“बिना डाइटिंग, बिना एक्सरसाइज, सिर्फ 30 दिनों में 12 किलो वजन कम करें।”
“100% हर्बल, डॉक्टर द्वारा प्रमाणित, कोई साइड इफेक्ट नहीं।”
“सिर्फ एक कोर्स और पेट की सारी चर्बी गायब।”
अगर लोग सोशल मीडिया चलाते हैं, तब उन्होंने ऐसे विज्ञापन जरूर देखे होंगे। इनमें ‘पहले और बाद’ की तस्वीरें, सफेद कोट पहने कथित डॉक्टर, हजारों संतुष्ट ग्राहकों के दावे और कुछ ही दिनों में वजन घटाने का वादा किया जाता है। कई लोग इन विज्ञापनों पर भरोसा कर लेते हैं और इन्हें अपनी समस्या का आसान समाधान मानते हैं।
लेकिन गुरुग्राम में सामने आए एक मामले ने इन दावों की सच्चाई उजागर कर दी। हरियाणा पुलिस ने उद्योग विहार में चल रहे एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया। आरोप है कि यहां से सोशल मीडिया के जरिए, विशेषकर महिलाओं को, वजन घटाने के नाम पर तथाकथित हर्बल उत्पाद बेचे जाते थे। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी खुद को डॉक्टर, डाइटिशियन या ब्यूटी एक्सपर्ट बताकर लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर उन्हें महंगे उत्पाद खरीदने के लिए मनाते या दबाव डालते थे।
यह सिर्फ एक फर्जी कॉल सेंटर का मामला नहीं है। यह उस तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन कारोबार की एक मिसाल है, जो लोगों की शरीर को लेकर असुरक्षा और जल्दी वजन घटाने की चाह का लाभ उठाकर करोड़ों रुपये कमा रहा है।
महिलाएं क्यों बन रही हैं आसान शिकार?
समाज में महिलाओं पर सुंदर और पतला दिखने का दबाव अक्सर ज्यादा होता है। शादी, गर्भावस्था के बाद बढ़ा वजन, पीसीओएस, थायरॉयड, रजोनिवृत्ति या बढ़ती उम्र जैसी वजहों से वजन कम करना आसान नहीं होता है। ऐसे में जब सोशल मीडिया पर बिना डाइट या एक्सरसाइज के जल्दी वजन घटाने का दावा दिखता है, तब कई महिलाएं उस पर भरोसा कर लेती हैं। यही बात ठगों के लिए सबसे बड़ा मौका बन जाती है।
नीतू शर्मा भी ऐसे ही एक विज्ञापन के झांसे में आ गई थीं। उन्होंने वजन घटाने वाले उत्पादों पर करीब 20 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन न तो वजन कम हुआ और न ही कोई लाभ मिला।
पूरा नेटवर्क कैसे काम करता है?
पुलिस जांच के अनुसार ऐसे गिरोह पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन चलाते हैं। इन विज्ञापनों में लोगों से उनका नाम और मोबाइल नंबर भरवाया जाता है। इसके बाद कॉल सेंटर से फोन आता है।
कॉलर खुद को डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डाइट एक्सपर्ट बताता है। वह वजन, उम्र, बीमारी, खान-पान और जीवनशैली से जुड़े कई सवाल पूछता है ताकि सामने वाले को भरोसा हो जाए कि वह किसी विशेषज्ञ से बात कर रहा है। इसके बाद महंगे हर्बल पाउडर, कैप्सूल या डिटॉक्स पैकेज खरीदने की सलाह दी जाती है। अक्सर कहा जाता है कि “ऑफर आज ही खत्म हो जाएगा”, जिससे ग्राहक तुरंत भुगतान कर देते हैं।
‘मैजिकल वेट लॉस’ का दावा कितना सही?

गरिमा देव वर्मा, आहार विशेषज्ञ (Dietitian) और प्रमाणित डायबिटिक एजुकेटर (Certified Diabetic Educator), MSc फूड एंड न्यूट्रिशन बताती हैं, “ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि कोई हर्बल दवा, चाय, पाउडर या कैप्सूल बिना खान-पान और शारीरिक गतिविधि में बदलाव किए तेजी से वजन कम कर सकता है।”
वे आगे बताती हैं कि “वजन घटाना एक जटिल जैविक प्रक्रिया है, जिसमें भोजन, शारीरिक गतिविधि, नींद, हार्मोन, मानसिक स्वास्थ्य और कई अन्य कारकों की भूमिका होती है। मोटापे के कुछ मामलों में दवाओं या सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है लेकिन उनका प्रयोग केवल योग्य डॉक्टर की निगरानी में किया जाता है।”
सोशल मीडिया पर झूठ कैसे सच जैसा दिखता है?
अमित पांडे, तकनीक विशेषज्ञ, बताते हैं कि “डिजिटल मार्केटिंग ने फर्जी दावों को पहले से ज्यादा असरदार बना दिया है। आज कोई भी व्यक्ति कुछ घंटों में सोशल मीडिया पेज बनाकर हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। नकली रिव्यू, AI से एडिट की गई तस्वीरें, खरीदे गए फॉलोअर्स और सफेद कोट पहनकर बनाए गए वीडियो लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं।” उनके अनुसार, AI आने के बाद इस तरह की धोखाधड़ी और भी बढ़ गई है।
कई बार कार्रवाई के बाद एक पेज बंद हो जाता है, लेकिन ठग उसी नाम या किसी नए नाम से दूसरा पेज बनाकर फिर से लोगों को निशाना बनाने लगते हैं।
इन दावों पर भरोसा करना क्या नुकसानदायक है?

इन दावों पर भरोसा करना वाकई नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि इसमें कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं होती और इसका प्रयोग केवल लोगों को झांसा देने के लिए होता है। गरिमा देव वर्मा, आहार विशेषज्ञ (Dietitian) और प्रमाणित डायबिटिक एजुकेटर (Certified Diabetic Educator), MSc फूड एंड न्यूट्रिशन बताती हैं, अगर कोई इस तरह के मैजिकल दावों पर लंबे समय तक भरोसा करे या तत्काल भी भरोसा करे, तो निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं-
- पोषक तत्वों की कमी: बहुत सख्त आहार या बिना वैज्ञानिक प्रमाण वाले हर्बल उत्पादों के प्रयोग से शरीर को आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और खनिज पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते, जिससे पोषण की कमी हो सकती है।
- लिवर और किडनी को नुकसान: कुछ हर्बल उत्पादों में नुकसानदायक तत्व या मिलावट हो सकती है, जो लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
- पाचन संबंधी समस्याएं: ऐसे उत्पादों के सेवन से मतली, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
- वजन दोबारा बढ़ना: तेजी से वजन घटाने वाले तरीके लंबे समय तक अपनाना मुश्किल होता है। इन्हें छोड़ने के बाद अक्सर घटा हुआ वजन फिर से बढ़ जाता है।
- सही इलाज में देरी: अप्रमाणित हर्बल उपायों पर भरोसा करने से मोटापे या उससे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सही समय पर निदान और वैज्ञानिक उपचार शुरू होने में देरी हो सकती है।
- आर्थिक नुकसान और झूठी उम्मीद: जल्दी वजन घटाने का दावा करने वाले कई उत्पाद काफी महंगे होते हैं, लेकिन अक्सर वे अपने वादों पर खरे नहीं उतरते। इससे लोगों को आर्थिक नुकसान होता है और वे झूठी उम्मीदों के जाल में फंस जाते हैं।
किन दावों से तुरंत सतर्क हो जाएं?
अगर कुछ चीज़ों का ध्यान रखा जाए, तब सर्तकता के साथ अनहोनी को टाला जा सकता है। यदि कोई विज्ञापन यह दावा करता है कि
- बिना आहार में बदलाव और बिना एक्सरसाइज के वजन कम होगा।
- 10–15 दिन में कई किलो वजन घट जाएगा।
- 100 प्रतिशत गारंटी है।
- केवल हर्बल होने के कारण कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा।
- डॉक्टर से केवल व्हाट्सऐप या फोन पर ही “कंसल्टेशन” मिलेगा।
- सीमित समय का ऑफर लेकर तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया जा रहा है।
तो फिर ऐसे दावों को संदेह की नजर से देखना चाहिए।
भारत में मोटापे की बढ़ती चुनौती
यूनिसेफ के अनुसार, भारत में अधिक वजन और मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। महिलाओं में इसकी दर पहले की तुलना में अधिक हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी चेतावनी दे चुका है कि मोटापा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कई प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है।
यही कारण है कि तेजी से वजन घटाने की चाह रखने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है और इसी मांग का लाभ फर्जी कारोबारी उठा रहे हैं।
क्या करें?
यदि लोग वजन कम करना चाहते हैं, तो किसी योग्य डॉक्टर, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ से सलाह लें। किसी भी ऐसे उत्पाद से बचें जो चमत्कारी परिणाम का दावा करता हो या जिसके पीछे वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध ना हों। सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह मानने के बजाय उनकी विश्वसनीयता की जांच करें।
निष्कर्ष
गुरुग्राम का मामला सिर्फ एक फर्जी कॉल सेंटर का नहीं है। यह उस बड़े ऑनलाइन कारोबार की तस्वीर दिखाता है, जो महिलाओं की असुरक्षाओं, शरीर को लेकर समाज के दबाव और जल्दी वजन घटाने की चाह का लाभ उठाकर उनसे पैसे ठग रहा है और उनकी सेहत को भी नुकसान पहुंचा रहा है।
जब तक सोशल मीडिया पर ऐसे भ्रामक स्वास्थ्य विज्ञापनों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी और लोग किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले वैज्ञानिक जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह नहीं लेंगे, तब तक ‘चमत्कारी वजन घटाने’ के ऐसे झांसे नए-नए तरीकों से सामने आते रहेंगे।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at factcheck@thip.in. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.


