पहले स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए लोग डॉक्टर से परामर्श करते थे लेकिन अब यह प्रवृत्ति बदल गई है और लोग डॉक्टर के बजाय इंटरनेट (विशेषकर गूगल) को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसका मुख्य कारण डिजिटलिकरण है। इसी कारण, अधिकांश लोग गूगल को ‘डॉ. गूगल’ की उपाधि देते हैं लेकिन क्या ऐसा करना सही है। इस लेख में हमने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।
आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के वर्षों में अधिकांश लोग औसतन 5.5 बिलियन प्रतिदिन गूगल का प्रयोग करते हैं। यह लोगों के इस पर आश्रित होने की स्थिति को उजागर करता है, जिसे बदलने की आवश्यकता है।
लोग स्वास्थ्य संबंधित जानकारी के लिए गूगल का प्रयोग क्यों करते हैं?
लोगों द्वारा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए गूगल का प्रयोग करने के निम्नलिखित कारण हैं:
- इंटरनेट की सुलभता- इसका मुख्य कारण आसानी से इंटरनेट का मिलना है। सस्ते स्मार्टफोन और कम कीमत वाले डेटा प्लान की वजह से अब ग्रामीण और छोटे शहरों के लोग भी इंटरनेट का प्रयोग आसानी से करते हैं। TRAI के अनुसार, 70% से अधिक भारतीयों के पास इंटरनेट है और इंटरनेट पर सर्च किए जाने वाले विषयों में सबसे प्रमुख- ‘स्वास्थ्य’ है।
- स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच– पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टरों की 80% उपलब्धता और लगभग 5.65 लाख आयुष डॉक्टरों की उपलब्धता मानते हुए, देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात लगभग 1:836 है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक 1:1000 से बेहतर है लेकिन कई बार डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होते हैं। ऐसे में गूगल इस कमी को दूर करता है। जब डॉक्टर तुरंत नहीं मिलते हैं, तब इसके जरिए लोग अपनी बीमारी की जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।
- सामाजिक दृष्टिकोण और संवेदनशीलता- भारत में कुछ रोगों से संबंधित अंधविश्वास देखने को मिलते हैं जिसकी वजह से सही उपचार करना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण, लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। लोग इस बात को समझ नहीं पाते हैं कि चिकित्सीय गलत सूचने के घातक परिणाम हो सकते हैं।
गूगल का प्रयोग करने के लाभ क्या हैं?
गूगल को डॉक्टर से अधिक महत्व देना सही नहीं है क्योंकि इसकी वजह से उपचार में देरी हो सकती है। इसके बावजूद, गूगल का प्रयोग करने के निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:
- सेहत के प्रति लोगों में जागरूकता का बढ़ना- इससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी जानकारी मिलती है। इसके परिणामस्वरूप उनमें सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
- इंटरनेट का प्रयोग- भारत में सरकार डिजिटलिकरण लाना चाहती है, ताकि हर व्यक्ति डिजिटल हो सके। आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च 2024 तक भारत में कुल 954.40 मिलियन इंटरनेट सब्सक्राइबर में से 398.35 मिलियन ग्रामीण इंटरनेट सब्सक्राइबर हैं। इसके अलावा, अप्रैल 2024 तक देश के 6,44,131 गांवों (भारत के रजिस्ट्रार जनरल के अनुसार गांवों का डेटा) में से 6,12,952 गांवों में 3G/4G मोबाइल कनेक्टिविटी है। इस प्रकार, 95.15% गांवों में इंटरनेट की सुविधा है।
- बीमारी के बारे में जानकारी- कई बार जब लोग अपने लक्षणों को सर्च करते हैं, तो उन्हें कई बीमारियों के नाम मिलते हैं। ऐसे में जागरूक लोग तुरंत डॉक्टर से परामर्श करके न केवल अपनी दूविधा को दूर करते हैं बल्कि अच्छा उपचार भी प्राप्त कर लेते हैं।

डॉ कनिका गुप्ता, DM, न्यूरोएनेस्थेसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर, एम्स, ऋषिकेश बताती हैं, “मरीज को उसके स्वास्थ्य की बुनियादी जानकारी होना उसके समग्र उपचार प्रणाली के लिए काफी सहायक है क्योंकि इसकी सहायता से मरीज अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में खुलकर बात कर सकता है। अत: उसके जल्दी ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।”
गूगल पर आंख-मूंदकर कर भरोसा करने के दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं?
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि ‘किसी भी चीज़ पर आंख-मूंदकर विश्वास करना नुकसादायक होता है।’ यह बात गूगल पर भी लागू होती है। इसके अलावा, गूगल पर अत्यधिक भरोसा करने के निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं:
- गलत सूचना और भ्रामक उपचार- सोशल मीडिया पर मशहूर होने के लिए कुछ लोग Health rumors फैलाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं। ये Health rumors रोगी देखभाल को प्रभावित कर सकते हैं।
- गूगल संदर्भ नहीं जानता है – यह आपके पारिवारिक इतिहास, चिकित्सा इतिहास या सहवर्ती (coexisting) लक्षणों का आकलन नहीं कर सकता है। इसके बावजूद लोग इसके द्वारा दी गई जानकारी को सच मान लेते हैं।

डॉ. प्रदीश मोहन, MBBS, PGDMLE, MBA (HCM) और MEM विशेषज्ञ ,बिलरोथ अस्पताल, चेन्नई बताते हैं, “मुख्य समस्या Google, ChatGPT या सोशल मीडिया नहीं हैं बल्कि, मुख्य समस्या लोग द्वारा जानकारी को समझना है। वे आधी-अधूरी जानकारी को ही सच मान लेते हैं और उसका पालन करने लगते हैं। यह उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अत: उन्हे अपने डॉक्टर पर विश्वास करना चाहिए।”
निष्कर्ष
वर्तमान समय में गूगल हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग सभी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर के लिए इसका प्रयोग करते हैं। इनमें स्वास्थ्य संबंधी प्रश्न भी शामिल हैं। हालांकि, गूगल लोगों के जीवन को आसान बना सकता है लेकिन यह मेडिकल सांइस या डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता है। अत: इसे ‘डॉ. गूगल’ की उपाधि देना सही नहीं है।
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