क्या आप यह भी सोच रहे हैं कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में पीठ के बल सोने की सलाह क्यों नहीं दी जाती है? इस दुनिया में एक नई ज़िदगी को लाना पूरी तरह से आनंददायक है, लेकिन इसके साथ ही इसमें कुछ परेशानियाँ भी शामिल होती हैं। इनमें से एक यह है कि गर्भवती महिला जिस तरह से सोना चाहती हैं वह उस तरह से सो नहीं पा रही है। अगर हम पीठ के बल सोने की बात करें तो इसकी वजह से वेना कावा, एक नस पर दबाव पड़ता है। इससे गर्भ में बच्चे का रक्त प्रवाह कम हो सकता है जिससे प्रीक्लेम्पसिया, भ्रूण के खराब होने और कम ऑक्सीजन की आपूर्ति जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। यहाँ हम विस्तार से जाँच करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान पीठ के बल लेटना/सोना जोखिमभरा क्यों हो सकता है:
क्या गर्भावस्था के दौरान पेट के बल सोना सुरक्षित है?

गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में, पेट के बल सोना स्वीकार्य है, लेकिन अंततः सोने के तरीके को बदलने की आवश्यकता होती है। अधिकांश गर्भवती महिलाओं में पाया गया है कि जब उनका गर्भ दिखाई देने लगता है तब उनके लिए पेट के बल लेना काफी तकलीफदेह होता है। डॉ. चार्मी शाह, MS, OBGYN, और लैप्रोस्कोपिक सर्जन बताती हैं, “यदि किसी गर्भवती महिला को अपने पेट के बल सोना है तो वह तकिए का इस्तेमाल कर सकती है। इससे उसके कूल्हे और पेट को संतुलित करने में मदद मिलती है। यह आपको वेना कावा पर तनाव को रोकने में मदद करता है।” इसके अलावा, वेना कावा पर दबाव डालना काफी खतरनाक है।
अपनी पीठ या पेट के बल उठने का क्या परिणाम हो सकता है?
यदि कोई गर्भवती महिला कभी-कभी अपनी पीठ के बल उठती या रात भर अपनी पीठ के बल लेटती है तो उसे परेशान नहीं होना चाहिए। यदि अजन्मे बच्चे को वास्तव में पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने का खतरा है, तो इसका संकेत गर्भवती महिला का शरीर देता है। इसके अलावा उन्हें गर्भ में मौजूद शिशु से पहले मतली और सांस की तकलीफ का अनुभव हो सकता है। यदि यह पैटर्न बना रहता है और अधिक बार होता है, तो वे अपने साथी से इस पर ध्यान देने के लिए कह सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि वे रात को जागें और गर्भवती महिला को पीठ के बल लेटते हुए पाएं तो उस स्थिति में वे उस महिला को बाईं ओर धकेल सकता है।
गर्भावस्था के दौरान पीठ के बल सोने के दुष्प्रभाव क्या हैं?
गर्भावस्था के दौरान कई कारणों से पीठ के बल सोने से सावधान रहें। निम्नलिखित तर्क दर्शाते हैं कि गर्भावस्था के दौरान पीठ के बल लेटने से बचना कितना महत्वपूर्ण है। पीठ के बल न सोने से गर्भ में मौजूज बच्चे के स्वास्थ्य और मां के आराम को प्राथमिकता मिलेगी:
- सुपाइन हाइपोटेंसिव सिंड्रोमः गर्भाशय और विकासशील भ्रूण का वजन निम्न वेना कैवा को निचोड़ सकता है। यह तब होता है जब एक गर्भवती महिला अपनी पीठ के बल लेटती है। डॉ. शाह के अनुसार, “यह हृदय में रक्त प्रवाह को कम करके रक्तचाप को कम करता है। इसकी वजह से सांस फूलना, सिरदर्द और बेहोशी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।”
- मृत जन्म की अधिक संभावनाः यदि कोई महिला तीसरी तिमाही के दौरान अपनी पीठ के बल सोती है तो उसमें मृत जन्म की अधिक संभावना हो सकती है। डॉ. शाह बताती हैं “इस तंत्र की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। ऐसा माना जाता है कि ऑक्सीजन वितरण में कमी और भ्रूण में कम रक्त प्रवाह मृत जन्म (Stillbirth) के कारण हो सकते हैं।” इस विषय पर एक अध्ययन 2019 में किया गया था, जिसमें 8,706 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था। उन्होंने पहली तिमाही के दौरान और तीसरी तिमाही की शुरुआत से संबंधित कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने अपनी सोने की स्थिति के बारे में प्रश्नावली भरी। शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चे या तो गर्भावस्था की उम्र के लिए बहुत छोटे थे या उन्हें कोई न कोई समस्या थी।
- असुविधाजनक: चूंकि, गर्भाशय और भ्रूण अपने अतिरिक्त वजन के साथ आंतरिक अंगों और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालते हैं, इसलिए गर्भावस्था के दौरान पीठ के बल सोना असुविधाजनक हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप पीठ दर्द, श्रोणि दबाव आदि समस्याएँ हो सकती हैं।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि माँ और अजन्मे बच्चे के लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बन हुआ है। ये सभी स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ गर्भावस्था के दौरान, विशेष रूप से तीसरी तिमाही में, पीठ के बल आराम करने से बचने की सलाह का समर्थन करती हैं। यह मुद्रा वेना कावा पर अनुचित दबाव डाल सकती है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है और प्रीक्लेम्पसिया, भ्रूण के धीमे विकास और अपर्याप्त ऑक्सीजन वितरण जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं के लिए पीठ के बल सोने से गंभीर खतरे होते हैं, इसलिए सुरक्षित सोने की स्थिति बेहतर होती है। अत: आप कैसे सो रहे हैं, इस पर नज़र रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
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