एक किशोर को पालना कभी-कभी रोलरकोस्टर की सवारी जैसा महसूस हो सकता है। एक पल किशोर खुश और हँस रहा होता है तो वही दूसरे ही पल वह गुस्से या उदासी में हो सकता है। किशोरों में यह भावनात्मक उतार-चढ़ाव होना सामान्य है, लेकिन माता-पिता के लिए इसे प्रबंधित करना मुश्किल हो सकता है। इस लेख में हमने उन तरीकों की जानकारी दी है, जो माता-पिता के लिए लाभदायक हो सकते हैं।
माता-पिता अपने बच्चों से कैसे बात कर सकते हैं?
किशोर अक्सर भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करते हैं और इसके बारे में बात करना मुश्किल हो सकता है। माता-पिता अक्सर महसूस करते हैं कि उनका बच्चा खुलकर नहीं बात नहीं करता, जबकि किशोर सोचते हैं कि उनके माता-पिता “समझते नहीं।”

डॉ. पल्लवी शर्मा, MBBS, MD (मनोचिकित्सा), सलाहकार मनोचिकित्सक, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, नई दिल्ली बताती हैं ” पहले उनकी बात सुनें, उसके बाद में कुछ बोलें। जब किशोर कुछ साझा करे, तब तुरंत सलाह देने की कोशिश न करें। बस सिर हिलाएँ या कहें, “मैं समझ रहा/रही हूँ।” इससे उन्हें लगेगा कि माता-पिता उन्हें समझते हैं। शांत रहें। चिल्लाने से अक्सर चीजें और खराब हो जाती हैं। धीरे और शांत आवाज़ उन्हें खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करती है। सही समय चुनें। बहस के तुरंत बाद गंभीर बातें जबरदस्ती न करें। ऐसे समय का इंतजार करें जब माहौल सहज हो—जैसे चलते समय, कार में या चाय के समय।”
ये छोटे-छोटे कदम झगड़े कम कर सकते हैं और विश्वास बढ़ा सकते हैं। याद रखें, किशोर माता-पिता को ठुकरा नहीं रहा है—वह सिर्फ यह समझने की कोशिश कर रहा है कि वह कौन है।
किशोरों के भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए परिवार कैसे सहयोग कर सकता है?
स्वस्थ दिनचर्या किशोरों को मानसिक रूप से संतुलित महसूस कराने में मदद करती है, ठीक वैसे ही जैसे यह वयस्कों के लिए आवश्यक है। इस स्थिति में परिवार निम्नलिखित कार्य कर सकता है:
- अच्छी नींद लेना: किशोरों को 8–10 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। देर रात फोन या सोशल मीडिया का प्रयोग मूड को प्रभावित कर सकता है। सोने से पहले “गैजेट फ्री” समय रखना लाभदायक है।
- साथ में खाना खाएं: परिवार के साथ भोजन सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि बातचीत और संबंध मजबूत करने का भी एक अच्छा अवसर होता है।
- सक्रिय रहें: खेलें, नाचें या टहलने जाएँ। शारीरिक गतिविधि से तनाव कम होता है।
- अकेले समय का सम्मान करें: किशोरों को आराम देने के लिए समय चाहिए। इसे व्यक्तिगत रूप से न लें।
इन छोटे-छोटे रोज़ाना के कदमों से किशोरों का भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है और परिवार भी करीब आता है। एक-दूसरे का समर्थन करने से सभी की भावनात्मक ताकत बढ़ती है।
किशोरों के भावनात्मक उतार-चढ़ाव में अतिरिक्त सहायता कब लेनी पड़ सकती है?
हर बार मूड स्विंग्स होना चिंताजनक नहीं होता है, लेकिन कभी-कभी किशोरों को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए माता-पिता को निम्नलिखित संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:
- लंबे समय की उदासी: कुछ दिनों के बजाय हफ्तों तक उदास रहना।
- रुचि का खोना: शौक, दोस्त या स्कूल में रूचि न लेना।
- बड़े बदलाव: ग्रेड्स में अचानक गिरावट, दूसरों से दूर रहना या खुद को नुकसान पहुंचाने के संकेत।
जब किशोर भावनात्मक उतार-चढ़ाव से जूझ रहा होता है, तब माता-पिता को कोमल बर्ताव करना चाहिए। ऐसे कहें, “मैं तुम्हारे लिए यहाँ हूँ,” बजाय “बस ठीक हो जाओ।” माता-पिता किसी काउंसलर या डॉक्टर की सहायता ले सकते हैं। मदद मांगना कमजोरी नहीं है—यह परिवार को सुरक्षित और स्वस्थ रखने का हिस्सा है।
किशोरों के भावनात्मक उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करना आसान नहीं होता है। माता-पिता अक्सर अकेला महसूस करते हैं और उन्हें ऐसा भी लगता है कि उन्हें कोई नहीं समझेगा। लेकिन, यदि माता-पिता धीरे और समझदारी से बात करें, स्वस्थ रोज़ाना की आदतें बनाएं और जानें कि कब अतिरिक्त मदद लेनी चाहिए तो परिवार प्यार और धैर्य के साथ इस समय को पार कर सकता है।
माता-पिता को सब कुछ सही करने की आवश्यकता नहीं है। बस मौजूद रहना, सुनना और दिखाना कि वे परवाह करते हैं, प्रभावशील हो सकता है। किशोर का पालन-पोषण चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह रिश्ता मजबूत और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
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