हर दर्द में राहत, डर में हौसला और ज़रूरत पर मौजूदगी—नर्सें केवल स्वास्थ्यकर्मी नहीं होती, बल्कि एक मिसाल भी होती हैं। उनका काम सिर्फ अस्पतालों तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि वे प्रतिकूल स्थितियों में भी सराहनीय कार्य करती हैं। इस लेख में हम ऐसी ही कुछ नर्सों की कहानियां लेकर आए हैं, जिन्होंने अपनी जान दांव पर लगाकर अन्य लोगों की जान बचाई हैं।
हर साल 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य नर्सों के योगदान को याद करना, उन्हें सम्मानित करना और लोगों को इनकी महत्वपूर्ण जानकारी देना है। हर साल इस दिवस की विशिष्ट थीम होती है, उसी प्रकार इस साल की थीम है- हमारी नर्सें। हमारा भविष्य। नर्सों की देखभाल से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।”
इस थीम पर स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर लिखते हैं, “नर्सों की देखभाल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है। हम मानते हैं कि नर्सों की भलाई सीधे तौर पर हमारी स्वास्थ्य प्रणालियों और राष्ट्रीय विकास की मजबूती से संबंधित है। नर्सों में निवेश करने का अर्थ है स्वस्थ समाज, उत्पादक समुदाय और अधिक लचीले भविष्य में निवेश करना।”
जब नर्सों ने बचाई लोगों की जान

जब छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे अस्पताल में आनंद राय नामक एक मूक-बधिर कोविड-19 मरीज आया, तब अस्पताल की नर्स स्वाति भीमगाज़ ने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया कि मरीज को उचित उपचार मिले। अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों को मरीज से बात करने में बहुत परेशानी हो रही थी, जिससे मरीज भी उतना ही भ्रमित था और डॉक्टरों की बात को पूरी तरह से समझ नहीं पा रहा था। जब स्वाति ने उन्हें संघर्ष करते देखा, तो वे परेशान हो गईं। घर जाने के बाद उन्होंने रात भर YouTube पर सांकेतिक भाषा सीखी ताकि वे मरीज की पीड़ा को बेहतर ढंग से समझ सके। तब से, वे अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को मरीज से बात करने में मदद कर रही हैं।

26/11 के आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। कई मासूम लोग मारे गए, लेकिन कुछ लोगों ने बहादुरी भी दिखाई। ऐसी ही एक बहादुर नर्स थीं अंजलि विजल कुलठे। उनके वार्ड में करीब 20 महिलाएं भर्ती थीं, जिनमें से कुछ को बच्चा होने वाला था। तभी उन्होंने देखा कि दो आतंकी गार्डों को गोली मार रहे हैं। उन्होंने तुरंत वार्ड का दरवाजा बंद कर दिया। जैसे ही आतंकी ऊपर पहुंचे, दरवाजा बंद मिल गया। अंजलि ने रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक सभी मरीजों और उनके परिवारों को एक छोटी-सी पेंट्री में छुपाकर रखा। ऊपर आतंकी गोलियां चला रहे थे और ग्रेनेड फेंक रहे थे। हर धमाके से बिल्डिंग कांप रही थी, लेकिन अंजलि ने सबकी जान बचा ली।
वर्तमान स्थिति
यह तो सिर्फ दो उदाहरण हैं। भारत के हर कोने में नर्सों की बहादुरी और सेवा की कई कहानियाँ हैं। नर्सें मरीजों और समुदाय की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे डॉक्टरों और बाकी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर काम करती हैं ताकि मरीजों को अच्छी देखभाल मिल सके। समय के साथ भारत में नर्सों की जिम्मेदारियाँ बढ़ी हैं। अब वे सिर्फ शुरुआती देखभाल नहीं करतीं, बल्कि मरीजों की हर ज़रूरत का ध्यान रखती हैं।
भारत में डॉक्टरों की कमी विशेषकर गांवों में एक बड़ी समस्या है। ग्रामीण स्वास्थ्य रिपोर्ट 2021-22 के अनुसार, देश की करीब 68% आबादी गांवों में रहती है, लेकिन डॉक्टर और अस्पताल ज़्यादातर शहरों में हैं। इस कमी को नर्सें पूरा कर रही हैं। फिर भी नर्सों को वह सम्मान नहीं मिलता, जिसकी वे हकदार हैं।
चुनौतियां
वर्तमान में देश में नर्स जनसंख्या अनुपात प्रति 1000 जनसंख्या पर 1.7 नर्स है। हालांकि, नर्स-रोगी अनुपात राज्य दर राज्य, ज़िले दर ज़िले और संस्थान दर संस्थान अलग-अलग होता है। भारत में अधिकांश नर्सों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:
- ज्यादा काम: एक ANM से उम्मीद की जाती है कि वह 5–6 गांवों में जाकर टीकाकरण करे, गर्भवती महिलाओं का ध्यान रखे, साफ-सफाई पर ध्यान दे और सारे रिकॉर्ड भी संभाले।
- आवश्यक सुविधाओं की कमी: गांव के स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर बिजली, साफ पानी और ज़रूरी दवाइयां नहीं होती हैं फिर भी नर्सों से पूरी मेहनत से काम करने की उम्मीद की जाती है।
- सुरक्षा की चिंता: कई नर्सों को अकेले दूर-दराज़ के इलाकों में जाना पड़ता है, जिससे उन्हें विशेषकर रात के समय डर और खतरे का सामना करना पड़ता है।
- मानसिक थकान: लंबा काम, सम्मान की कमी और दुखद अनुभव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं।
पटना में काम कर रहीं ANM पूजा बताती हैं, “मुझे अपने काम का सबसे अच्छा हिस्सा यह लगता है कि मैं लोगों की देखभाल कर पाती हूं। जब मरीज ठीक होकर घर जाते हैं, तब मुझे बहुत खुशी मिलती है। लेकिन कई बार नर्सों के काम को नजरअंदाज किया जाता है, जबकि डॉक्टर की गैर-मौजूदगी में हम ही मरीजों का ध्यान रखते हैं। इसलिए हमारे काम की अहमियत समझनी चाहिए। कभी-कभी रात में काम करना थकाने वाला और डरावना होता है, क्योंकि हमें अपनी सुरक्षा की चिंता रहती है। ऐसे में हमारी समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।”
क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

बीना चक्किसेरी एंटनी, मुख्य नर्सिंग अधिकारी, डीएम विम्स मेडिकल कॉलेज, तिरुवनंतपुरम, केरल बताती हैं, “नर्सिंग में विभिन्न प्रकार की समस्याएं हैं। उदाहरण के लिए, कम वेतन मिलना। इस कारण, नर्सों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा प्रमोशन ना मिलना, कार्य करने के लिए सकारात्मक माहौल का ना होना और लोगों की नर्स के प्रति नकारात्मक मानसिकता भी चुनौतियों को बढ़ाने का काम करती है।”
वे आगे बताती हैं “इन चुनौतियों को दूर करने के लिए विभिन्न उपाय करने की आवश्यकता है। इनमें कौशल पर काम करना महत्वपूर्ण है, ताकि उनके पास करियर के अन्य विकल्प भी हो या वह नर्सिंग के क्षेत्र में ही उच्च पद तक पहुंच सकें।”
निष्कर्ष
नर्सें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली (healthcare system) की रीढ़ हैं। उन्हें मरीजों की देखभाल के साथ-साथ भावनात्मक सहयोग देने जैसे कार्य भी करने पड़ते हैं। जहां, कुछ नर्सें अपनी स्थिति से ऊब जाती हैं, वहीं दूसरी ओर, कुछ महिलाएं (नर्सें) अस्पताल के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी सराहनीय कार्य करती हैं।
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