35 वर्षीय हरि (बदला हुआ नाम) का जन्म एक महिला के रूप में हुआ था, लेकिन उन्हें हमेशा लगता था कि उनका शरीर उनकी पहचान से मेल नहीं खाता। इसी साल अप्रैल में हरि ने लिंग परिवर्तन ऑपरेशन (GRS) कराने का फैसला किया। इसके तहत उन्होंने कोयंबटूर के एक अस्पताल में पुरुष जैसी छाती बनाने के लिए ब्रेस्ट हटाने की सर्जरी कराई। ऑटो रिक्शा चलाने वाले हरि ने इस सर्जरी पर 1.10 लाख रुपये खर्च किए और वे इसके नतीजे से काफी संतुष्ट हैं। हरि बताते हैं, “मैं अपने स्तनों की वजह से सहज महसूस नहीं करता था। इसलिए मैंने पैसे बचाए और अस्पताल की गुणवत्ता, सुविधाओं और डॉक्टरों की विशेषज्ञता को देखते हुए कोयंबटूर के इस अस्पताल को चुना।” आर्थिक परेशानियों और लिंग निर्माण (फैलोप्लास्टी) की जटिल प्रक्रिया के कारण उन्होंने वह सर्जरी नहीं कराई।
हरि के अनुसार उन्होंने अपने शहर बेंगलुरु में कोई ऐसा अस्पताल नहीं पाया जिस पर उन्हें भरोसा हो। वे बताते हैं, “बेंगलुरु में ऐसे अस्पताल बहुत कम हैं। गुजरात में भी कुछ विकल्प थे, लेकिन वहां की स्वास्थ्य सेवाओं, साफ-सफाई और डॉक्टरों की विशेषज्ञता को लेकर मुझे भरोसा नहीं था। वहीं, कोयंबटूर का अस्पताल ही ऐसा था, जहां अच्छी गुणवत्ता के साथ मुझे उचित कीमत भी मिली।”
सर्जरी और इससे संबंधित जटिलताएं
लिंग परिवर्तन ऑपरेशन (GRS) उन लोगों के लिए किया जाता है, जो जन्म के समय तय किए गए लिंग से अलग अपना लिंग पहचान महसूस करते हैं। इसे सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) भी कहा जाता है। भारत में यह सर्जरी कानूनी रूप से मान्य है।
यह एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति की जरूरत के अनुसार कई तरह की सर्जरी और उपचार शामिल हो सकते हैं, जैसे—पुरुष से महिला (Male to Female) परिवर्तन के लिए: वैजिनोप्लास्टी, ब्रेस्ट ऑगमेंटेशन (स्तन प्रत्यारोपण), चेहरे को अधिक स्त्रैण बनाने की सर्जरी, गले के उभरे हिस्से (एडम्स एप्पल) को छोटा करने की सर्जरी, आवाज बदलने की सर्जरी आदि। महिला से पुरुष (Female to Male) परिवर्तन के लिए: फैलोप्लास्टी, मेटोइडियोप्लास्टी, छाती की सर्जरी (टॉप सर्जरी), मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) को लंबा करने की प्रक्रिया आदि।
इनके अलावा हार्मोन थेरेपी, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाएं भी उपचार का हिस्सा होती हैं। यह उपचार काफी महंगा हो सकता है। भारत में लिंग परिवर्तन ऑपरेशन का खर्च सर्जरी और हार्मोन थेरेपी सहित करीब 1.5 लाख से 9 लाख रुपये तक हो सकता है। यह लागत अस्पताल और सर्जरी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है।
भारत में बढ़ रही है लिंग परिवर्तन ऑपरेशन कराने वालों की संख्या
पिछले कुछ वर्षों में भारत में लिंग परिवर्तन ऑपरेशन कराने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी है। यह समाज की बदलती सोच और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच का संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि अब जेंडर विविधता और ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों को पहले की तुलना में अधिक स्वीकार किया जा रहा है। बढ़ती जागरूकता और सामाजिक स्वीकृति के कारण अधिक लोग अपने लिंग पहचान के अनुरूप शारीरिक बदलाव के लिए चिकित्सकीय सहायता ले रहे हैं। साथ ही, कानूनों और स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधारों से जेंडर-अफर्मेशन सर्जरी पहले की तुलना में अधिक लोगों के लिए सुलभ और किफायती होती जा रही है।
राजस्थान और महाराष्ट्र की राज्य सरकारें लिंग परिवर्तन ऑपरेशन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही हैं। वहीं, तमिलनाडु ने ट्रांसजेंडर लोगों के लिए तीन मल्टी-स्पेशियलिटी क्लीनिक स्थापित किए हैं, जहां नि:शुल्क लिंग परिवर्तन ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। केरल सरकार भी इस प्रक्रिया के लिए आर्थिक सहायता देती है।
द हिंदू में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मदुरै के गवर्नमेंट राजाजी हॉस्पिटल के ट्रांसजेंडर मल्टी-स्पेशियलिटी क्लीनिक में जनवरी 2022 से जनवरी 2023 के बीच 105 जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी की गईं।
समस्या कहां है?
कानूनी मान्यता, बढ़ती जागरूकता और समाज की बदलती सोच के बावजूद यह आज भी आम बात नहीं है। साल 2021 में 28 वर्षीय ट्रांसवुमन अनन्या कुमारी एलेक्स ने एक निजी क्लीनिक में कराई गई कथित रूप से असफल जेंडर-अफर्मेशन सर्जरी के बाद आत्महत्या कर ली थी।
लिंग परिवर्तन ऑपरेशन कराने वाले अधिकांश लोग एक कमजोर और संवेदनशील वर्ग से आते हैं। इनमें से कई लोगों, विशेषकर ट्रांसजेंडर लोगों को परिवार का सहयोग नहीं मिलता है। कई लोगों के पास सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी नहीं होते। ऐसे में वे कम सुविधाओं और अनुभवहीन स्टाफ वाले छोटे क्लीनिकों में सर्जरी कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ये क्लीनिक अपनी पहचान के अनुरूप जीवन जीने की इच्छा रखने वाले लोगों को आसानी से आकर्षित कर लेते हैं।

डॉ. राजेंद्र एस. गुज्जलानावर, एचओडी एवं सीनियर कंसल्टेंट, प्लास्टिक सर्जरी, सकरा वर्ल्ड हॉस्पिटल, बेंगलुरु, बताते हैं, “हां, कई लोग जल्दबाजी में होते हैं और बड़े अस्पतालों का खर्च नहीं उठा पाते हैं। इसलिए वे छोटे क्लीनिकों में सर्जरी करा लेते हैं। बाद में कई मरीज हमारे पास जटिलताओं के साथ आते हैं। हमें ऐसे मामलों में बाहर निकल आए सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट को ठीक करने के लिए दोबारा सर्जरी करनी पड़ती है। इसके अलावा, पेशाब का रिसाव (यूरिनरी लीकेज) मुख्य समस्या है।”
आज ट्रांसपर्सन शाइना अपनी सर्जरी से खुश हैं, लेकिन 10 साल पहले जब उन्होंने बेंगलुरु के एक छोटे क्लीनिक में ब्रेस्ट ऑगमेंटेशन और वैजिनोप्लास्टी कराई थी, तब उनका अनुभव बेहद दर्दनाक था।
शाइना बताती हैं, “मुझे असहनीय दर्द हो रहा था। लगातार खून बह रहा था। मैं हर समय रोती रहती थी। करीब 20 दिन बाद मेरी गुरु मुझे दूसरे क्लीनिक ले गईं, तब जाकर दर्द बंद हुआ।” शाइना ने इस सर्जरी पर लगभग 80 हजार रुपये खर्च किए थे।
शाइना के अनुसार उन्होंने ऐसे कई लोगों को देखा है, जिन्हें इससे भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। “कुछ लोग पेशाब तक नहीं कर पाते थे। कई लोगों को गंभीर संक्रमण हो गया। मैं एक ऐसी महिला को जानती थी, जिसने सिर्फ टॉप सर्जरी कराई थी। उसके स्तन में संक्रमण हो गया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।” यह भी ध्यान देने वाली चीज़ है कि ट्रांसजेंडर समुदाय में कई बार स्वीकार्यता और पहचान पाने के लिए लिंग परिवर्तन ऑपरेशन कराने का काफी सामाजिक दबाव होता है।

डॉ. मोहन केशवमूर्ति, सीनियर डायरेक्टर – यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी, यूरो-गायनेकोलॉजी, एंड्रोलॉजी, ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पिटल, बेंगलुरु, बताते हैं, “अगर पूरी प्रक्रिया सही तरीके से की जाए तो इसमें लगभग 6 से 18 महीने लग सकते हैं और यह 2-3 चरणों में पूरी होती है। इन सर्जरी से जुड़े सामाजिक, धार्मिक और कानूनी पहलू भी होते हैं। इसलिए इसमें कई विशेषज्ञों की टीम की जरूरत पड़ती है। इस प्रक्रिया में मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा), कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स) और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी जैसे जटिल कार्य शामिल होते हैं।”
अब तक 25 GRS कर चुके डॉ. केशवमूर्ति बतातें हैं कि आर्थिक तंगी भी एक बड़ी बाधा है। “अक्सर इन लोगों को परिवार का सहयोग नहीं मिलता। कई बार सिर्फ बड़ी बहन ही छोटे भाई या बहन का साथ देती है।” ट्रांसजेंडर लोगों में कई लोग अपने गुरु या फाइनेंसर से कर्ज लेकर सर्जरी कराते हैं और गुरु गारंटर की भूमिका निभाते हैं।
हालांकि भारत में सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी कानूनी है, लेकिन कानूनी और चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण देश में बहुत कम अस्पताल और डॉक्टर यह सर्जरी करते हैं।
डॉ. गुज्जलानावर, जो इंडियन प्रोफेशनल एसोसिएशन फॉर ट्रांसजेंडर हेल्थ (IPATH) के सदस्य हैं, बताते हैं, “इस प्रक्रिया में काफी दस्तावेजी काम होता है और कुछ मामलों में माता-पिता की सहमति भी लेनी पड़ती है। इस संबंध में कुछ कानूनी मामले भी चल रहे हैं।”
वे आगे बताते हैं, “सर्जरी कराने से पहले अस्पताल का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए और पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझना चाहिए। सर्जरी से पहले मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग कराना जरूरी है। बिना पूरी जानकारी के जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए।”
शाइना भी दूसरों को यही सलाह देती हैं। “सिर्फ इसलिए सर्जरी मत कराइए क्योंकि दूसरे लोग ऐसा चाहते हैं। मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरी GRS सफल रही। लेकिन अगर सर्जरी सफल न हो तो? फैसला लेने से पहले इसके शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रभावों के बारे में अच्छी तरह सोच लेना चाहिए।”
(पहचान गोपनीय रखने के लिए कुछ नाम बदले गए हैं।)
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at factcheck@thip.in. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.


