मासिक धर्म (Periods) सभी महिलाओं के जीवन का एक अभिन्न होता है, जिसमें उन्हें असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, गर्भवती होने या बच्चे को जन्म देने के बाद उनके शरीर में हार्मोन परिवर्तन होते हैं। इसके परिणामस्वरूप, उनके मन में काफी सारे प्रश्न आते हैं। इनमें बच्चे को जन्म देने के बाद (delivery) मासिक धर्म की समय-सीमा का प्रश्न भी शामिल है।
इस लेख में हमने उपरोक्त प्रश्न का उत्तर जानने का प्रयास किया है। अत: इसे पूरा पढ़ना चाहिए।
मासिक धर्म (Periods) की समय-सीमा को प्रभावित करने वाले कारक
बच्चे के जन्म के बाद पीरियड्स भिन्न कारकों से प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
- स्तनपान: यदि कोई महिला स्तनपान करा रही हैं, तो उसमें मासिक धर्म के देर से शुरू होने की संभावना होती है। इसके अतिरिक्त, अक्सर बच्चे के जन्म के 6 महीने या उससे अधिक समय बाद माहवारी शुरू हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्तनपान के दौरान प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो ओव्यूलेशन (अंडे का निकलना) को रोकता है।
- मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle): यदि किसी महिला के मासिक धर्म चक्र (Periods) प्रसव से पहले अनियमित थे, तो वे प्रसव के बाद भी वैसे ही रह सकते हैं। देखा जाए, तो प्रसव के बाद का मासिक धर्म चक्र 24 दिनों का हो सकता है। अगला चक्र 28 दिनों का हो सकता है और फिर 35 दिनों का भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, किसी महिला के पीरियड्स कुछ महीनों के भीतर या स्तनपान बंद करने के बाद सामान्य हो सकते हैं। अत: किसी भी महिला को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि प्रसव के बाद मासिक धर्म सामान्य हो सकता है।
- उम्र: 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में, बच्चे के जन्म के बाद जल्दी रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) शुरू होने की संभावना अधिक रहती है। इसके अतिरिक्त, जिन महिलाओं को समय से पहले रजोनिवृत्ति हो जाती है, तो उसे हार्मोन थेरेपी करानी चाहिए।
- अन्य रोग: थायराइड या कुछ दवाओं के सेवन से भी रजोनिवृत्ति का समय प्रभावित हो सकता है।
स्तनपान और लोकिया की जानकारी
सभी महिलाओं के लिए लोचिया (Lochia) और मासिक धर्म के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है। एक ओर, लोचिया सामान्य योनि स्राव है, जो बच्चे के जन्म के बाद होता है, जो आमतौर पर 4-6 सप्ताह तक रहता है तो वहीं, मासिक धर्म 28-30 दिन तक रह सकता है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक महिला का अनुभव अलग हो सकता है। इसके अलावा, यदि किसी महिला के मन में स्वास्थ्य संबंधी कोई शंका है, तो उसे डॉक्टर से बात करनी चाहिए ताकि उस शंका को दूर किया जा सके।
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