जैसे-जैसे भारत में गर्मी का तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे फंगल संक्रमण के मामले भी बढ़ जाते हैं।इसकी वजह से लोगों को खुजली होने के साथ-साथ लाल चकत्ते जैसी समस्याएं भी होती हैं। इसके परिमाणस्वरूप वे डॉक्टर के पास जाते हैं। अत: यह जानना महत्वपूर्ण है कि गर्मी में फंगल संक्रमण क्यों होता है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है। इस लेख में हमने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।
गर्म और उमस भरे मौसम में फंगल संक्रमण अधिक क्यों होता है?

डॉ. एकांश शेखर, त्वचा विशेषज्ञ, कॉस्मेटोलॉजिस्ट, ट्राइकोलॉजिस्ट और एस्थेटिक मेडिसिन कंसल्टेंट, लखनऊ बताते हैं “फंगल, मुख्य रूप से त्वचा में संक्रमण करते हैं, गर्म और उमस भरे मौसम में बढ़ते हैं। गर्मी के मौसम में गर्माहट या उमस (तटीय इलाकों और देश के मध्य भागों में) भी होती है। जब पसीना लंबे समय तक त्वचा पर रहता है, तब यह फंगस के बढ़ने का कारण बन सकता है।”
गर्मियों में फंगल संक्रमण के मुख्य कारणों में निम्नलिखित हैं:
- पसीना आना: अत्यधिक पसीना गीले सिलवटें (damp folds) को गीला कर देता है, विशेषकर अंडरआर्म्स, स्तन, ग्रोइन और पैरों के बीच।
- कसी हुई या गैर-हवादार कपड़े: कसी हुई या सिंथेटिक कपड़े पसीने और गर्मी को फंसा लेते हैं। खराब स्वच्छता, जैसे गंदे कपड़े पहनना, नहाने के बाद खुद को ठीक से सुखाना या गीले कपड़े पहनना, फंगस के विकास को बढ़ावा देता है।
- साझा स्थान: स्विमिंग पूल, जिम, या तौलिए तथा कपड़े साझा करने से फंगल संक्रमण आसानी से फैल सकता है।
बच्चे, मधुमेह से पीड़ित लोग और जिनकी रोग प्रतिकारक क्षमता कमजोर है वे इस संक्रमण के प्रति अति-संवेदनशील हैं।
गर्मी में होने वाले मुख्य फंगल संक्रमण
गर्मी का मौसम फंगल संक्रमण के बढ़ने का मुख्य कारण है। यहां कुछ त्वचा की समस्याओं की सूची दी गई है, जो इस मौसम में बढ़ सकती हैं:
- रिंगवर्म (टिनिया): यह किसी कीड़े के कारण नहीं, बल्कि एक फंगस की वजह से होता है। इसके लक्षणों में लाल, गोल, खुजली वाली चकत्ते होना शामिल हैं, जो लाइलाज रहने पर फैल सकते हैं।
- एथलीट फुट (टिनिया पेडिस): यह उन लोगों में आम होता है जो लंबे समय तक जूते पहनते हैं या साझा शावर का प्रयोग करते हैं। इसमें अंगुलियों के बीच खुजली और छिलने वाली त्वचा होती है।
- जॉक इच (टिनिया क्रूरिस): यह जांघ के निचले हिस्से में होता है, विशेषकर पुरुषों में। इसमें लाल, खुजली वाले धब्बे होते हैं और खरोंचने से फैल सकते हैं।
- नाखूनों का फंगल संक्रमण (Fungal Nail Infections): नाखून मोटे, रंगहीन या भंगुर हो जाते हैं। इन संक्रमणों का इलाज होने में समय लगता है।
- कैंडिडियासिस (बैक्टीरिया संक्रमण): यह कैंडिड फंगस की वजह से होता है और यह गीले क्षेत्रों जैसे मुंह, कांख, कमर और स्तनों के नीचे हो सकता है। इसके लक्षणों में लाला, खुजली और सफेद स्राव शामिल हैं।
फंगल संक्रमण से बचने के लिए आसान आदतें
डॉ. एकांश बताते हैं, “अच्छी खबर यह है कि आप कुछ आसान आदतों से अधिकांश फंगल संक्रमणों से बचा जा सकता है, जैसे कि:”
- सूखा रखें: नहाने के बाद अपने शरीर को अच्छे से सुखाएं, विशेषकर पैरों के अंगूठों, बगल, कमर के पास और अन्य त्वचा के तहों को।
- हवादार कपड़े पहनें: सिंथेटिक कपड़ों के बजाय सूती कपड़े पहनें और गर्मी में टाइट कपड़े पहनने से बचें।
- कपड़े बदलें: पसीने से भीगे हुए कपड़ों को लंबे समय तक न पहनें। कसरत के बाद या बारिश में भीगने के बाद कपड़े तुरंत बदलें।
- एंटीफंगल पाउडर लगाएं: ये पाउडर पसीना सोखने में मदद करते हैं और फंगल वृद्धि को रोकते हैं, विशेषकर त्वचा की सतहों, बगल और पैरों के अंगूठों जैसे उच्च जोखिम वाले स्थानों पर।
- व्यक्तिगत वस्त्रों का साझा न करें: तौलिए, कपड़े, जूते और कंघे साझा न करें।
- जूते सूखे रखें: जूतों को हवा में सूखने दें और हर दिन एक ही जोड़ी न पहनें।
- सार्वजनिक स्थानों में सफाई रखें: स्विमिंग पूल, जिम या हॉस्टल जैसे स्थानों में चप्पल पहनें, नंगे पैर न चलें, और प्रयोग करने के बाद उन्हें साफ करें।
अगर आपके शरीर में कोई चकत्ते हैं जो कई दिनों तक ठीक नहीं हो रहे हैं या बढ़ रहे हैं, तो खुद से दवा न लें, बल्कि डॉक्टर से सलाह लें। अधिकतर ओवर-द-काउंटर क्रीम अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन ये संक्रमण का पूरी तरह से इलाज नहीं कर सकती हैं।
निष्कर्ष
फंगल संक्रमण हल्के लग सकते हैं, लेकिन ये समस्या उत्पन्न कर सकते हैं। इसके अलावा यह अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं। भारत के गर्म और नम मौसम में, सतर्क रहना, साफ-सफाई रखना और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाना ज़रूरी है। कुछ आसान आदतें आपकी त्वचा को स्वस्थ और संक्रमण से बचने में मदद कर सकती हैं।
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