भारत में बच्चों की मृत्यु के मुख्य कारणों में दस्त (डायरिया) तीसरे स्थान पर है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में लगभग 13% मौतें दस्त के कारण होती हैं। दुनिया भर में हर साल दस्त के लगभग 4 अरब मामले सामने आते हैं, जिनमें से अधिकतर विकासशील देशों में पाए जाते हैं। भारत में छोटे बच्चों के लिए यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।
दस्त (डायरिया) का संक्षिप्त परिचय
दस्त एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है जिसमें बार-बार पानी जैसा मल, पेट में दर्द, ऐंठन, मतली, उल्टी, बुखार और कमजोरी होती है। हालांकि, यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों में आम है।
दस्त पाचन तंत्र की समस्या है। लंबे समय तक या गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है। इसके कारण शरीर में पानी और खनिजों (पोटैशियम, मैग्नीशियम) की कमी हो सकती है, जो गंभीर हालत में किडनी फेलियर का कारण बन सकती है।
डॉक्टर की राय

डाॅ. हरेन्द्र नेगी, बेस हाॅस्पिटल, पिथौरागढ़ उत्तराखण्ड बताते हैं कि “डायरिया के कारण बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी संक्रमण, दवाओं के दुष्प्रभाव, पाचन समस्या या खाद्य असहिष्णुता हो सकते हैं। इसके प्रकार हैं तीव्र, क्रॉनिक, संक्रमणजनित, ऑस्मोटिक, स्रावी और सूजनजनित। इसके बचाव में पर्याप्त पानी और पोषक तत्व लेना, चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाइयां लेना, स्वच्छता बनाए रखना और साफ और सुरक्षित भोजन व पानी का सेवन करना शामिल है।”
दस्त सामान्य है, लेकिन गंभीर भी हो सकता है। अगर यह तीव्र या बार-बार हो रहा है, तो आंत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। यदि कारण संक्रमण है, तो संक्रामक रोग विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए, और अगर यह खाद्य एलर्जी या प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित है, तो प्रतिरक्षा सहायता लेनी चाहिए।
दस्त की स्थिति में प्रोबायोटिक्स की भूमिका
डायरिया के दौरान और बाद में प्रोबायोटिक्स लेना लाभदायक होता है। प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं। इसमें छोटी और बड़ी आंत प्रभावित होती हैं। संक्रमण या सूजन के कारण पानी और पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से नहीं होता है, जिससे बार-बार पानी जैसा मल आता है, पेट में ऐंठन और दर्द होता है, और शरीर में निर्जलीकरण (dehydration) हो सकता है।
दस्त से बचाव के तरीके
इस दौरान और उसके बाद प्रभावित व्यक्ति को ओआरएस देकर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी पूरी करनी चाहिए। साथ ही साफ पानी, नारियल पानी, और पचने में आसान भोजन लेना चाहिए। आराम करना, स्वच्छता बनाए रखना और बाहर का खाना न खाना भी आवश्यक है। इसका समय पर उपचार न करने पर यह जानलेवा हो सकता है।
इससे होने वाली गंभीर स्थितियों में मुख्य कारण निर्जलीकरण है, जिसमें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। यह विशेष रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों में जोखिमपूर्ण होता है, क्योंकि पोषक तत्वों का अवशोषण रुक जाता है और शरीर कमजोर हो जाता है।
सरकार के प्रयास
सरकार द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा और अभियान चलाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, 2025 में केंद्र शासित प्रदेश में “ओआरएस और जिंक टैबलेट” अभियान आयोजित किया गया, जिसमें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, सामग्री वितरण और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में घर-घर जागरूकता अभियान शामिल था। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य इससे होने वाली मौतों को रोकना और लोगों को सुरक्षित रखना है।
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