वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार की बीमारियां देखने को मिलती हैं, जिनमें कैंसर भी शामिल है। दुनियाभर में अधिकांश लोगों की मृत्यु कैंसर की वजह से हो जाती है। चूंकि, लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है, इसलिए हर वर्ष कैंसर के मामले बढ़ते हैं। इस लेख में हमने पूर्वात्तर राज्यों में बढ़ रहे कैंसर के मामलों पर चर्चा की है।
पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है। एक ओर, वे रोज़गार के सीमित अवसरों से जूझते हैं तो वहीं दूसरी ओर, वहां पर स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होती है।
टीकाकरण की जानकारी होना
अगर उत्तर-पूर्वी राज्य असम और अरुणाचल प्रदेश की बात करें, तो वहां महिलाओं के स्वास्थ्य को काफी हद तक प्रभावित करने वाले कारकों में से एक विवाह की आयु है। असम में 31.8% महिलाओं की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले हो गई, जिसमें NFHS-4 से NFHS-5 तक 1% की वृद्धि हुई है। जबकि अरुणाचल प्रदेश में 18.9% महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हो गई, जिसमें NFHS-4 से NFHS-5 तक थोड़ा सुधार हुआ है। असम और अरुणाचल प्रदेश की प्रजनन दर (fertility rate) 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है।

गायत्री गोगोई, कैंसर शोधकर्ता ICMR एवं एसोसिएट प्रोफेसर पैथोलॉजी AMCH बताती हैं, “उत्तर-पूर्वी राज्यों की बात करें तो सर्वाइकल कैंसर के मामले साल 2010 से पहले सबसे ज़्यादा थे लेकिन 2010 से ब्रेस्ट कैंसर ने सर्वाइकल कैंसर को पीछे छोड़ दिया है। सर्वाइकल (गर्भाशय का निचला हिस्सा) महिलाओं में ही होता है इसलिए सर्वाइकल कैंसर सिर्फ महिलाओं को ही होता है लेकिन पुरुषों में भी HPV से संबंधित कुछ कैंसर हो सकते हैं। इसी वजह से भारत में HPV वैक्सीन फिलहाल मुख्य रूप से लड़कियों और महिलाओं के लिए उपलब्ध है, ताकि सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सके।”
गायत्री गोगोई आगे बताती हैं कि “ HPV टीका अभी भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) में शामिल नहीं है, अर्थात् यह सभी बच्चों को मुफ्त नहीं दिया जा रहा है। कुछ राज्य जैसे सिक्किम और तमिलनाडु, जहां इस बीमारी के मामले सबसे ज़्यादा हैं, वहां सरकार ने टीकाकरण शुरू कर दिया है लेकिन पूरे देश में अभी लागू नहीं हुआ है। अगर माता-पिता चाहें, तो अपने बच्चों को या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर यह टीका लगवा सकते हैं”
जागरुकता ही बचाव की कुंजी
डॉ. गायत्री गोगोई आगे बताती हैं कि “सर्वाइकल कैंसर को अब टीकाकरण और स्क्रीनिंग के जरिए रोका जा सकता है। समय पर HPV का टीका लेने और पैप स्मीयर टेस्ट से जांच कराने से इस कैंसर की रोकथाम संभव है। जागरूकता की कमी की वजह से महिलाएं अक्सर देर से जांच कराती हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।”
क्या कहते हैं विशेषज्ञ

चंद्राणी सिन्हा, मेडिसिन्स सेन्स फ्रंटियर्स फेलो, 2023 बताती हैं, “कैंसर के मामलें केवल असम में ही नहीं बल्कि मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश में भी देखने को मिलते हैं। मुझे लगता है कि हमें गंभीर विषयों पर चर्चा करनी चाहिए ताकि लोग इन पर बात करने से न कतराएं।”
चंद्राणी आगे बताती हैं, “सर्वाइकल कैंसर आमतौर पर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) नाम के एक यौन संचारित वायरस की वजह से होता है। HPV के कई प्रकार होते हैं, लेकिन टाइप 16 और 18 सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि ये लगभग 70% सर्वाइकल कैंसर के मामलो के लिए जिम्मेदार होते हैं। अधिकतर HPV संक्रमण शरीर खुद ही साफ कर देता है, लेकिन अगर यह संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है, तो यह गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव कर सकता है, जो बाद में कैंसर का रूप ले सकता है।।”
कैंसर पर और शोध करने की आवश्यकता
शोध से पता चलता है कि मिजोरम के आइजोल जिले में पुरुषों में कैंसर के सबसे ज़्यादा मामले पाए गए जबकि अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे जिले में महिलाओं में यह सबसे ज़्यादा है। मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में पुरुषों और महिलाओं दोनों में एसोफैजियल कैंसर (oesophageal cancer) के सबसे ज़्यादा मामले पाए गए। आइजोल में पुरुषों में पेट के कैंसर के मामले भी सबसे ज़्यादा थे, जबकि पापुमपारे में महिलाओं में पेट, लीवर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर सबसे ज़्यादा थे।
निष्कर्ष
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसके विभिन्न कारण हैं, जैसे– तंबाकू और शराब का अत्यधिक सेवन, खराब खान-पान, साफ-सफाई की कमी और समय पर इलाज या जांच न होना। इन इलाकों में अस्पताल और इलाज की सुविधाएं भी कम हैं, जिससे लोगों को सही समय पर बीमारी का पता नहीं चलता है। अगर लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें, तंबाकू-शराब छोड़ें और समय-समय पर जांच करवाएं, तो कैंसर के मामलों को कम किया जा सकता है।
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