32 वर्षीय आर्यन पाशा एशिया के पहले ट्रांस पुरुष बॉडीबिल्डर, ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता और उद्यमी हैं। वह तीन साल तक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाली राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद के सदस्य रहे। आज वह अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को और उनसे भी अधिक अपनी सौतेली मां पायल पाशा को देते हैं। दिल्ली में रहने वाली पायल बताती हैं, “हमें इन विषयों के बारे में काफी जानकारी और समझ मिली है। हालांकि, हम मुस्लिम हैं, लेकिन LGBTQ+ जैसे मुद्दों को लेकर हमारा परिवार काफी खुले विचारों वाला है। आर्यन के माता-पिता ही नहीं, बल्कि गांव में रहने वाले उनके दादा-दादी ने भी उन्हें पूरी तरह स्वीकार किया। सभी के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ आर्यन की खुशी और उनका अच्छा स्वास्थ्य था।”
परिवार का साथ आवश्यक क्यों है?
LGBTQ+ समुदाय के किसी व्यक्ति के लिए यह ज़िदगी हमेशा आसान नहीं होती है, लेकिन परिवार का साथ इस सफर को काफी आसान बना देता है। बाहर का नकारात्मक माहौल, भावनात्मक उलझन और माता-पिता से स्वीकृति पाने की कोशिश—ये सभी मिलकर LGBTQ+ लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो सकते हैं। ऐसे समय में परिवार की समझ और समर्थन न मिलने से वे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। दूसरी ओर, परिवार का सहयोग उन्हें आत्मविश्वासी बनाता है। वे अपनी पहचान को खुलकर स्वीकार कर पाते हैं और जीवन में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।

बचपन में आर्यन धीरे-धीरे अवसाद की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन आज वह एक आत्मविश्वासी व्यक्ति हैं, जो सफलता हासिल करने के साथ-साथ इन लोगों की मदद और मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। हालांकि, जन्म के समय आर्यन को लड़की माना गया था, लेकिन उन्होंने कभी खुद को लड़की जैसा महसूस नहीं किया और न ही उसी तरह व्यवहार किया। पायल याद करते हुए बताती हैं, “सभी लोग आर्यन के साथ एक लड़के की तरह व्यवहार करते थे। धीरे-धीरे स्कूल में होने वाली बदमाशी और अपनी पहचान को लेकर उनके मन में उठने वाले सवाल उदासी का कारण बनने लगे। एक दिन मैंने उनसे अपनी परेशानी बताने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वह सर्जरी करवाना चाहते हैं। इसके बाद हमने इस बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। हमें इस फैसले को लेकर कोई संदेह नहीं था।” पायल ने आर्यन के पिता को भी इस मुद्दे को समझने में मदद की।
लिंग परिवर्तन ऑपरेशन (Gender affirmation surgery) सर्जरी
आर्यन के 18 साल के होते ही लिंग परिवर्तन ऑपरेशन और हार्मोन थेरेपी शुरू की गई। आर्यन बताते हैं, “मैं पढ़ाई में औसत से भी कमजोर था, लेकिन लिंग परिवर्तन के बाद मेरी पढ़ाई अच्छी होने लगी। इसके बाद मैं मुंबई गया और वहां कानून की पढ़ाई की। इससे LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों के लिए मेरे काम में काफी मदद मिली। मुझे फिटनेस में भी रुचि हो गई और मैंने मसलमेनिया इंडिया में हिस्सा लिया। ऐसा करने वाला मैं भारत का पहला ट्रांस पुरुष था। मैं दूसरे स्थान पर रहा।” आर्यन के अनुसार उनके माता-पिता और भाई-बहनों ने उन्हें सफलता की ओर बढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। परिवार ने सिर्फ उनके करियर को ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता और इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा की प्रमुख साध्वी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ उनके रिश्ते को भी पूरी तरह स्वीकार किया है। आर्यन हंसते हुए बताते हैं, “जब मैं लक्ष्मी के बिना अपने माता-पिता से मिलने जाता हूं, तब वे नाराज हो जाते हैं। वे लक्ष्मी से बात करने के लिए ज्यादा उत्सुक रहते हैं। जब मेरे पिता और लक्ष्मी मिलते हैं, तब दोनों के बीच अपने ही मजाक चलते रहते हैं। मुझे इससे बहुत संतुष्टि और शांति महसूस होती है।”
एक और कहानी: बाइसेक्शुअल होकर भी सफलता की मिसाल

पूर्व पत्रकार से उद्यमी बने पारस तोमर और उनके पिता पापा टोमू के सोशल मीडिया वीडियो काफी लोकप्रिय हैं। इन वीडियो में दोनों साथ में डांस करते, बेफिक्र होकर मजाक-मस्ती करते और सेक्स, यौन रुझान और जिंदगी जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत करते नजर आते हैं। पापा टोमू यानी रिटायर्ड नौसेना अधिकारी कैप्टन तोमर का 2023 में अचानक निधन हो गया। इसके बाद उनके सोशल मीडिया पेज पर लोगों के कई सवाल और संवेदनाएं देखने को मिलीं। पापा टोमू के निधन के साथ पारस ने अपना सबसे अच्छा दोस्त, मार्गदर्शक और विश्वासपात्र खो दिया। पारस बताते हैं, “जब मैं 16 साल का था, तब मैंने अपनी मां को खो दिया। इसके बाद मेरे पिता ने ही मेरी परवरिश की। 17 साल की उम्र में मैंने अपने पिता को बताया कि मैं बाइसेक्शुअल हूं, लेकिन उन्होंने कभी मुझसे सवाल नहीं किया और न ही कोई आपत्ति जताई। वह LGBTQ समुदाय के सबसे मुखर समर्थकों में से एक थे। मेरी मां के परिवार ने भी खुले तौर पर मेरा समर्थन किया। जैसा आमतौर पर लोग सोच सकते हैं, मेरी जिंदगी में इसे लेकर कोई ड्रामा नहीं हुआ।” पारस ने दो व्यवसाय शुरू किए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 2,500 करोड़ रुपये है। इनमें पुरुषों के स्वास्थ्य और वेलनेस से जुड़ा ब्रांड Studd Muffyn और ब्यूटी ब्रांड Nuskhe by Paras शामिल हैं। ये दोनों ब्रांड प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और पारंपरिक सामग्री से प्रेरित स्वास्थ्य और सौंदर्य से जुड़े समाधान उपलब्ध कराते हैं।

ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध इन वीडियो में दिवंगत कैप्टन तोमर अक्सर यह कहते नजर आते हैं कि उनके बच्चे की खुशी सबसे ज्यादा मायने रखती है। एक वीडियो में वह पारस को सुरक्षित यौन संबंध बनाने की सलाह देते भी सुनाई देते हैं। पारस बताते हैं, “हमारी कहानी ने बहुत से माता-पिता को प्रेरित किया। उन्होंने मेरा, मेरे LGBTQ+ दोस्तों और इस समुदाय के अधिकारों के लिए चलाए जा रहे प्रयासों का हमेशा बहुत समर्थन किया।”
मां ने क्या सोचा?
नोएडा की रहने वाली सिम्मी नंदा का सफर एक ऐसे माता-पिता से, जो शुरुआत में अपने बच्चे की पहचान को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं, LGBTQ+ समुदाय के लिए बिजनेस शुरू करने और Shark Tank में अपना बिजनेस पेश करने तक पहुंचा है।
2016 में उन्हें अपनी भतीजी के जरिए पता चला कि उनका छोटा बेटा गे है। सिम्मी बताती हैं, “मेरे बेटे आशीष ने मुझे बताने का इरादा नहीं किया था, क्योंकि उस समय मैं तलाक की प्रक्रिया से गुजर रही थी और वह जानता था कि मैं पहले से ही बहुत परेशान हूं। लेकिन मेरी भतीजी ने मुझे यह बात बता दी। मैं हैरान और दुखी थी। करीब ढाई साल तक मैं इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाई। मैंने सोशल मीडिया से खुद को दूर कर लिया था, ताकि परिवार में किसी को इसके बारे में पता न चले।”
आज सिम्मी अपने बेटे पर गर्व करती हैं। उनके बड़े बेटे ने उन्हें LGBTQ+ लोगों को समझने और उनकी भावनाओं को महसूस करने में मदद की। सिम्मी आगे बताती हैं, “वह मुझे पढ़ने के लिए अलग-अलग लेख भेजता था। इसी तरह मैंने इस विषय के बारे में खुद को समझाना शुरू किया।”
शुरुआत: मां, प्लेटफॉर्म और गे बेटा
आज, आठ साल बाद, आशीष के साथ सिम्मी का रिश्ता बिल्कुल सामान्य मां-बेटे जैसा है। वह बताती हैं, “वह मुझे अपने बॉयफ्रेंड और डेट्स के बारे में बताता है। मैं उसे छेड़ती हूं। अब सब पहले जैसा सामान्य हो गया है। वह बेंगलुरु में रहता है और कहता है कि उसे इस समुदाय में अपना एक परिवार मिल गया है और वह बहुत खुश है।”
LGBTQ+ समुदाय की समस्याओं को समझने के बाद सिम्मी ने अपने बेटों आशीष और विशेष चोपड़ा के साथ मिलकर BeUnic की शुरुआत की। यह LGBTQ+ क्रिएटर्स और उद्यमियों के लिए एक प्लेटफॉर्म है। इसकी शुरुआत फुटवियर कंपनी के रूप में हुई थी, लेकिन बाद में यह LGBTQ+ उत्पादों के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस बन गया। यह प्लेटफॉर्म बिजनेस, काउंसलिंग और नई स्किल सीखने के जरिए LGBTQ+ समुदाय की मदद करता है। साथ ही, यह NGOs और सपोर्ट ग्रुप्स के साथ मिलकर भी काम करता है।
एक ऐसे माता-पिता से, जो शुरुआत में अपने बच्चे की पहचान स्वीकार नहीं कर पा रही थीं, समुदाय की आवाज बनने तक सिम्मी का बदलाव वाकई प्रेरणादायक है।
पैनसेक्सुअलिटी और ड्रैग

माता-पिता के समर्थन की एक और प्रेरणादायक कहानी है। पार्ट्रुनी सी. शास्त्री प्रशिक्षित कुचिपुड़ी डांसर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और भारत में ड्रैग कला को लोकप्रिय बनाने वाले शुरुआती कलाकारों में से एक हैं। वह पैनसेक्सुअल हैं, अर्थात् वे अलग-अलग जेंडर और सेक्स के लोगों के प्रति आकर्षित हो सकते हैं। पार्ट्रुनी की शादी एक सिजेंडर महिला से हुई है और पिछले साल वे माता-पिता बने। पिछले कुछ वर्षों से उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से देखे जा सकने वाले कार्यक्रमों के जरिए ड्रैग कला को आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने ड्रैग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और ‘ड्रैगवंती’ नाम का एक किरदार बनाया।
बचपन से ही पार्ट्रुनी को महिलाओं के कपड़े पहनना पसंद था और उनकी मां ने उन्हें कभी नहीं रोका। आज भी ड्रैग शो के लिए पार्ट्रुनी अपनी मां से साड़ियां उधार लेते हैं। पार्ट्रुनी बताते हैं, “सिर्फ इतना ही नहीं, मेरे माता-पिता और पार्टनर कई बार मेरे ड्रैग शो देखने भी आए हैं। उन्होंने कभी समाज की परवाह नहीं की और हमेशा मुझसे अपने काम पर ध्यान देने को कहा। वे कहते हैं कि शायद वे मेरे काम की बारीकियों को पूरी तरह न समझ पाएं, लेकिन इससे यह सच्चाई नहीं बदलती कि मैं उनका बच्चा हूं।” पार्ट्रुनी ने अपने माता-पिता को मराठी फिल्म ‘बालगंधर्व’ भी दिखाई, जो प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार और महिला किरदार निभाने वाले अभिनेता-गायक पर आधारित है। वे बताते हैं, “मुझे लगा कि यह उन्हें स्थिति समझाने का बेहतर तरीका होगा।”
चाहे पार्ट्रुनी की जेंडर पहचान से जुड़ी शादी की चुनौतियां हों या उनके ड्रैग शो, उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा खुले दिल से स्वीकार किया। हैदराबाद के यह कलाकार बताते हैं, “मैं ऐसे कई क्वीर लोगों को जानता हूं जो परिवार की स्वीकृति पाने के लिए अपनी बहुत सारी ऊर्जा और समय संघर्ष में लगा देते हैं और बाद में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी गुजरते हैं। लेकिन मैं बहुत भाग्यशाली हूं। अगर मेरे परिवार का साथ नहीं होता, तो मैं जीवन में इतना आगे नहीं बढ़ पाता।”
एक ट्रांस महिला कलाकार की कहानी

चंद्री, 41 वर्षीय ट्रांस महिला और कलाकार हैं। वह Aravani Art Collective से जुड़ी हैं। यह समूह ट्रांस और सिजेंडर महिलाओं ने मिलकर बनाया है, ताकि ट्रांस समुदाय के लोग एक साथ आकर कला से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर सकें, सहयोग कर सकें और अपनी रचनात्मकता को आगे बढ़ा सकें। चंद्री के माता-पिता हमेशा एक बेटा चाहते थे। लेकिन जन्म के समय पुरुष माना गया बच्चा जब बड़ा होकर चंद्री के रूप में अपनी पहचान उनके सामने लेकर आया, तो माता-पिता ने उनका साथ दिया। इस बदलाव की प्रक्रिया में चंद्री की बहन और जीजा ने भी उनकी मदद की।
जब चंद्री के माता-पिता से पूछा गया कि क्या समाज की प्रतिक्रिया से उन्हें कभी परेशानी हुई, तो तमिलनाडु के होसुर से फोन पर उन्होंने कहा, “मैंने कभी समाज की परवाह नहीं की। वह मेरी बच्ची है और मुझे हर हाल में उसे स्वीकार करना है। मेरे मन में कभी कोई दूसरा विचार नहीं आया।”
Aravani Art Collective की कलाकार के रूप में चंद्री भारत में कई महत्वपूर्ण कला परियोजनाओं का हिस्सा रही हैं। इस समूह ने कई परियोजनाएं की हैं और India Art Fair में भी हिस्सा लिया है। उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित कला आयोजनों में शामिल Venice Biennale में म्यूरल बनाने के लिए भी आमंत्रित किया गया।
चंद्री बताती हैं, “मैं अपने परिवार के विश्वास और प्यार की वजह से यहां तक पहुंच पाई और अपने काम पर ध्यान दे पाई। आज मैं गर्व के साथ काम कर रही हूं, क्योंकि मुझे अपने परिवार का बिना शर्त समर्थन मिला है।”
इन सभी कहानियों की नींव प्यार, स्वीकार्यता और परिवार के समर्थन पर टिकी है। इन लोगों ने मुश्किलों का सामना किया और दूसरों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की मिसाल बने। उन्होंने साबित किया कि पूर्वाग्रह से ज्यादा मजबूत रिश्ते और सच्चा प्यार इंसान को अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। उनकी कहानियां दिखाती हैं कि बिना शर्त प्यार और साथ मिलने से व्यक्ति अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकता है, चाहे उसकी यौन पहचान या जेंडर पहचान कुछ भी हो।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at factcheck@thip.in. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.


