अधिकांश भारतीय हाइपोथायरायडिज़्म के बारे में जानते हैं — यह एक स्थिति है जिसमें थाइराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि इसका मुख्य कारण एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसे हाशिमोटो रोग कहा जाता है।
यह बीमारी अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है या ठीक से समझी नहीं जाती, जबकि यह दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है — विशेषकर महिलाओं को। यहाँ एक आसान गाइड है जो आपको यह समझने में मदद करेगी कि हाशिमोटो रोग क्या है, यह सामान्य हाइपोथायरायडिज़्म से कैसे अलग है और डॉक्टर इसकी पहचान कैसे करते हैं।
हाशिमोटो रोग (Hashimoto’s disease) क्या है?
हाशिमोटो रोग, जिसे हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस भी कहा जाता है, एक ऐसी बीमारी है जिसमें आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से आपकी थायराइड ग्रंथि पर हमला करने लगती है। आमतौर पर, प्रतिरोधक प्रणाली आपके शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से बचाती है, लेकिन इस बीमारी में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचता है।
थायराइड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो आपकी गर्दन के नीचे स्थित होती है। यह ग्रंथि ऐसे हार्मोन बनाती है जो आपके शरीर की ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म), ऊर्जा स्तर, ह्रदय की धड़कन, पाचन और कई अन्य चीजों को नियंत्रित करते हैं।
हाशिमोटो रोग में, शरीर धीरे-धीरे थायराइड को नुकसान पहुँचाता है, जिससे यह समय के साथ ठीक से काम करना बंद कर देती है। इसके परिणामस्वरूप हाइपोथायरायडिज़्म — अर्थात् एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें थायराइड पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती है।
हाशिमोटो रोग (Hashimoto’s disease) और हाइपोथायरायडिज़्म (hypothyroidism): इनमें क्या अंतर है?
इन दोनों को अक्सर एक समझा जाता है लेकिन ये दो अलग-अलग चीज़े हैं:
| हाशिमोटो रोग | हाइपोथायरायडिज़्म |
| यह एक बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड ग्रंथि पर हमला करती है | जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बनाती है |
| अक्सर हाइपोथायरायडिज़्म का कारण बनता है | हाशिमोटो, सर्जरी, रेडिएशन या आयोडीन की कमी से हो सकता है |
| हार्मोन स्तर गिरने से पहले भी लक्षण नज़र आ सकते हैं | जब हार्मोन स्तर कम हो जाता है, तब लक्षण नज़र आते हैं |
| हार्मोन और एंटीबॉडी टेस्ट दोनों से पता चलता है | मुख्य रूप से हार्मोन टेस्ट से पता चलता है |
संक्षेप में: हैशिमोटो रोग आमतौर पर हाइपोथायरायडिज़्म का कारण बनता है, विशेषकर 30 से 50 वर्ष की महिलाओं में।
हाशिमोटो रोग के लक्षण
हाशिमोटो रोग के लक्षण धीरे-धीरे नज़र आते हैं, इसलिए शुरुआत में इसका पता नहीं चल पाता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं: हर समय थकान महसूस होना, बिना कारण वजन बढ़ना, ज्यादा ठंड लगना, सूखी त्वचा और झड़ते या पतले होते बाल, अवसाद या मूड स्विंग, दिल की धड़कनों का धीमा होना, सूजा हुआ या फूला हुआ चेहरा, आवाज का भारी होना या गले में सूजन (जिसे गॉइटर कहते हैं), अनियमित या बहुत भारी मासिक धर्म।
चूंकि, ये लक्षण हाइपोथायरायडिज़्म के सामान हैं, इसलिए इसके मूल कारण का पता लगाने के लिए टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है।
हाशिमोटो रोग का निदान कैसे किया जाता है?
अगर आपको लक्षण हैं, तो आपके डॉक्टर ये टेस्ट करवा सकते हैं। इन टेस्टों से डॉक्टर यह पता कर सकते हैं कि क्या हाशिमोटो रोग का कारण हाइपोथायरायडिज़्म है:
- TSH टेस्ट (Thyroid-Stimulating Hormone): अगर TSH का स्तर ज्यादा है, तो इसका अर्थ है कि आपकी थायराइड ग्रंथि हार्मोन कम बनी रही है।
- फ्री T4 टेस्ट: यह टेस्ट थायराइड हार्मोन के स्तर को मापता है। अगर स्तर कम है, तो इसका अर्थ है कि आपको हाइपोथायरायडिज़्म हो सकता है।
- TPO एंटीबॉडी टेस्ट (Thyroid Peroxidase Antibodies): यह टेस्ट हाशिमोटो रोग का मुख्य टेस्ट है। अगर आपके शरीर में ज्यादा TPO एंटीबॉडी हैं, तो इसका अर्थ है कि आपकी प्रतिरोधक प्रणाली थायराइड पर हमला कर रही है।
इसका इलाज कैसे किया जाता है?

हालांकि, हाशिमोटो रोग का कोई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन इसे रोज़ाना थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट (आमतौर पर दवा के रूप में) से अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। यह हार्मोन के स्तर को सामान्य रखने में मदद करता है और लक्षणों को कम कर सकता है। इसके अलावा, इसे जीवनशैली और आहार में बदलाव के साथ भी प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। गरिमा देव वर्मा, आहार विशेषज्ञ (Dietitian) और प्रमाणित डायबिटिक एजुकेटर (Certified Diabetic Educator), MSc फूड एंड न्यूट्रिशन, दिल्ली, इस स्थिति से पीड़ित लोगों के लिए निम्नलिखित आहार सुझाव देती हैं:
- सेलेनियम से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे ब्राज़ील नट्स, टूना, झींगा और सूरजमुखी के बीज।
- जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे शेलफिश, मुर्गा, गोमांस, कद्दू के बीज और चना।
- आयोडीन थायराइड कार्य को नियंत्रित करने में मदद करता है, लेकिन इसका सेवन इस स्थिति से पीड़ित लोगों को सावधानीपूर्वक करना चाहिए। अत: इसे अपने आहार में शामिल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।
- विटामिन D ऑटोइम्यून स्थितियों से पीड़ित लोगों में आमतौर पर कम होता है, इसलिए इसे भोजन या सूरज की रोशनी से प्राप्त करना सबसे अच्छा है।
- आयरन की कमी से लोग थकान महसूस कर सकते हैं, इसलिए आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे पालक, दाल और लाल मांस खाना मददगार हो सकता है।
कुछ अतिरिक्त टिप्स हैं जिन्हें याद रखना चाहिए
- अपनी थायराइड की नियमित जांच कराएं और स्वस्थ रहें।
- खुद को भूखा न रखें या बहुत सख्त डाइट न अपनाएं।
- नियमित रूप से व्यायाम करें और तनाव को नियंत्रित करें।
- अच्छी तरह से सोएं।
- किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
निष्कर्ष
हाशिमोटो रोग एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसका इलाज न किया जाए तो इससे थकान महसूस हो सकती है। इसके बावजूद राहत की बात यह है कि इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आप हाइपोथायरॉयडिज़्म के लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।
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