भारत को युवाओं का देश कहा जाता है और कहे भी क्यों ना। यहां के युवाओं में इतनी अदम्य क्षमता है कि वे समाज और लोगों की परेशानियां दूर करने के लिए हमेशा तत्पर दिखाई देते हैं। कोरोना काल ने यदि एक तरफ कई अवसरों को हमसे छीना है, तो वहीं कई नएअवसर प्रदान भी किए हैं। कोरोना के समय जहाँ घटती सांसों ने ऑक्सीजन की महत्ता से अवगत करा दिया वहीँ महंगे इलाज का बोझ न उठा पाने की असमर्थता ने रास्ता खोला एक ऐसी खोज का जो लोगों की जरुरत पूरे कर सके लेकिन किफायत दर पर। इस बीच ऐसे कई प्रयोग भी हुए जिसने लोगों को राहत पहुंचाने का काम किया। इसी कड़ी में ओड़िसा के रहने वाले एक युवा का नाम भी शामिल है।
स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर हम सब एक पल को सहम जाते हैं क्योंकि अधिकांश मेडिकल जाँच में ब्लड टेस्ट की जरुरत होती है, जिसके लिए खून निकालना पड़ता है मगर एक पल सोचिए अगर ये जांच बिना दर्द, बिना खून निकाले हो जाए तो कितना आसान होगा। इसी तकलीफ को ध्यान में रखते हुए ओडिशा के पार्थ ने बनाया है, एक अनोखा उपकरण।
पलक झपकते मिलेगी सारी जानकारी


भुवनेश्वर, ओड़िसा के रहने वाले एक युवा ने ऑक्सीजन, हिमोग्लोबिन, ब्लड शुगर और बिलीरुबिन के स्तर को मापने के लिए एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जिससे घर बैठे बेहद कम खर्च में 10-20 सेकंड में इससे संबंधित सारी जानकारी फोन पर मिल जाएगी। आपको केवल अपनी अनामिका उंगली को उस उपकरण (device) पर रखना है और सारी जानकारी आपके सामने होगी।
इस उपकरण के अविष्कारक पार्थ बताते हैं, “इसकी कीमत केवल 30 रुपये है, जबकि पारंपरिक तौर पर हीमोग्लोबिन और बिलीरुबिन परीक्षणों की लागत 200 रुपये से 300 रुपये के बीच होती है। 200-300 रुपयों की तुलना में 30 रुपये बेहद कम है, जिस कारण गावों में और आर्थिक रूप से विपन्न लोगों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण आसान हो पायेगा।”
पार्थ के अनुसार इस उपकरण को सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से प्रमाणित किया जा चुका है एवं इसकी सटीकता दर 95 प्रतिशत से अधिक है। इसे भुवनेश्वर स्थित हेल्थकेयर स्टार्टअप EzeRx द्वारा बनाया गया है और इसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा सहयोग प्राप्त है।
गांवों तक पहुंचे ये पहल
पार्थ बताते हैं, “हमारी आबादी का लगभग 75 प्रतिशत ग्रामीण भारत से है। जहां लोग Prevention is better than cure नहीं बल्कि cure अर्थात उपचार को अधिक महत्व देते हैं। हालांकि लोगों को ये समझना होगा कि यदि हम किसी चीज़ का सुरक्षित निवारण कर रहे हैं, तो हम उसके गंभीर परिणामों से बच सकते हैं।”
पार्थ चाहते हैं कि इस उपकरण की पहुंच गांवों तक भी हो ताकि लोग इसके इस्तेमाल के प्रति जागरुक हो सके क्योंकि गांवों में बुनियादी स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं नदारद होती हैं। साथ ही उनका अगला कदम इस उपकरण को बाजार में लाने का भी है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें।
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