भारत में कब्ज को ठीक करने करने वाली गलतधारणाएं, मिथक और घरेलू उपचार देखने को मिलते हैं। हालांकि इनमें से कुछ सही हो सकते हैं लेकिन सभी नहीं। इन मिथकों पर विश्वास करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, जिसकी वजह से कब्ज की समस्या बदतर हो सकती है और उपचार करने में भी देरी हो सकती है। इस लेख में हमने कब्ज संबंधी मिथकों की वास्तविकता पता लगाने का कार्य किया है।
भारतीय घरों में आहार और पाचन संबंधी कुछ गलत धारणाएं क्या हैं?
भारतीय घरों में कब्ज संबंधी कुछ आम मिथक इस प्रकार हैंः
मिथक 1: अनार का जूस कब्ज को ठीक कर सकता है।

अनार के जूस से कब्ज ठीक नहीं होता है। डॉ. स्वाति दवे, आहार विशेषज्ञ (Dietician), खाद्य और पोषण में PhD, पुणे, महाराष्ट्र बताते हैं, “हालांकि अनार का जूस एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, पॉलीफेनोल्स (IBD-इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के लिए उपयोगी है, लेकिन कुछ लोगों में एलर्जी का कारण बन सकता है) से भरपूर होता है लेकिन यह कब्ज का उपयुक्त उपचार नहीं है। इसका मुख्य कारण इसमें फाइबर की कमी का होना है। फाइबर मल त्याग (bowel movement) के लिए आवश्यक कारक है। अत: कब्ज से राहत पाने के लिए इसके जूस के बजाय अनार का सेवन करना बेहतर है।
मिथक 2: कच्चा प्याज खाने से कब्ज ठीक होता है।

यह अन्य मिथक है। हालांकि कच्चे प्याज में फाइबर होते हैं, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है कि कच्चे प्याज खाने से कब्ज का उपचार होता है। इसके अलावा, संवेदनशील पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए, यह उनकी सेहत को खराब कर सकता है क्योंकि यह गैस, पेट फूलना (bloating) और असुविधा का कारण बन सकता है। कामना चौहान, आहार विशेषज्ञ (Dietician), न्यूट्रिफियस डाइट क्लिनिक, रांची, झारखंड बताती हैं “अलसी के बीज, ओट्स और पत्तेदार हरी सब्जियों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, हाइड्रेटेड रहना भी आवश्यक है क्योंकि पानी पाचन को आसान बनाने और कब्ज की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
क्या खाली पेट गर्म पानी पीने से कब्ज में राहत मिलती है?

डॉ. पल्लव प्रजापति, BAMS, CAD, CCYP (BHU), संस्थापक, चेतन आयुर्वेद, वाराणसी बताते हैं, “स्वस्थ जीवन के लिए रोजाना सुबह आधा गिलास (अधिकतम-एक गिलास गुनगुना पानी) लें। खाली पेट गर्म पानी पीना लाभदायक है क्योंकि यह पाचन अग्नि को बढ़ाता हैः अग्नि दीपन और पचन; और उचित चयापचय गतिविधि को बहाल करने में मदद करता है। दोषों को संतुलित करता है इस प्रकार त्वचा के रंग और चमक (वात, पित्त और कफ) में सुधार करता है। यह श्रुतों (शरीर चैनलों) वात अनुलोमन क्रिया (कब्ज में सुधार) की शुरुआत करता है। बुखार के शुरुआती चरण में उपचार प्रोटोकॉल के रूप में गुनगुना पानी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा, डॉ. अन्नुसुइया गोहिल, MD स्कॉलर, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली बताती हैं, “उष्णोदक (गुनगुना पानी) शरीर के लिए लाभदायक है। यह संचित अमा (शरीर का अपच घटक) को पचाने में मदद करता है। आयुर्वेद संहिता में उषापन (सुबह खाली पेट पानी पीना) का उल्लेख किया गया है। हां, खाली पेट गर्म पानी पीने से कब्ज से राहत मिल सकती है। इसके बावजूद यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि केवल गुनगुने पानी पर निर्भर रहना समाधान नहीं है बल्कि कब्ज के अनुकूल आहार और कभी-कभी दवाओं की भी आवश्यकता होती है।” डॉ. गोहिल के अनुसार यह कैसे मदद कर सकता हैः
- आंत्र संकुचन को सक्रिय करना: गुनगुना पानी आंत्र को सिकोड़ने के लिए पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है और आंत्र के माध्यम से अपशिष्ट को स्थानांतरित करने में भी मदद करता है।
- मल को नरम करना: गुनगुना पानी मल को नरम करने में मदद करता है ताकि यह आसानी से शरीर से बाहर निकल सके और आंत्र प्रक्रिया के दौरान कम दर्द हो। यह पेरिस्टालिसिस आंतों की लहर जैसे मांसपेशियों के संकुचन के उत्तेजक के रूप में भी कार्य करता है।
- आंत को डिटॉक्सीफाई करना: गुनगुना पानी आंतों को साफ करने में मदद कर सकता है, विषाक्त पदार्थों को हटा सकता है ताकि वे इकट्ठा न हों और कब्ज का कारण न बनें।
कब्ज के प्रबंधन के लिए जुलाब (laxatives) का सेवन करना लाभकारी है अथवा नहीं?
कब्ज से निपटने में जुलाब अस्थायी रूप से सहायक होते हैं लेकिन उनका सेवन सावधानीपूर्वक करने की आवश्यकता है।
जुलाब (laxatives) का सेवन कब किया जा सकता है?
- त्वरित राहत (Fast Relief): वे उन स्थितियों में तेजी से राहत के लिए होते हैं जब हाइड्रेशन, फाइबर या कसरत जैसे प्राकृतिक तरीके कारगर नहीं होते हैं।
- विशिष्ट आवश्यकताएं: stool softeners या bulk-forming laxatives जैसे जुलाबों का प्रयोग आमतौर पर किया जा सकता है। इसमें सर्जरी या यात्रा कर चुके लोग शामिल हैं।
जुलाब (laxatives) का सेवन कब नहीं करना चाहिए?
- निर्भरता: बार-बार प्रयोग करने से निर्भरता हो सकती है, जहां आंत्र को ठीक से काम करने के लिए जुलाब का सेवन करने की आवश्यकता होती है।
- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलनः उत्तेजक जुलाब (stimulant laxatives) के अत्यधिक प्रयोग से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है, जिससे शरीर में पानी की कमी या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्या हो सकती है।
- अंतर्निहित समस्याओं को छिपाना/दबाना: जुलाब पर निर्भरता एक गंभीर स्थिति को छुपा या दबा सकती है। उदाहरण के लिए इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या ब्लॉकेज।
जुलाब का सेवन बहुत कम करना चाहिए या इसका सेवन चिकित्सक की सलाह के बाद ही करना चाहिए। इस स्थिति में उचित आहार, पर्याप्त हाइड्रेशन और जीवन शैली में परिवर्तन करना कब्ज में लाभदायक हो सकते हैं।
निष्कर्ष
कब्ज स्वास्थ्य संबंधी मुख्य समस्याओं में से एक है जिससे संबंधित विभिन्न प्रकार के मिथक, क्लेम और घरेलू नुस्खें देखने को मिलते हैं। हालांकि इनमें से कुछ लाभकारी हो सकते हैं लेकिन उनके वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी देखने को मिलती है। अत: इन मिथकों की संपूर्ण जानकारी होना महत्वपूर्ण है ताकि पाचन स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सके।
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