संगीता (काल्पनिक नाम), 38 वर्ष, मुज़फ्फरपुर के एक निजी स्कूल में डांस टीचर हैं। उनके लिए व्यस्त दिनचर्या, देर रात तक मोबाइल चलाना और सुबह जल्दी उठना सामान्य था। समय के साथ नींद की कमी, वजन बढ़ा और थकान बनी रही। कुछ वर्षों बाद स्तन में गांठ मिलने पर उन्हें एहसास हुआ कि उनकी जीवनशैली—खराब नींद और मोटापा—स्तन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है। संगीता की कहानी से पता चलता है कि गलत जीवनशैली धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
स्तन कैंसर के मामलों का बढ़ना
दुनिया भर में स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन चुका है और भारत में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी से प्रभावित हो रही हैं और भारत में यह महिलाओं में कैंसर से संबंधित मौतों के मुख्य कारणों में से एक है। हालांकि, जागरुकता फैलाने से कई स्तर पर बदलाव भी हुए हैं, जैसे- खुद अपने स्तनों की जाँच करना लेकिन भारत के विभिन्न हिस्से अभी भी इस जागरुकता से कोसों दूर हैं।

डॉ. पूजा खुल्लर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, धर्मशिला नारायण सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली बताती हैं, “स्तन कैंसर के जोखिम को कम करना केवल एक उपाय से नहीं होता, बल्कि यह जीवनशैली से संबंधित है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना, शराब और धूम्रपान से दूरी, स्तनपान को बढ़ावा देना और नियमित स्क्रीनिंग जैसे कदम पहले से ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं।”
नींद की कमी: एक अन्य जोखिम
शोध से पता चलता है कि नींद केवल आराम का समय नहीं होता है। यह शरीर को सुकून देने और संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। शोध के अनुसार खराब नींद से स्तन कैंसर का जोखिम और उससे संबंधित मृत्यु दर दोनों में वृद्धि देखी गई है।
अध्ययन के अनुसार जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जो एंटी-कैंसर प्रभाव के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, देर रात तक जागना या कृत्रिम रोशनी के संपर्क में रहना शरीर की जैविक घड़ी (circadian rhythm) को बाधित करता है, जिससे कोशिकाओं की मरम्मत प्रक्रिया प्रभावित होती है और डीएनए क्षति का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. पूजा आगे बताती हैं कि “वैज्ञानिक साक्ष्यों से पता चलता है कि नींद महत्वपूर्ण है। खराब नींद ना सिर्फ हार्मोनल असंतुलन और वजन बढ़ने का कारण बनती है बल्कि शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर स्तन कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। विशेषकर उन महिलाओं के लिए जिनके परिवार में स्तन या अंडाशय कैंसर का इतिहास है, उन्हें जीवनशैली के हर पहलू पर ध्यान देने की आवश्यकता है। समय पर सोना, स्क्रीन से दूरी रखना और 7–8 घंटे की नियमित नींद लेना अब केवल आराम के लिए नहीं बल्कि कैंसर से बचाव की रणनीति का भी एक अहम हिस्सा माना जाना चाहिए।”
मोटापा और हार्मोनल बदलाव का प्रभाव
मोटापा स्तन कैंसर के मुख्य जोखिम कारकों में से एक है, विशेष रूप से रजोनिवृत्ति के बाद की स्थिति में क्योंकि शरीर में अतिरिक्त वसा ऊतक एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को बढ़ाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा दे सकता है।
इसके अलावा मोटापा क्रॉनिक इंफ्लेमेशन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है, जो कैंसर के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। अध्ययन से पता चलता है कि अधिक वजन वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का जोखिम सामान्य वजन वाली महिलाओं की तुलना में अधिक होता है।
नींद और मोटापा से स्तन कैंसर के जोखिम का बढ़ना
सबसे गंभीर स्थिति तब होती है, जब खराब नींद और मोटापा एक साथ मौजूद होते हैं। शोध से पता चलता है कि नींद की कमी शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन जैसे- घ्रेलिन और लेप्टिन को प्रभावित करती है, जिससे भूख बढ़ती है और वजन तेजी से बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, मोटापा पहले से ही हार्मोनल असंतुलन और इन्फ्लेमेशन को बढ़ा रहा होता है। इस प्रकार, ये दोनों कारक मिलकर शरीर में एक “प्रो-कैंसर” वातावरण तैयार करते हैं, जो स्तन कैंसर के जोखिमों को अधिक बढ़ा सकता है।
शरीर के अंदर क्या होता है?
जब नींद और वजन दोनों असंतुलित होते हैं, तब शरीर में विभिन्न स्तरों पर बदलाव होते हैं। जैविक घड़ी के बिगड़ने से कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। मेलाटोनिन का स्तर कम होने से शरीर की कैंसर से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है।
वहीं, मोटापे के कारण एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है और इन्फ्लेमेशन की स्थिति बनी रहती है। साथ ही, इंसुलिन रेजिस्टेंस भी कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास को बढ़ावा दे सकता है। ये सभी कारक मिलकर कैंसर के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं।
क्या यह जोखिम कम किया जा सकता है?

अगर सही सलाह ली जाए और उसका पालन किया जाए, तो इन जोखिमों को कम किया जा सकता है। डॉ. रोमा कुमार, सीनियर कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, सर गंगा राम अस्पताल और मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली बताती हैं, “रोज़ाना एक ही समय पर सोना और जागना या बिस्तर ठीक करना जैसी छोटी आदतें सामान्य लगती हैं लेकिन ये कारगर होती हैं। ये शरीर को एक प्राकृतिक लय में लाती हैं, जिससे समय के साथ नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। छोटी-छोटी आदतों का नींद पर गहरा असर पड़ता है। इन्हें स्लीप हाइजीन कहा जाता है।”

छवि कोहली, क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और सर्टिफाइड डायबिटीज़ एजुकेटर बताती हैं, “लोग शाम को क्या खाते-पीते हैं, इसका नींद पर गहरा असर पड़ता है। गहरी नींद के लिए कुछ आसान बदलाव मदद कर सकते हैं, रात को हल्का भोजन करना, कैफीन और शराब से बचना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और कम मात्रा में कैमोमाइल चाय, बादाम या अखरोट खाना।”
निष्कर्ष
स्तन कैंसर अब केवल उम्र या आनुवंशिकता से नहीं संबंधित है। आधुनिक जीवनशैली—नींद की कमी और बढ़ता मोटापा—इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं। छोटे-छोटे बदलाव, जैसे समय पर सोना और स्वस्थ वजन बनाए रखना, लंबी अवधि में जीवन बचा सकते हैं। व्यक्तिगत स्तर से लेकर स्वास्थ्य नीतियों तक, नींद और मोटापे को गंभीरता से लेना आवश्यक है। ये कदम स्तन कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

