स्तन कैंसर विश्वभर के लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में इसका प्रकोप अधिक देखने को मिलता है। इसके मुख्य कारणों में जानकारी का अभाव और स्वास्थ्य सुविधाओं का न होना शामिल हैं।
विश्व स्वास्थय संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है। वर्ष 2022 में दुनियाभर से 2.3 मिलियन स्तन कैंसर के मामले सामने आए हैं, जिसमें 6.70 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल ब्रेस्ट कैंसर इनिशिएटिव (GBCI), जो साल 2021 में स्थापित की गई थी, दुनिया भर के और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों को एक साथ लाती है। इसका मुख्य उद्देश्य हर साल स्तन कैंसर को 2.5% तक कम करना है। इससे 20 वर्षों की अवधि में लगभग 2.5 मिलियन ज़िदगियों को बचाया सकता है।
भारत में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है, जो सभी महिला कैंसर का 28.2% है। अगर समय रहते इसके लक्षणों पर ध्यान ना दिया जाए, तो कैंसर घातक रूप धारण कर सकता है।
कम उम्र में शादी होना

रूपाली देवी, ग्राम ल्वेशाल, रामगढ़, नैनीताल, बताती हैं ” पर्वतीय क्षेत्रों में आमतौर पर कम उम्र में शादी होती है, जिस कारण महिलाएं कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और प्रथम प्रसव के समय उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।”
अपने स्वयं के अनुभव के बारे में वे बताती हैं कि उनका विवाह 20 साल की उम्र में ही हो गया था और 21 वर्ष में वे मां बन गई थी। उनके गांव और उसके आस-पास के समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में डाॅक्टरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें प्रसव (delivery) के लिए हल्द्वानी बेस हाॅस्पिटल जाना पड़ा। इसके अलावा प्रसव के बाद उन्हें स्तन से सम्बन्धित समस्याओं से जूझना पड़ा और मूल स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त न होने के कारण मैदानी इलाकों की ओर रुख करना पड़ा।
लंबी दूरी तय करना

पर्वतीय महिलाएं भी स्तन कैंसर के प्रकोप से अछूती नहीं हैं। डाॅ गीता पुजारी, आरोही आरोग्य केन्द्र, सतोली, नैनीताल बताती हैं “कैंसर एक आनुवांशिक रोग है। पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को अस्पताल तक जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसके साथ ही जागरूकता की कमी होने के कारण भी वे अपने स्तनों का स्वयं परीक्षण नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा उनके लिए स्तन कैंसर के शुरूआती लक्षणों की पहचान करना भी मुश्किल होता है। इसके परिणामस्वरूप यहां पर स्तन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।”
स्तन कैंसर से बचने के तरीकों के बारे में वे बताती हैं, महिलाओं को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा थकान महसूस होने पर आराम करना चाहिए, जिससे इसके प्रकोप को कम किया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्र में शारीरिक गतिविधियां

डाॅ. निशा जोशी, महिला रोग विशेषज्ञ, महिला हाॅस्पिटल, हल्द्वानी, नैनीताल स्तन कैंसर के कुछ महत्वपूर्ण कारणों पर अपनी राय देते हुए बताती हैं “ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में शारीरिक गतिविधियां अधिक होती हैं, जिससे शरीर अधिकतर सुचारू रहता है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में तनाव ,आधुनिकरण जीवनशैली, शराब का सेवन, धूम्रपान करना, प्रदूषित वातावरण और मोटापा स्तन कैंसर की संभावना को बढ़ा रहे हैं।”
महिलाओं में सामान्य रूप में स्तन कैंसर के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं-
- स्तन या स्तन के आसपास गांठ या सूजन
- दोनों स्तनों के आकार/आकृतियों में परिवर्तन
- स्तन से असमामान्य स्राव
- स्तन में दर्द होना
- गर्भवती महिलाओं द्वारा नवजात को स्तनपान ना करा पाना
- बच्चा करने में देरी करना जैसे कारण स्तन कैंसर में योगदान देते हैं।
यदि किसी महिला को उपर्युक्त लक्षणों में से कोई महसूस होते हैं तो उसे तुंरत चिकित्सक से मिलना चाहिए ताकि इसका उपचार सही समय पर शुरू किया जा सके।
घबराने की बजाय इलाज कराना
डाॅ. निशा जोशी ने आगे बताया, “कभी-कभी स्तनों में गांठ महसूस होने पर घबराना नहीं चाहिए क्योंकि अधिकांश गांठ कैंसर नहीं होती हैं। इस स्थिति में चिकित्सीय जांच कराना आवश्यक है। गांठ के फिर से बनने की संभावना मुख्य रूप से उन महिलाओं में अधिक होती है जो पहले भी इससे पीड़ित हो चुकी हैं। इसके अलावा कीमोथेरेपी से गुजरने या अत्यधिक मात्रा में गर्भनिरोधक का सेवन करने से भी कैंसर की संभावना बढ़ सकती है।”
निष्कर्ष
स्तन कैंसर को लेकर जागरूक होना और दूसरों को भी जागरूक करना महत्वपूर्ण है। ऐसे करके अनगित ज़िदगियों को बचाया जा सकता है। इससे स्तन कैंसर की संभावना को कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं जागरूकता अभियान भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और लोगों को इसके प्रति जागरूक कर सकते हैं।
अन्य फीचर स्टोरी पढ़ें- पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना किसी चुनौती से कम नहीं एवं पर्वतीय क्षेत्र में मधुमेह को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी।
Disclaimer: Medical Science is an ever evolving field. We strive to keep this page updated. In case you notice any discrepancy in the content, please inform us at [email protected]. You can futher read our Correction Policy here. Never disregard professional medical advice or delay seeking medical treatment because of something you have read on or accessed through this website or it's social media channels. Read our Full Disclaimer Here for further information.

