मुंबई की पीआर प्रोफेशनल गायत्री सेठी के लिए एग फ्रीज कराने का निर्णय कोई लंबे समय से बनाई गई योजना नहीं था। यह निर्णय तब सामने आया, जब उन्होंने अपने पति के साथ परिवार बढ़ाने को लेकर बात की। इन दोनों को यह नहीं पता था कि वे कब बच्चे की योजना बना पाएंगे।
35 वर्षीय गायत्री बताती हैं, “यह मेरे लिए भविष्य को सुरक्षित रखने का एक व्यावहारिक निर्णय था। मैं लंबे समय से इसके बारे में नहीं सोच रही थी, लेकिन मैंने और मेरे पति ने मिलकर तय किया कि भविष्य के लिए हमारे पास विकल्प खुले रहने चाहिए।” गायत्री ने अपनी शुरुआती 30 की उम्र में अपने एग फ्रीज कराए। ये एग लगभग एक साल तक फर्टिलिटी क्लिनिक में सुरक्षित रखे गए। इस पूरी प्रक्रिया में हार्मोनल दवाएं देकर अंडाणु तैयार किए जाते हैं, फिर उन्हें निकालकर विशेष तरीके से सुरक्षित रखा जाता है। यह प्रक्रिया काफी महंगी भी थी।
वह बताती हैं, “एग निकालने और उन्हें सुरक्षित रखने की कुल लागत काफी ज्यादा थी, लेकिन मुझे लगा कि यह मेरे मानसिक सुकून और भविष्य की सुरक्षा के लिए एक निवेश है।” बाद में, जब दंपति ने बच्चा करने की योजना बनाई, तो उन्होंने आईवीएफ (IVF) की मदद ली। गायत्री ने 32 साल की उम्र में गर्भधारण किया। आज पीछे मुड़कर देखने पर वह मानती हैं कि उस निर्णय ने अनिश्चितता के समय उन्हें मानसिक राहत दी। वह बताती हैं, “एग फ्रीज कराने से मुझे उस समय काफी भरोसा और सुकून मिला। इसलिए मुझे लगता है कि मेरा यह निर्णय सही था।”
एग फ्रीजिंग पर बढ़ रही है खुलकर चर्चा
पहले एग फ्रीज कराने की बात सिर्फ डॉक्टरों और अस्पतालों तक सीमित रहती थी। लेकिन अब महिलाएं अपनी फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने के इस विकल्प पर खुलकर बात करने लगी हैं।
ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, 2030 तक भारत में एग फ्रीजिंग और एम्ब्रियो बैंकिंग का बाजार 632.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹5,400 करोड़) तक पहुंच सकता है। वहीं, 2024 से 2030 के बीच इस क्षेत्र में हर साल औसतन 17.4% की दर से वृद्धि होने का अनुमान है।
इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने में कई मशहूर हस्तियों की भी अहम भूमिका रही है। उद्यमी उपासना कोनिडेला ने खुलकर बताया है कि उन्होंने अपनी शुरुआती 30 की उम्र में अपने एग फ्रीज कराए थे। उनके अनुसार, इससे उन्हें मां बनने से पहले अपने स्वास्थ्य और करियर पर ध्यान देने की आजादी मिली।
इसके अलावा प्रियंका चोपड़ा जोनास, एकता कपूर और भारतीय क्रिकेटर मिताली राज जैसी कई जानी-मानी हस्तियों ने भी इस बारे में खुलकर बात की है। इससे यह सोच मजबूत हुई है कि आधुनिक तकनीक और सही योजना की मदद से महिलाएं अपनी फर्टिलिटी को भविष्य के लिए सुरक्षित रख सकती हैं।
महिलाएं एग फ्रीज कराने का निर्णय क्यों ले रही हैं?
फर्टिलिटी विशेषज्ञों के अनुसार भारत के शहरी इलाकों में एग फ्रीज कराने में महिलाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है।

डॉ. एरिका पटेल, क्लिनिकल लीड और वरिष्ठ सलाहकार, फर्टिलिटी चिकित्सा विभाग, सिम्स हॉस्पिटल, चेन्नई बताती है, “खासतौर पर 20 से 30 साल की उम्र की महिलाओं में एग फ्रीजिंग को लेकर दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।”
उनके अनुसार, “भारत के कई फर्टिलिटी क्लिनिक हर महीने एग फ्रीजिंग से जुड़े 500 से 800 तक पूछताछ प्राप्त कर रहे हैं। इससे साफ है कि लोगों में जागरूकता और इसकी मांग दोनों बढ़ रही हैं।”
डॉक्टर बताते हैं कि इसके पीछे समाज में हो रहे बदलाव भी एक बड़ी वजह हैं। आज महिलाएं पहले से ज्यादा उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं, अपने करियर पर ध्यान दे रही हैं और पहले की तुलना में देर से शादी कर रही हैं। डॉ. पटेल बताती हैं, “अब कई महिलाएं एग फ्रीजिंग को भविष्य के लिए अपने सभी प्रजनन विकल्प खुले रखने का एक तरीका मानती हैं। इससे वे अपनी जिंदगी और परिवार की योजना अपनी सुविधा के अनुसार बना सकती हैं।”
इस निर्णय के पीछे केवल एक कारण नहीं होता है। डॉ. पटेल बताती हैं, “कई महिलाएं अपनी फर्टिलिटी पर खुद नियंत्रण बनाए रखने और अपनी पसंद के समय पर मां बनने के लिए एग फ्रीजिंग करवाती हैं। वहीं, देर से शादी, व्यस्त करियर और कार्यस्थल की अपेक्षाएं जैसे सामाजिक कारण भी इस निर्णय को प्रभावित करते हैं।”
एग फ्रीजिंग कैसे होती है?
एग फ्रीजिंग, जिसे मेडिकल भाषा में ओओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन (Oocyte Cryopreservation) कहा जाता है, महिलाओं की फर्टिलिटी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की एक तकनीक है। इस प्रक्रिया की शुरुआत करीब 10–12 दिनों तक हार्मोनल इंजेक्शन देने से होती है, ताकि अंडाशय (ओवरी) एक से अधिक अंडाणु तैयार कर सके। इसके बाद हल्की बेहोशी (सेडेशन) में एक छोटी सर्जरी के जरिए अंडाणु निकाले जाते हैं। फिर इन्हें विट्रिफिकेशन नामक तकनीक से तेजी से फ्रीज करके फर्टिलिटी क्लिनिक के विशेष क्रायोजेनिक टैंकों में सुरक्षित रखा जाता है।
अगर महिला भविष्य में इन अंडाणुओं का प्रयोग करना चाहती है, तो उन्हें पिघलाया जाता है। इसके बाद लैब में आईवीएफ (IVF) की मदद से शुक्राणु के साथ फर्टिलाइजेशन कराया जाता है और तैयार भ्रूण (एम्ब्रियो) को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रक्रिया की सफलता काफी हद तक इस चीज़ पर निर्भर करती है कि अंडाणु फ्रीज कराते समय महिला की उम्र कितनी थी और अंडाणुओं की गुणवत्ता कैसी थी।डॉ. एरिका पटेल बताती हैं, “एग फ्रीजिंग भविष्य के लिए फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने में मदद करती है। लेकिन इसकी सफलता महिला की उम्र और फ्रीज किए गए अंडाणुओं की संख्या पर निर्भर करती है।”
वह यह भी स्पष्ट करती हैं कि एग फ्रीजिंग को भविष्य के लिए एक विकल्प के रूप में देखना चाहिए, न कि मां बनने की पक्की गारंटी के रूप में। डॉ. पटेल के अनुसार, “कई महिलाएं एग फ्रीजिंग कराने के बाद भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर लेती हैं। फ्रीज किए गए अंडाणुओं का प्रयोग आमतौर पर तब किया जाता है, जब बाद में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो पाता है।”
सही समय पर निर्णय लेना महत्वपूर्ण
एग फ्रीजिंग में सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर निर्णय लेना है। पूर्णिमा सूद, संस्थापक और फर्टिलिटी काउंसलर, फर्टिलिटी मंत्रा बताती हैं कि अधिकांश महिलाएं इस विकल्प के बारे में तब सोचती हैं, जब काफी देर हो चुकी होती है।
वह बताती हैं, “मेरे पास आने वाली लगभग 80–90% महिलाएं 34 या 35 साल की होती हैं। जबकि आदर्श रूप से महिलाओं को 20 की उम्र के आखिर में ही एग फ्रीजिंग के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए।” विशेषज्ञों के अनुसार, 30 साल की शुरुआती उम्र के बाद अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
पूर्णिमा सूद एक 41 वर्षीय महिला का उदाहरण देती हैं, जो सही जीवनसाथी नहीं मिलने के कारण अपने एग फ्रीज कराना चाहती थीं। वह बताती हैं, “उस उम्र में एग फ्रीजिंग मुश्किल हो जाती है, क्योंकि अंडाणुओं की गुणवत्ता पहले ही काफी कम हो चुकी होती है।”
वह एक और महिला का उदाहरण देती हैं, जिसने करीब चार साल तक यह फैसला टाल दिया। 35 साल की उम्र के बाद जब उसने एग फ्रीजिंग कराई, तो कई बार प्रक्रिया दोहराने के बावजूद सिर्फ चार अंडाणु ही सुरक्षित किए जा सके।
पूर्णिमा सूद बताती हैं, “आज एग फ्रीजिंग पर पहले से ज्यादा चर्चा हो रही है, लेकिन व्यवहार में कई महिलाएं अब भी निर्णय लेने में देर कर रही हैं।”
यह सिर्फ मेडिकल नहीं, भावनात्मक निर्णय भी है
विशेषज्ञों के अनुसार एग फ्रीजिंग का निर्णय केवल स्वास्थ्य से जुड़ा नहीं होता, बल्कि इसमें भावनात्मक और सामाजिक पहलू भी शामिल होते हैं। पूर्णिमा सूद के अनुसार, काउंसलिंग बहुत जरूरी है, क्योंकि इस दौरान महिलाओं के मन में रिश्तों, परिवार की उम्मीदों और समाज की सोच को लेकर कई सवाल आते हैं।
वह बताती हैं, “आज भी कई महिलाओं को डर रहता है कि अगर उन्होंने अपने पार्टनर या ससुराल वालों को बताया कि उन्होंने एग्स फ्रीज कराए हैं, तो लोग उन्हें गलत समझेंगे।” कई लोगों की यह भी गलत धारणा है कि यह सिर्फ उन महिलाओं के लिए होती है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रही हों।
पूर्णिमा सूद बताती हैं, “एग फ्रीजिंग को लेकर आज भी कई मिथक हैं। कुछ महिलाओं को लगता है कि अगर उन्होंने एग्स फ्रीज करा लिए, तो भविष्य में उन्हें आईवीएफ (IVF) करवाना ही पड़ेगा। जबकि ऐसा नहीं है।” वह इसे आसान उदाहरण से समझाते हुए बताती हैं, “यह बैंक लॉकर में रखे गहनों की तरह है। आवश्यकता पड़ने पर ही उनका प्रयोग किया जाता है। अगर महिला बाद में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर लेती है, तो फ्रीज किए गए अंडाणुओं का प्रयोग करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।”
कई महिलाएं इसे निजी रखना पसंद करती हैं
गायत्री सेठी के लिए यह पूरा निर्णय बेहद निजी था। वह बताती हैं, “हमने इस बारे में किसी को नहीं बताया। यह निर्णय सिर्फ हमारे बीच रहा।” उनके अनुसार, यह निर्णय न तो किसी सामाजिक दबाव की वजह से था और न ही किसी विचारधारा को साबित करने के लिए। यह सिर्फ भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए लिया गया एक व्यावहारिक कदम था।
गायत्री बताती हैं, “मेरे लिए यह उस स्थिति पर नियंत्रण रखने जैसा था, जो भविष्य में अनिश्चित हो सकती थी।” आज उन्हें लगता है कि फर्टिलिटी से जुड़े मुद्दों पर लोग पहले से ज्यादा खुलकर बात कर रहे हैं, लेकिन उस समय इसे निजी रखना उन्हें ज्यादा सहज लगा।
एग फ्रीजिंग हर किसी के लिए आसान नहीं
जागरूकता बढ़ने के बावजूद, भारत में एग फ्रीजिंग अब भी काफी महंगी प्रक्रिया है। आमतौर पर एक बार एग फ्रीजिंग कराने की लागत 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक होती है। इसमें दवाइयों, अस्पताल और लैब का खर्च शामिल होता है। इसके अलावा, हर साल अंडाणुओं को सुरक्षित रखने के लिए 20,000 से 50,000 रुपये तक का स्टोरेज शुल्क देना पड़ सकता है। कई महिलाओं को पर्याप्त संख्या में अंडाणु सुरक्षित करने के लिए एक से ज्यादा बार यह प्रक्रिया करानी पड़ती है। इसलिए फिलहाल यह विकल्प मुख्य रूप से उन शहरी महिलाओं के लिए ज्यादा उपलब्ध है, जो इसका खर्च उठा सकती हैं।
आजादी भी, दबाव भी
कुछ महिलाओं के लिए एग फ्रीजिंग अपने समय पर मां बनने की आजादी का प्रतीक है। वहीं, कुछ के लिए यह आधुनिक जीवन की चुनौतियों—देर से शादी, करियर का दबाव और निजी लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश—को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके बारे में पूरी जानकारी लेकर फैसला लेना सबसे जरूरी है। यह भविष्य के लिए एक विकल्प जरूर देता है, लेकिन मां बनने की गारंटी नहीं देता।
गायत्री सेठी के लिए इसकी सबसे बड़ी अहमियत मानसिक सुकून थी। वह बताती हैं, “मेरे लिए सबसे जरूरी चीज़ यह थी कि हमने भविष्य के लिए एक और संभावना खुली रखी थी।”
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