देश में फर्जी और झोलाछाप दंत चिकित्सक एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। लोग इन्हें असली दंत चिकित्सक समझकर इलाज कराते हैं, जिससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं। कई मामलों में मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।
झोलाछाप दंत चिकित्सक से इलाज कराने के जोखिम

डॉ. विकास गुप्ता, ऑर्थोडॉन्टिस्ट, सी स्कीम स्थित लालगढिय़ा डेंटल केयर एंड ऑर्थोडॉन्टिस्ट सेंटर, सरदार पटेल मार्ग, जयपुर बताते हैं कि ” झोलाछाप दंत चिकित्सक दंत समस्याओं के इलाज के नाम पर बिना जांच और सुरक्षा के खतरनाक तरीके अपनाते हैं। इससे जबड़े की हड्डी खराब हो सकती है, दांत सड़ सकते हैं और गंभीर संक्रमण हो सकता है। कई बार अत्यधिक खून बहने और गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।”
डॉ. गुप्ता आगे बताते हैं कि “गांव और कस्बों में रूट कैनाल को आज भी झोलाछाप से “नस निकलवाना” कहकर कराया जाता है। ये लोग बिना एक्स-रे और सही दवा के गलत औजारों से इलाज करते हैं, जिससे हड्डी गल सकती है और चेहरा बिगड़ने का खतरा रहता है। कुछ मामलों में बोलने और खाने में परेशानी हो जाती है।”
इसलिए दांतों संबंधी समस्याओं का इलाज हमेशा योग्य दंत चिकित्सकों से ही कराना चाहिए। साफ-सफाई और समय पर सही इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन का प्रयास
इंडियन डेंटल एसोसिएशन की जम्मू शाखा ने कई साल पहले ही फर्जी दंत इलाज का मुद्दा उठाया था। संगठन बताते हैं कि सड़क किनारे इलाज करने वाले लोग बिना साफ औजारों के इलाज करते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां फैलती हैं। गलत दंत उपचार से मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ता है।
हाल के वर्षों में इसके गंभीर नतीजे सामने आए हैं। विभिन्न राज्यों में झोलाछाप इलाज के बाद लोगों की मौत तक हो चुकी है। इन घटनाओं से पता चलता हैकि यह समस्या सिर्फ दांतों की नहीं, बल्कि जानलेवा बन चुकी है।

डॉ. राहुल शर्मा, प्रिंसिपल, टांटिया डेंटल कॉलेज, श्रीगंगानगर बताते हैं कि “पहले समय में नाई दांत निकालकर इलाज करते थे। आज भी झोलाछाप दंत चिकित्सक उसी सोच पर काम कर रहे हैं कि दांत दर्द हो तो उसे निकलवा दो, जबकि आज सही इलाज से दांत बचाया जा सकता है—अगर मरीज योग्य डेंटिस्ट के पास जाए।”
डॉ. शर्मा आगे बताते हैं कि “झोलाछाप लोग गलत फहमियां फैलाते हैं, जैसे दांत से “कीड़ा” निकालने का दावा। वास्तव में यह बैक्टीरिया होता है, जो गंदगी, मीठा ज्यादा खाने और ब्रश न करने से दांत को नुकसान पहुंचाता है।”
दंत चिकित्सक रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT) से दांत की नस का इलाज कर दांत बचाते हैं और बाद में फिलिंग या कैप लगाते हैं। झोलाछापों के पास सही उपकरण और जानकारी नहीं होती, इसलिए वे RCT नहीं कर पाते और दांत निकलवाने को कहते हैं। कई बार दर्द रोकने के लिए दांत में तेज केमिकल डाल देते हैं, जिससे हड्डी तक खराब हो सकती है, विशेषकर मधुमेह मरीजों में।
डॉ. शर्मा ने चेतावनी दी कि झोलाछाप बिना स्टरलाइज किए औजार प्रयोग करते हैं, जिससे हेपेटाइटिस और HIV जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। हालांकि, लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन फर्जी दंत चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अभी भी आवश्यक है।
शोध से प्राप्त जानकारी
बेंगलुरु के म.एस. रामैया डेंटल कॉलेज के एक शोध में झोलाछाप दंत चिकित्सकों को एक गंभीर बताया गया है। इस शोध के अनुसार इसका मुख्य कारण झोलाछापों और कुछ गलत डेंटिस्टों के बीच अवैध मिलीभगत है। यह समस्या तभी खत्म हो सकती है जब इस मिलीभगत को पूरी तरह से रोका जाए। इसके लिए सरकार, डेंटल काउंसिल, सख्त कानून और नियमित निगरानी आवश्यक है।
अन्य शोध से पता चलता है कि भारत में करीब 10 लाख बिना योग्यता वाले स्वास्थ्यकर्मी सक्रिय हैं, जिनमें कई दांतों संबंधी समस्याओं का इलाज करते हैं। देश में लगभग 2.7 लाख पंजीकृत डेंटिस्ट हैं, लेकिन फर्जी डेंटिस्टों की संख्या इससे कहीं अधिक है। हालांकि, अभी तक इनकी आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई हो, लेकिन हर राज्य में इनके हजारों की संख्या में सक्रिय होने के साक्ष्य उपलब्ध हैं।
डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने बिना लाइसेंस काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और बताया गया है कि अपंजीकृत चिकित्सक मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई बहुत कम है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मुंह और दांतों का स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य से संबंधित है। दांत और मसूड़ों की बीमारियां दुनिया की मुख्य बीमारियों में से हैं और करीब 3.5 अरब लोग इससे प्रभावित हैं।
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