हरी मिर्च खाने से दाग-धब्बे दूर होते हैं और त्वचा में चमक आती है

वास्तविकताः डॉ. एकांश शेखर, त्वचा विशेषज्ञ, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, ट्राइकोलॉजिस्ट और एस्थेटिक मेडिसिन कंसल्टेंट, लखनऊ बताते हैं, “हरी मिर्च में विटामिन सी होता है, जो त्वचा के लिए अच्छा है लेकिन ये दाग-धब्बों को ठीक नहीं कर सकता है। मुंहासे और त्वचा के दाग-धब्बे अक्सर हार्मोन में बदलाव, बैक्टीरिया, बंद रोमछिद्रों और सूजन के कारण होते हैं। मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को बेहतर बना सकते हैं लेकिन इससे दाग-धब्बे ठीक नहीं होते हैं। अच्छी त्वचा के लिए आवश्यक है कि आप त्वचा की देखभाल सही तरीके से करें, संतुलित आहार करें और मुंहासों का इलाज कराएं।”
मिथक 2ः शैम्पू, नींबू, टूथपेस्ट और ENO त्वचा को स्थायी रूप से गोरा बनाते हैं

वास्तविकताः डॉ. इराम काजी, त्वचा विशेषज्ञ, लाइफ मेडिकल सेंटर एंड क्लिनिक, संयुक्त अरब अमीरात बताती हैं, “टूथपेस्ट त्वचा पर इस्तेमाल के लिए नहीं बल्कि दांतों की सफाई के लिए है। इसके मजबूत तत्व जलन और लालिमा उत्पन्न कर सकते हैं। अत: त्वचा के उपचार के लिए टूथपेस्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे स्थिति और बदतर हो सकती है। इसके साथ ही नींबू की तासीर अम्लीय होती है, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इससे लालिमा, जलन और सूखापन हो सकता है। वहीं, शैम्पू स्कैल्प और बालों के लिए डिजाइन किया जाता है, चेहरे या त्वचा के लिए नहीं। कई शैंपू में सर्फेक्टेंट होते हैं, जो त्वचा से उसके प्राकृतिक तेलों को छीन सकते हैं, जिससे सूखापन, जलन और एलर्जी भी हो सकती है। नियमित रूप से त्वचा पर शैम्पू का प्रयोग करने से इसकी सुरक्षात्मक परत क्षतिग्रस्त हो सकती है और संवेदनशीलता उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा बेकिंग सोडा की प्रकृति क्षारीय होती है, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकती है।”
मिथक 3ः मुलेठी और शहद का फेस मास्क त्वचा की रंगत को ठीक करता है

वास्तविकताः डॉ. एकांश शेखर, त्वचा विशेषज्ञ, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, ट्राइकोलॉजिस्ट और एस्थेटिक मेडिसिन कंसल्टेंट, लखनऊ बताते हैं, “मुलेठी और शहद का प्रयोग त्वचा पर पिगमेंटेशन अर्थात् दाग-धब्बे कम करने के लिए किया जाता है। मुलेठी में ‘ग्लैब्रिडिन’ नामक तत्व होता है, जो त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है। वहीं, शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र है, जो त्वचा की नमी को बनाए रखता है। इन दोनों चीजों के नियमित इस्तेमाल से त्वचा के काले धब्बे और असमान रंगत में सुधार हो सकता है। इसके बावजूद, इसका असर धीरे-धीरे दिखता है। पिगमेंटेशन कई वजहों से हो सकता है, जैसे सूरज की रोशनी या आनुवंशिक। अत: धैर्य रखना और नियमित रूप से इस्तेमाल करना ज़रूरी है। अगर पिगमेंटेशन अधिक है तो त्वचा विशेषज्ञ से मिले और सही इलाज कराएं।”
मिथक 4ः चुकंदर, कॉफी और आटे का मिश्रण 20 मिनट में त्वचा को चमकदार बनाता है

वास्तविकताः डॉ. राशी सोनी, सह-संस्थापक और कंसल्टिंग डर्मेटोलॉजिस्ट, राशी अस्पताल, मुंबई बताती हैं, “अक्सर हम देखते हैं कि चुकंदर जैसे प्राकृतिक चीजों का प्रयोग सभी प्रकार की त्वचा समस्या के इलाज में किया जाता है लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। चुकंदर में प्राकृतिक रंग होता है, जो त्वचा पर हल्का गुलाबी रंग या थोड़ी चमक ला सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यह दाग-धब्बे या सफेद धब्बों का इलाज कर सकता है। ऐसी समस्याएं काफी जटिल होती हैं जिनके लिए त्वचा विशेषज्ञ मिलने की आवश्यकता होती है।”
मिथक 5ः अखरोट खाने से रूखी त्वचा ठीक होती है

वास्तविकताः डॉ. एकांश शेखर, त्वचा विशेषज्ञ, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, ट्राइकोलॉजिस्ट और एस्थेटिक मेडिसिन कंसल्टेंट, लखनऊ बताते हैं, “अखरोट सीधे रूखी त्वचा को ठीक नहीं करता है लेकिन यह आपकी त्वचा को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। अखरोट में हेल्दी फैट विशेषकर ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो त्वचा की नमी बनाए रखने और उसकी रक्षा करने में मदद करता है। अत: अखरोट पर आश्रित रहना उचित नहीं है। अगर आपकी त्वचा रूखी है, तो आपको अच्छा मॉइस्चराइज़र लगाना, खूब पानी पीना और हल्के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना जरूरी है। रोज़ आहार में एक मुट्ठी अखरोट शामिल करना लाभकारी है, जो समय के साथ आपकी त्वचा को चमकदार बना सकता है।”
निष्कर्ष
त्वचा से संबंधित मिथक समाज में प्रचलित हैं, जो अक्सर गलत धारणाओं और असत्य तथ्यों पर आधारित होते हैं। यह मिथक त्वचा की देखभाल में भ्रम पैदा करते हैं और सही जानकारी के अभाव में लोग गलत उत्पादों और उपचारों का प्रयोग करते हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम त्वचा से संबंधित मिथकों की पुष्टि त्वचा विशेषज्ञ से कराएं।
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