कैंसर वर्तमान समय की गंभीर समस्याओं में से एक है, जिसके मरीज दुनियाभर में देखने को मिलते हैं। जब किसी व्यक्ति को कैंसर से पीड़ित होने का पता चलता है तो यह उसके साथ-साथ प्रियजनों के लिए चौंकाने वाली खबर होती है। इस स्थिति में उन्हें कैंसर देखभालकर्ता (cancer caregiver) की भूमिका निभाती पड़ती है। इस लेख में हमने कैंसर देखभालकर्ताओं की अनकही दास्तां और चुनौतियों का उल्लेख किया है।
कैंसर के मामलों के आंकड़ें
आंकड़ों से पता चला है कि साल 2022 में भारत में लगभग 14.6 लाख नए कैंसर के मामले सामने आए अर्थात् हर 1 लाख लोगों में से 100 लोग कैंसर से पीड़ित हैं। भारत में हर नौ में से एक व्यक्ति को अपने जीवन में कभी ना कभी कैंसर का जोखिम रहता है।
पुरुषों में सबसे ज्यादा फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) पाया गया, जबकि महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) एक गंभीर समस्या है। छोटे बच्चों (0-14 साल) में लिम्फोइड ल्यूकेमिया (Lymphocytic leukaemia) सबसे ज्यादा पाया गया, जो लड़कों में 29.2% और लड़कियों में 24.2% था। साल 2025 तक कैंसर के मामलों में साल 2020 की तुलना में करीब 12.8% बढ़ोतरी होने की संभावना है।
भारत में कैंसर मरीजों की देखभाल
भारत में कैंसर की देखभाल एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार और मरीजों के लिए सहायता सेवाएं शामिल हैं लेकिन सभी कैंसर रोगियों को समान रूप से अच्छी देखभाल नहीं मिलती है। ग्रमीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं कम होने के कारण कैंसर का उपचार सही समय पर नहीं हो पाता है।

डॉ. अभिषेक शंकर, एसिसटेंट प्रोफेसर और Preventive Oncology, AIIMS, दिल्ली बताते हैं, “कैंसर को नियंत्रित करने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर सभी चुनौतियों को दूर करने और देश स्तर पर प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता है। कैंसर देखभाल को सुलभ बनाने के लिए संसाधनों के समान वितरण, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, सामुदायिक जुड़ाव और भागीदारी एवं नीति परिवर्तन के माध्यम प्रारंभिक जांच को बढ़ावा देना चाहिए।”
किसी क्षेत्र में कैंसर का उपचार कितना अच्छे से हो रहा है, इसका पता वहां के मरीजों की survival rate (अर्थात् इलाज के बाद कितने लोग लंबे समय तक जी रहे हैं) और कैंसर के निदान से लगाया जा सकता है।
कैंसर की रोकथाम निम्नलिखित तत्वों पर निर्भर करती है:
- कैंसर का प्रकार
- कैंसर का निदान (जल्दी या देर से)
- मरीज का लिंग
- कैंसर की स्थिति
- उपचार
अत: कैंसर रोगियों की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें सही इलाज और मूलभूत सुविधाएं प्राप्त हो।
पापा को हुआ प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer)
एक ओर, कैंसर रोगी को भावनात्मक और मानसिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तो वहीं दूसरी ओर, कैंसर देखभालकर्ताओं (Cancer caregivers) को भी विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसे आमतौर पर Caregiver stress कहा जाता है, जिसे प्रबंधित करना संभव है।

आस्था (राजस्थान), COO, Skill Bud Technologies Pvt. Ltd. के पिता को साल 2023 में पता चला कि कैंसर है। हालांकि काफी समय से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही थी लेकिन उन्होंने कभी साझा नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप उनकी सेहत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। अंत: जांच में पता चला कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है। आस्था बताती हैं, “मैं नोएडा की एक निजी कंपनी में काम कर रही थी लेकिन जब पापा को कैंसर होने की बात पता चली, तब मैंने अपनी जॉब छोड़ दी। अपना सारा सामान रिश्तेदार के यहां रखकर मैं तुरंत राजस्थान चली गई। वहां जाने के बाद मैंने अपनी मां को कमज़ोर पड़ते देखा और उस वक्त मुझे एहसास हुआ कि खुद को मजबूत बनाना व रखना बहुत जरूरी है। हालांकि इस दौरान मेरे बाकी के घरवालों ने हमारी सहायता की लेकिन मैं और मेरी मम्मी पापा को लेकर बहुत सर्तक रहते थे। हमारी पूरी दिनचर्या ही पापा के आसपास घूमने लगी थी। हम दोनों केवल उनके बारे में ही सोचते थे और हर वक्त यही उम्मीद करते थे कि पापा जल्द-से-जल्द पापा ठीक हो जाएं। यहां पर मैं यह कहना चाहती हूं कि हालांकि एक एकल परिवार में परेशानियां अधिक होती हैं लेकिन महिलाओं पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है। अत: ऐसे में महिलाओं को भी अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थय का ख्याल रखना चाहिए।”
मां के लिए बेटी बनी देखभालकर्ता (Caregiver)

Solis Health की फाउंडर भैरवी मधुसूदन शिबूलाल बताती हैं, “जब मेरी मां को कैंसर हुआ, तब मैंने अपने पिता के साथ मिलकर उनकी देखभाल की। नवंबर 2018 में उनके निधन तक हम दोनों ही उनके देखभालकर्ता थे। इस अनुभव ने मुझे कैंसर से जूझ रहे लोगों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मौजूद कमियों को समझने में मदद की।”
भैरवी बताती हैं, “अम्मा और मैं अक्सर अपनी ज़िंदगी और अनुभवों के बारे में लंबी बातें किया करते थे। मां की देखभाल करने के बाद मुझे दो चीज़ों का एहसास हुआ कि हमारे पास सही जानकारी और मदद की कमी थी। आज भी अधिकांश कैंसर रोगियों को कैंसर की सही जानकारी नहीं मिल पाती है जिसके कारण वे सही इलाज नहीं करा पाते हैं। इसी कारण उन्हें देखभालकर्ता की आवश्यकता होती है। अपनी मां की देखभालकर्ता होने के नाते मैं यह कह सकती हूं कि कैंसर रोगियों की आवश्यकताओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है, जिस पर खुलकर बात करने की आवश्यकता है।”
देखभालकर्ताओं (caregivers) के मानसिक स्वास्थ्य का बेहतर होना आवश्यक है

डॉ. बिंदा सिंह, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट बताती हैं, “देखभालकर्ता मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजरते हैं इसलिए उनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहना आवश्यक है।” इस स्थिति में निम्नलिखित तरीकों को अपनाया जा सकता है:
- ध्यान (मेडिटेशन) या गहरी सांस लेना: इससे चिंता को कम किया जा सकता है।
- हल्की कसरत या रोज़ थोड़ी देर टहलना: ये तनाव को कम करने में सहायता कर सकते हैं।
- किसी सपोर्ट ग्रुप या काउंसलर से बात करना: इससे भावनात्मक राहत मिलती है।
- देखभाल की सीमाएं तय करना: यह करना आवश्यक है ताकि स्वयं को थकान से बचाया जा सके। इस स्थिति में आप घरवालों की मदद ले सकते हैं।
- शौक पूरे करना और थोड़ा समय खुद के लिए निकालना: यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
- अच्छी नींद और सही खानपान: इनके द्वारा स्वयं को तरोताजा रखा जा सकता है।
- भावनाओं को लिखना: अक्सर जर्नलिंग या डॉयरी लिखना भी सहायक हो सकता है क्योंकि इससे आप बेहतर महसूस कर सकते हैं।
यदि आप तनावग्रस्त महसूस कर रहे हैं तो मदद मांगने से संकोच न करें। ध्यान दें कि खुद की देखभाल करना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
आमतौर पर कैंसर को एक लाइलाज बीमारी समझा जाता है लेकिन यह सच नहीं है। इसके अलावा कैंसर संबंधित मिथक भी देखने को मिलते हैं, जिसकी वजह से लोग आवश्यक कदम उठाने से कतराते हैं। अत: इन मिथकों की वास्तविकता का पता लगाना आवश्यक है। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि कुछ लोग कैंसर रोगियों की कैंसर से लड़ने में सहायता करते हैं, जिन्हें कैंसर देखभालकर्ता (Cancer caregivers) कहा जाता है।
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