बार-बार हाथ धोने की आदत, कहीं OCD तो नहीं!

सर्दियों का मौसम गुनगुनी धूप और रजाई की गर्मी के लिए जाना जाता है लेकिन कई बार सर्दियों के मौसम में मानसिक विकार बढ़ जाते हैं। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं OCD के बारे में…

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एक महिला अपनी बेटी को केवल इसलिए अपने बिस्तर पर नहीं बैठने देती क्योंकि उसे मासिक स्राव हो रहे हैं। इतना ही नहीं वो अपनी बच्ची को अपने रिश्तेदार के यहां भी नहीं लेकर जाना चाहती क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बेटी जहां-जहां बैठेगी, वो जगह गंदी हो जाएगी। 

वहीं एक महिला सर्दी के मौसम में भी कई बार करती है, बार-बार हाथ-पैर धोती है क्योंकि उसे लगता है कि उसका शरीर गंदा है। हर वक्त कपड़ों को धोना उसकी आदत में शुमार है और अगर ये सारी चीजें ना कर पा रही हो, तो रोने लगती है। 

कहीं बाहर से घर लौटने के बाद पहने हुए कपड़ों को धुले हुए कपड़ों के साथ केवल यह सोचकर ना रखना कि धुले हुए कपड़े अपवित्र हो जाएंगे या गंदे हो जाएंगे, हर समय घर की या अपनी वस्तुओं की सफाई करना और किसी भी बाहर की वस्तु को छूते ही अपने हाथों को फ़ौरन धो लेना, OCD यानी कि ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर की श्रेणी में आता है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा विकार है, जो बार-बार आने वाले विचारों (ऑब्सेशन) और अनिवार्य व्यवहारों (कंपल्सन) की विशेषता है। ये विचार और व्यवहार अत्यधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं और दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। 

Dr Binda Singh

मनोविश्लेषक डॉ. बिंदा सिंह बताती हैं, “OCD की समस्या खासतौर पर सर्दियों के मौसम में व्यापक रुप ले लेती है क्योंकि एक तो सूर्य की किरणें नहीं मिल पाती और वहीं दिन छोटा हो जाता है, जिससे अनेक काम छूट जाते हैं। सर्दी के मौसम में लोगों की सुबह भी देर से होती है और इधर-उधर के कामों को निपटाते-निपटाते सूरज के ढलने का वक्त हो जाता है। सामान्य तौर पर पुरुष तो अपने काम के सिलसिले में घर से निकल जाते हैं लेकिन महिलाएं घरों का काम समेटते रहती हैं और दिन छोटा होने के कारण काम पूरे नहीं हो पाते और यही धीरे-धीरे OCD का रुप लेने लगती हैं। ओसीडी का सटीक कारण अज्ञात है लेकिन माना जाता है कि यह मस्तिष्क में रसायनों के असंतुलन और आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण होता है।

डॉ. बिंदा सिंह बताती हैं कि ओसीडी के लक्षणों के बारे में जानना भी बेहद जरुरी है-

  • ऑब्सेशन: ये अनचाहे विचार हैं, जो आपके दिमाग में बार-बार आते हैं और आपको चिंतित या व्यथित करते हैं। उदाहरण के लिए आपको चीजों को सही से क्रम में रखने की आवश्यकता महसूस हो सकती है या ऐसा महसूस होना कि हर तरफ गंदगी फैली है। यह Obsessionअनेक प्रकार का हो सकता है।
  • कंपल्सन: ये दोहराव वाले व्यवहार या मानसिक क्रियाएं हैं, जिन्हें आप महसूस करते हैं कि आपको बार-बार करना ही होगा। भले ही वे तर्कहीन या अवांछित हो। उदाहरण के लिए आप बार-बार हाथ धो सकते हैं, चीजों को बार-बार गिन सकते हैं या बार-बार दरवाज़ों को बंद कर सकते हैं।

ओसीडी का इलाज कैसे किया जाता है?

ओसीडी के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। सबसे आम उपचारों में निम्नलिखित शामिल हैं।

  • संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी): यह थेरेपी मरीज के सोचने के तरीकों और व्यवहार को बदलने में मदद करती है।
  • एक्सपोजर और रिस्पांस प्रिवेंशन (ईआरपी): इस थेरेपी में मरीज को उन चीजों के संपर्क में लाया जाता है, जो उनके ऑब्सेशन को ट्रिगर करते हैं, जबकि इसमें मरीज को अपने कंपल्सन को पूरा करने से रोका जाता है।
  • मेडिकेशन: कुछ मामलों में दवाएं ओसीडी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

अपने पास आए एक केस को लेकर डॉ. बिंदा सिंह ने बताया, “एक बच्चे ने जूता खरीदा था लेकिन उसी दिन भूकंप आने के कारण उसे लगने लगा कि ये जूता सही नहीं है क्योंकि आज ही खरीदा और आज ही भूकंप आ गया। यही तर्क देकर उसने वो जूता पहनना छोड़ दिया लेकिन जब बात हुई और ये बातें सामने आईं, तो मैंने उसे वो ही जूता पहनने के लिए कहा कि वो जहां जाएगा, वही जूते पहन करके जाएगा। लगभग एक महीने तक उसने वो जूता पहना और उसके अंदर का कंपल्सन खत्म हो गया।” 

डॉ. बिंदा सिंह आगे बताती हैं कि ओसीडी से ग्रसित लोगों के साथ रहना थोड़ा मुश्किल हो जाता है क्योंकि रिश्तों में मन-मुटाव जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगती है। ऐसे में यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जो ओसीडी से ग्रसित है, तो आप निम्नलिखित तरीकों से उनकी मदद कर सकते हैं-

  • समर्थन और समझ प्रदान करें: यह महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें सुनें और उनके अनुभवों को समझें।
  • उपचार के लिए प्रोत्साहित करें: उन्हें उपचार के बारे में जानकारी प्रदान करें और उन्हें उपचार लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • दैनिक कार्यों में मदद : आप उन्हें दैनिक कार्यों को करने में मदद कर सकते हैं ताकि उन्हें कम तनाव महसूस हो।
  • व्यस्त रहेंः OCD से ग्रसित व्यक्ति को कलात्मक कामों, या उसके मनपसंद कार्यों में व्यस्त रखें।
  • जागरुक करें: ओसीडी के बारे में जितना अधिक जानेंगे, उतना ही बेहतर आप उनका समर्थन कर पाएंगे इसलिए जागरुकता भी एक तरीका हो सकता है। 

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Saumya Jyotsna
Saumya Jyotsna
An award-winning journalist, Saumya brings out stories about grassroot level developments in the public health sector.
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