21वीं सदी में भी पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश महिलाओं के साथ मासिक धर्म (Periods) के दौरान अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है। यह एक गंभीर समस्या है। आज की महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं, बल्कि कई क्षेत्रों में उनसे आगे बढ़ रही हैं। फिर भी कुछ पुरानी और रूढ़ीवादी परंपराएँ महिलाओं के लिए अभिशाप बनी हुई हैं। वर्तमान समय में मासिक धर्म संबंधी सामाजिक वर्जनाएं एक गंभीर समस्याएं बन गई हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।
मासिक धर्म संबंधी रूढिवादी परंपराएं
पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। फिर भी पुरानी और रूढ़ीवादी परंपराएँ इस प्रयास को असफल कर रही हैं। मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। लेकिन इन क्षेत्रों में इस दौरान महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाई जाती हैं। शास्त्रों के आधार पर यह माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं का मंदिर और रसोई में जाना वर्जित है, और आज भी कई जगह इन बातों का पालन किया जाता है। कई बार महिलाओं को लगभग एक सप्ताह तक घर में अलग रहना पड़ता है। ऐसी प्रथाएँ महिलाओं के लिए मानसिक उत्पीड़न का कारण बन रही हैं। दुख की बात यह है कि भारतीय समाज का एक वर्ग भी इन परंपराओं का समर्थन करता है। इस तरह की सोच लोगों की संकीर्ण मानसिकता को दिखाती है।
मासिक धर्म संबंधी व्यक्तिगत अनुभव

सरिता पोखरिया (29 वर्षीय), ग्राम पोखरी, धारी, नैनीताल बताती है “13 वर्ष की उम्र में एक दिन स्कूल में मुझे अचानक अजीब महसूस हुआ और जब मैं घबराकर शौचालय गई तो मैंने अपने कपड़ों पर खून के धब्बे देखे। मैं बहुत डर गई क्योंकि इससे पहले मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था। मैंने इस बारे में अपनी अध्यापिका से बात की, जिन्होंने पास के मेडिकल स्टोर से सैनेटरी पैड मंगवाकर मेरी मदद की। घर पहुँचने पर मेरी माँ ने मुझे समझाया कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जो अब हर महीने होगी। शुरू में मैं समझ नहीं पा रही थी कि मेरे साथ क्या हो रहा है, लेकिन समय के साथ मैंने पैड का प्रयोग करना और पेट दर्द जैसी समस्याओं के साथ जीना सीख लिया और धीरे-धीरे मासिक धर्म को अपनी जीवनशैली का सामान्य हिस्सा मान लिया। घर में अपनी भाभी और आसपास की महिलाओं के अनुभव देखकर मुझे एहसास हुआ कि पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है, जो निंदनीय है और समाज की संकीर्ण सोच को दर्शाता है। मेरा मानना है कि हमें इस विषय पर अपनी माँ, सहेलियों या शिक्षकों से खुलकर बात करनी चाहिए।”
संभावित स्वास्थ्य समस्याएं
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को विभिन्न प्रकार की समस्याएँ हो सकती हैं। जैसे बहुत ज्यादा पेट दर्द होना, अधिक खून आना, मासिक धर्म का समय पर न आना या बंद हो जाना, अनियमित मासिक धर्म, हार्मोन की गड़बड़ी के कारण अंडाशय की समस्या (PCOS), गर्भाशय की परत बढ़ जाने से तेज दर्द होना (एंडोमेट्रियोसिस) या गर्भाशय/अंडाशय में गांठ (फाइब्रॉएड या सिस्ट) बन जाना।
इन समस्याओं से बचने और स्वस्थ रहने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। सैनिटरी पैड या टैम्पोन का प्रयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए और स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
डॉक्टर की राय

डॉ. निशा, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, भीमताल, उत्तराखण्ड बताती हैं कि “मासिक धर्म के दौरान सुरक्षित साधनों जैसे सैनिटरी पैड, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप का प्रयोग करना चाहिए। ये साधन स्वच्छ और सुरक्षित होते हैं। पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएँ कपड़े का प्रयोग करती हैं। यदि कपड़ा का प्रयोग किया जाए, तो वह साफ, मुलायम और पूरी तरह सूखा होना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए पैड या कपड़े को हर 4–6 घंटे में बदलना आवश्यक है।”
मासिक धर्म के दौरान ध्यान रखने वाली चीज़ें
मासिक धर्म के दौरान रोज़ाना गर्म पानी से स्नान करना और गुप्तांग को साफ पानी से धोकर स्वच्छ रखना चाहिए। प्रयोग किए गए पैड को कागज़ में लपेटकर कूड़ेदान में डालना चाहिए। दर्द और कमजोरी से बचने के लिए आयरन से भरपूर आहार करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ। पेट दर्द कम करने के लिए हीट पैक या गर्म पानी की बोतल का प्रयोग किया जा सकता है। यदि दर्द बहुत ज्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह से ही दर्द निवारक दवा लें।
इस समय पेट के निचले हिस्से और पीठ में दर्द, समय पर मासिक धर्म न आना, जल्दी या देर से आना अक्सर हार्मोन की गड़बड़ी के कारण होता है। हर महीने खून निकलने से शरीर में कमजोरी और एनीमिया का जोखिम भी बढ़ सकता है।
ये शुरू होने से पहले मूड स्विंग, थकान, सिरदर्द और पेट भारी लगना आम बात है। पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी के कारण संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य का भी खयाल रखें क्योंकि चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स हो सकता है। हल्का व्यायाम करें, पर्याप्त नींद लें और संतुलित व पौष्टिक भोजन करें।
हालांकि, भारत में खराब मासिक धर्म स्वच्छता के कारण होने वाली मौतों का कोई सरकारी आंकड़ा नहीं है, लेकिन साफ-सफाई की कमी से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और अन्य संक्रमणों के कारण हर साल हजारों महिलाएँ प्रभावित होती हैं।
जागरूकता फैलाने के तरीके
रोजी एक ऑनलाइन मंच है, जहाँ मासिक धर्म, किशोरावस्था और गुप्तांगों की देखभाल से संबंधित जानकारी और संसाधन उपलब्ध हैं। वहीं “गेट द फैक्ट्स” एक सरकारी वेबसाइट है, जहाँ युवा मासिक धर्म से संबंधित सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 1800022222 नंबर पर कॉल करके भी जानकारी ली जा सकती है, जहाँ एक पंजीकृत नर्स 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध रहती है।
मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। पहली बार होने पर लड़कियाँ अक्सर घबरा जाती हैं, क्योंकि वे इसे समझ नहीं पाती हैं। सही मार्गदर्शन, साफ-सफाई और खुलकर बातचीत से इसे सामान्य तरीके से संभाला जा सकता है, न कि शर्म या डर के साथ।
इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षा और जागरूकता महत्वपूर्ण है। स्कूलों और कार्यस्थलों पर पानी, साबुन और सुरक्षित शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने भी माना है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता महिलाओं का मौलिक अधिकार है। सैनिटरी उत्पादों तक पहुंच की कमी महिलाओं की गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और शिक्षा को प्रभावित करती है।
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