गर्भवती महिलाएं अपनी गर्भावस्था में विभिन्न प्रकार की परेशानियों से जूझती हैं, जिनमें से असहनीय दर्द होना भी शामिल है। हालांकि, इससे निजात पाने के लिए दर्दनिवारक दवाइयां उपलब्ध होती हैं, लेकिन कुछ महिलाएं इनका सेवन करने से कतराती हैं। ऐसा मुख्य रूप से दवाई संबंधी मिथकों की वजह से होता है। अधिकांश गर्भवती महिलाएं ऐसा सोचती हैं कि अगर वे दर्दनिवारक दवाई लेगीं तो इसका प्रतिकूल असर उनके और उनके अजन्मे बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इस लेख में हम दर्द से निजात पाने वाले तरीकों की जानकारी लेकर आए हैं, इसलिए गर्भवती महिलाओं को यह लेख अवश्य पढ़ना चाहिए:
खुद को पर्याप्त समय देना
- मालिश: प्रसव (बच्चे के जन्म) से पहले और बाद में मालिश करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है, जो दर्द को कम करने का एक शानदार तरीका हो सकता है। मालिश ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। यह मूड को बेहतर करने में भी मदद कर सकती है। इसके अतिरिक्त, गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अवसाद और चिंता से निपटने में भी सहायक हो सकती है।
- गर्म पानी से नहाना: गर्म पानी में नहाने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त संचार बेहतर होता है। हल्के गुनगुने पानी से नहाने से शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे मांसपेशियों से अतिरिक्त लैक्टिक एसिड और अन्य विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, मांसपेशियां और भी लचीली हो जाती हैं।
- ध्यान भटकाना: अगर किसी गर्भवती महिला को दर्द लगातार हो रहा है, तो वे खुद को शांत करने के लिए अपना मनपसंद संगीत सुन सकती हैं, कोई फिल्म देख सकती हैं या कोई किताब पढ़ सकती हैं। इससे उनका दर्द से ध्यान हट सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि दर्द अब नहीं है अपितु इसका अर्थ सिर्फ़ इतना है कि वह अपने दिमाग का इस्तेमाल करके अपना ध्यान किसी और चीज़ पर केंद्रित कर रही हैं।
बैठने के तरीकों पर ध्यान दें
- सक्रिय रहना: नियमित व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाने और दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। प्रसव के पहले योग, तैराकी और पैदल चलना जैसे आसान व्यायाम करना अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं।
- सहायक उपकरणों का उपयोग करना: मैटरनिटी बेल्ट या सपोर्ट स्टॉकिंग्स पहनने से पीठ और पैर के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है। कुछ शोधों से स्पष्ट हैं कि गर्भावस्था के दौरान पीठ के निचले हिस्से में दर्द की रोकथाम और/या उपचार में प्रभावशीलता के संबंध में मैटरनिटी बेल्ट बेहतर हैं। वहीं, स्पाइन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में गर्भावस्था के दौरान पीठ और पेल्विक हिस्से में दर्द की व्यापकता की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि 71 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पीठ के निचले हिस्से (low back pain) में दर्द होता है और 65 प्रतिशत महिलाओं को श्रोणि (pelvic girdle) में दर्द होता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान बेली बैंड पहनने से गतिविधियों के दौरान पीठ के निचले हिस्से और पेट को सहारा मिल सकता है, जिससे दर्द कम हो सकता है।
- करवट लेकर सोना: गर्भवती महिलाएँ पैरों के बीच तकिया रखकर करवट लेकर सोने से आराम पा सकती हैं, जिससे पीठ दर्द कम हो सकता है। साथ ही यह भी ध्यान देना जरूरी है कि किस करवट नहीं सोना है। पीठ के बल सोने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ सकता है, जिससे पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है या बढ़ सकता है, जिससे अधिकांश गर्भवती महिलाएं परेशान हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, पीठ के बल सोने से खर्राटे आने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, तीसरे तिमाही (third trimester) में पेट के बल सोना भी हानिकारक हो सकता है।
हीट और कोल्ड थेरेपी की मदद
- सेंकना: दर्द वाली मांसपेशियों पर हीटिंग पैड या गर्म सेंक का उपयोग करने से आराम मिलता है, जिससे दर्द से राहत मिल सकती है।
- ठंडी सिकाई करना: सूजन वाले क्षेत्रों पर ठंडी सिकाई करने से सूजन और दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है।
वैकल्पिक चिकित्सा की मदद
- एक्यूप्रेशर: एक चिकित्सक शरीर पर विशिष्ट बिंदुओं पर दबाव डालकर दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
- एक्यूपंक्चर: एक्यूप्रेशर की तरह ही एक्यूपंक्चर में शरीर पर विशिष्ट बिंदुओं में पतली सुइयों को डालना शामिल है। कुछ महिलाओं को दर्द से राहत के लिए यह सहायक हो सकता है लेकिन ध्यान रखें कि उन्हें अपने चिकित्सक से जरूर परामर्श लेना चाहिए।
जीवनशैली में करें बदलाव
- स्वस्थ वजन बनाए रखना: अधिक वजन होने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और दर्द बढ़ सकता है।
- स्वस्थ आहार का सेवन: भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां और साबुत अनाज युक्त संतुलित आहार खाने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि शारीरिक दर्द को नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी पोषक तत्व मिल सकें।
- हाइड्रेटेड रहना: भरपूर पानी पीने से रक्त संचार बेहतर होता है और दर्द कम हो सकता है।
- पर्याप्त नींद लेना: जब कोई गर्भवती महिला अच्छी तरह से आराम करती है, तो उसका शरीर दर्द से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम होता है।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि गर्भवती महिला को चिकित्सक से शारीरिक दर्द के बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। वे दर्द के कारण का पता लगाने और इसका उपयुक्त उपचार करने में सहायता कर सकते हैं। हमें उम्मीद है कि इस लेख को पढ़कर गर्भवती महिला अपने शारीरिक दर्द से निजात पा पाएगीं।
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